वसीम अकरम त्यागी-
मधु किश्वर ने ‘मोदीनामा’ लिखा था। अब इन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सनसनीखेज़ आरोप लगाए हैं। ऐसे आरोप लगाने के बावजूद क्या इन मोहतरमा पर कोई कार्रवाई होगी? यदि कोई शख्स प्रधानमंत्री मोदी पर अशोभनीय टिप्पणी कर देता है तो भाजपा शासित राज्यों की पुलिस उस शख्स को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया करती है। अब यहां प्रधानमंत्री के चरित्र पर ऐसे गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं, क्या कोई कार्रावाई होगी?
मुझे सुब्रमण्यम स्वामी और मधु किश्वर आदि की नरेंद्र मोदी जी से संबंधित निजता संबंधी ग़लीज़ टिप्पणियों में कोई रुचि नहीं है। इन दोनों पर भरोसा करके कीचड़ में लिथड़ना मेरे विवेक को गवारा नहीं है। देश में और दुनिया में बहुत कुछ ग़लत किया जा रहा है और हो रहा है। सवाल सिर्फ़ यह है कि मैं उसमें शामिल हो जाऊँ या नहीं? मैं बिना किसी मैटीरियल के कुछ स्त्रियों (जो सांसद और मंत्री हैं) को लांछित करने के अविश्वसनीय और मौक़ापरस्त लोगों के दावे के विस्तार का माध्यम नहीं बनना चाहता। एप्सटीन के गैंग पर नाबालिग बच्चों के अपहरण, बलात्कार और हिंसा का मामला है। दो बालिग़ लोगों की सहमति से बने संबंध का नहीं। एक क़ानूनन अपराध है और दूसरा नहीं। -शीतल पी सिंह (वरिष्ठ पत्रकार)

ABP NEWS की एंकर रोमाना कह रही जो खुद तलवे के साथ मलाई भी चाट रही हैं। पता यह करना है, मलाई अलग से मिलती है या तलवे पर लगाकर। मधु किश्वर से सबूत मांग रही और कह रही है मलाई खाई हो तो मत बोलो लेकिन यही बात अगर राहुल गांधी के लिए कोई लिखता तो रोमाना सबूत मांगती? अंजना और रुबिका लियाकत पीछे छूट गई, आती ही होंगी महामानव के बचाव में। -ए के स्टालिन
अमिताभ श्रीवास्तव-
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कट्टर अंधभक्त रह चुकी मधु किश्वर ने उन पर बेहद संगीन और सनसनीख़ेज़ आरोप लगाये हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर अंग्रेज़ी में धड़ाधड़ पोस्ट करते हुए मधु किश्वर ने मोदी के बारे में महिलाओं को लेकर जो टिप्पणियां की हैं वो सीधे चरित्र हनन के दायरे में आती हैं।
उन्होंने नरेंद्र मोदी के साथ-साथ अलग-अलग संदर्भ-प्रसंग में आनंदीबेन पटेल, हरदीप पुरी, स्मृति ईरानी( मधु किश्वर ने उन्हें 12वीं पास कहा है), अमित मालवीय (इनके लिए porn pedler विशेषण इस्तेमाल किया है) मानसी सोनी, प्रदीप शर्मा का भी ज़िक्र किया है। उन्होंने मानसी सोनी से जुड़े मामले की विवादास्पद सीडी देखने का दावा भी किया है। उनकी टिप्पणी में भीमटे-मीमटे जैसे शब्द भी आए हैं जो उनकी कट्टरपंथी घृणा, झल्लाहट और मानसिक असंतुलन की तरफ इशारा करते हैं।
मधु किश्वर 2014 में नरेंद्र मोदी की कट्टर समर्थक के तौर पर अचानक राष्ट्रीय मीडिया में तेज़ी से उभरी थीं। उससे पहले दिल्ली-मुंबई के एक्टिविस्ट सर्किल में उनकी पहचान स्त्री मुक्ति के सवालों पर सक्रिय नारीवादी सामाजिक कार्यकर्ता और महिलाओं के मुद्दों से जुड़ी पत्रिका ‘मानुषी’ की संपादक के तौर पर थी। ‘मोदीनामा’ लिखने वाली कट्टर समर्थक से मोदी की कट्टर आलोचक बन जाने और सार्वजनिक तौर पर इतना ज़हर उगलने के पीछे मधु किश्वर की अपनी महत्वाकांक्षाओं पर पानी फिर जाना भी एक बड़ी वजह हो सकती है। ऐसी सोच और सत्ता का समर्थन करने वाली मधु किश्वर खुद को दूध का धुला साबित करने की कोशिश कर रही हैं,जबकि इससे वह खुद सवालों के घेरे में आ जाती हैं।

नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद एक दशक से ज़्यादा के समय के दौरान मधु किश्वर की छवि निहायत अगंभीर किस्म की, कट्टर , ज़हरीली सांप्रदायिक सोच वाली महिला की बनी है और उनकी साख शून्य के स्तर पर पहुंच चुकी है। मधु किश्वर ने अपनी टिप्पणी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जैसे आरोप लगाये हैं वैसे आरोप अगर विपक्ष के किसी नेता से जुड़े होते तो बीजेपी और उससे जुड़े संगठन, तमाम बुद्धिजीवी आसमान सिर पर उठाये होते। सारा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ईरान-इज़रायल-अमेरिका की जंग छोड़कर उसी पर चीख-चिल्ला रहा होता। फिलहाल इस मुद्दे पर सब जगह सन्नाटा है।
सवाल यह भी मधु किश्वर पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई है? सुब्रमण्यम स्वामी भी लंबे समय से मोदी के बारे में अनाप-शनाप बातें कहते आ रहे हैं लेकिन उन पर भी अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। कोई अन्य अगर इस तरह की बात कहीं लिख दे, कह दे तो उसको सीधे जेल में डाल दिया जाएगा और सुप्रीम कोर्ट भी जमानत नहीं देगा।
मधु किश्वर जो कह रही हैं वह अगर सच है तो सबसे बड़ी अपराधी तो वह खुद हैं जो किसी लालच में ऐसी सत्ता का अंधा समर्थन करती रहीं। अगर अपने कहे को लेकर ईमानदार हैं तो प्रेस कान्फ्रेंस करें और सब सबूत सहित सामने रखें। यह भी कि अगर ज़रा से विरोध से अकाउंट बंद करवा दिए जाते हैं, लोगों को जेल में डाल दिया जाता है लेकिन मधु या स्वामी के खिलाफ कुछ नहीं होता तो यह अपने आप में सवाल खड़े करता है।
-अशोक कुमार पांडेय (लेखक और पत्रकार)
एपस्टीन फाइल का इंडियन वर्जन सामने आया है, सरेंडर जी की आत्मकथा लिखने वाली महिला ने अवतारी पुरुष को व्यभिचारी पुरुष बताया है। ये वो सच है, जिसे किताब में छुपा लिया गया था?
हम क्या चाहते, अज़ादी!
एपस्टीन गैंग से, आज़ादी!!-कन्हैया कुमार (कांग्रेस नेता)
पहले मोदी जी के चरणों में लोट रही थी उचित स्थान नहीं मिला तो अब मोदी जी को गाली देते हुए लौट रही हैं!
अवसर वादी लोग किसी के सगे नहीं होते वो सिर्फ़ अलफ़ायदा ग्रुप के सदस्य होते हैं ऐसे लोगो से कोई सहानुभूति नहीं होनी चाहिये! सांप्रदायिक व्यक्ति किसी भी तरफ़ दिखे पर वो समाज का दुश्मन होता है। क्यों मधु किश्वर जी? वैसे मोदी जी तो शुरू से ऐसे ही थे!-सुरेंद्र राजपूत
देश के प्रधानमंत्री पर महिलाओं के शोषण के गंभीर आरोप लग रहे हैं। यह आरोप लगाने वाला कोई और नहीं बल्कि उनकी बायोग्राफी लिखने वाली एक महिला हैं।
महिला के आरोपों के अनुसार, मोदी जी ने महिलाओं का शोषण किया और बदले में उन्हें महत्वपूर्ण पद दिए। मोदी जी ने कई महिलाओं की जासूसी भी कराई।
अब सवाल उठ रहा है कि जब प्रधानमंत्री पर इतने गंभीर आरोप लगे हैं, तो क्या इसकी निष्पक्ष जांच होगी?
महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान पर सवाल उठे हैं और इनका जवाब पूरा देश माँग रहा है।
-आम आदमी पार्टी
जब तक फायदा मिल रहा था, तब तक गुणगान करते रहो , महानतम बताते रहो । जैसे ही लाभ बंद हुआ या आगे कोई उम्मीद नहीं दिखे तो उसी व्यक्ति का चरित्र हनन !! ये सिर्फ मौका-परस्ती है, नैतिक पतन की पराकाष्ठा है और भारतीय राजनीति में इसकी कोई जगह नहीं होनी चाहिए। खासकर जब बात देश के प्रधानमंत्री जैसे पद की हो । आप को नरेंद्र मोदी की नीतियाँ पसंद नहीं है तो आलोचना कीजिए। काम करने का तरीक़ा पसंद नहीं है तो सवाल उठाइए लेकिन चरित्र हनन ? और उसमें महिला सांसदों को घसीटना निहायत ग़लत और निंदनीय है ।
-विनोद कापड़ी (वरिष्ठ पत्रकार और फ़िल्मकार)
सत्ता की ताकत के दंभ से दग्ध भाजपा ने खुद ही व्यक्तिगत और ओछे आरोपों की शुरुआत की।
देश के पूर्व प्रधानमंत्री पंडित नेहरू पर भरी संसद में निशिकांत दुबे जैसों ने ओछे आरोप लगाए और पूरी सरकार लोकसभा अध्यक्ष सुनते रहे, तालियां बजाते रहे, हंसते रहे। मुझे द्रौपदी का चीरहरण याद आया जिसे देखकर कौरव अट्टहास कर रहे थे।
अब फिर भाजपा की सुपरिचित, मधु किश्वर ने पीएम मोदी और अन्य लोगों पर तमाम तरह के आरोप लगाए हैं। यकीनन किसी भी आरोप पर वो चाहे किसी के खिलाफ हो यूंही विश्वास नहीं किया जा सकता। लेकिन सवाल तो खड़ा होगा ही कि ऐसा क्यों हो रहा है कि यह सब खबरें भाजपा के भीतर से ही आ रही हैं?
मधु किश्वर ने अलग अलग वक्त में तमाम लोगों को लेकर तमाम तरह के दावे किए हैं लेकिन पब्लिक डिस्कोर्स में वह सब नहीं कहा का सकता। मैंने भी उनके लिखे के अनुदित हिस्से को हटा दिया है। लेकिन भाजपा को अपने भीतर झांकना होगा। कांग्रेस की तारीफ करनी होगी कि पार्टी के किसी भी नेता ने मधु किश्वर के खुलासे के बाद कोई सतही टिप्पणी नहीं की है।
-आवेश तिवारी (कांग्रेस आई टी सेल)
सबूत मांगने वाले प्रचारकों के लिए
संजय कुमार सिंह-
बहुत सारे संघी प्रचारक सबूत मांगते हैं। अभी भी ढूंढ़ रहे हैं। ऐसे लोगों से कहना है कि मुझे कोई जल्दी नहीं है। जो जैसे आ रहा है, सार्वजनिक हो रहा है। सोशल मीडिया से हटवाने के तनाशाही पूर्ण कानून और उसे लागू करने के बावजूद। मेरे पास कोई नया या अलग सबूत नहीं है। जो है उसे संजीव भट्ट ने पेश किया था। अभी तक जेल में हैं। इसलिए, और अब मुझे नहीं लगता कि किसी को कोई जल्दी है। सबूत जितनी देर से मिलेगा खुलासा उतना बढ़िया और ज्यादा होगा। संजीव भट्ट को सुन लिया गया होता तो भ्रष्टाचार पर अध्याय नहीं होता और भ्रष्टाचार पर कार्रवाई हो रही होती तो अध्याय को हटवाने की जरूरत ही नहीं होती।
यही नहीं, संजीव भट्ट को सुना गया होता तो हरदीप पुरी नहीं होते, एपस्टीन नहीं होता। सुब्रमण्यम स्वामी तो बोलते रहे हैं किसका नहीं बिगड़ा। नेशनल हेरल्ड मामला चल ही रहा है या चलाया ही जा रही है। लेकिन उनके बोलने का असर हुआ कि मधु किश्वर ने अपना अनुभव लिखा। उन्हें मैं नहीं पढ़ता था लेकिन अब पढ़ा, अनुवाद पोस्ट किया तो सबसे तेजी से पढ़ा जा रहा है। लाइक शेयर हो रहा है। अभी और भी लोग हैं, सब को लिखना बोलना पड़ेगा। अगर आपके लिए इतना कम है तो लगे रहिए, इंतजार कीजिए अशोक खैरात के वीडियो देखिए। हेमंत बिसव सरमा की राजनीति समझिए। ममता बनर्जी का विरोध कीजिए। नीतिश कुमार की माला जपिए। शिन्दे को महान मानिए। रेवन्ना, भूषण और सेंगर को भूल जाइए।
वैसे, किस चीज का सबूत (वीडियो) चाहते हैं आप? अगर वीडियो ही चाहिए तो कन्हैया का वीडियो कहां है? सजा क्यों नहीं हो रही है। और एआई के जमाने में वीडियो बनाना कितनी देर का काम है? कन्हैया को बिना सबूत बदनाम नहीं किया गया? उस समय तो वह किसी बड़े या सार्वजनिक पद पर भी नहीं था। फिर क्यों किया गया? समझना होगा कि परिस्थितिजन्य साक्ष्य के अलावा सेक्स करते हुए वीडियो किसी मूर्ख का ही रिकार्ड हो या कोई शातिर ही रिकार्ड कर पाएगा। स्वेच्छा से ही कोई करे तो अलग बात है। पर उसकी जरूरत क्यों है?
अगर शातिर की बात करूं तो चिन्मयानंद का उदाहरण है, उनका वीडियो सबने देखा था। लेकिन हुआ क्या – आरोप लगया गया कि वीडियो ब्लैकमेल करने के लिए बनाया गया था। अब एक शक्तिशाली व्यक्ति को ब्लैकमेल करने के लिए वीडियो बनाने वाला या वाली शातिर तो होगा ही पर वह अपने बचाव के लिए बनाएगा या वसूली के लिए? दोनों संभव है और समझना मुश्किल नहीं है। वसूली के लिए भी हो तो क्या नंगे होकर मालिश करवाना (और करने के लिए मजबूर करना) सामान्य है? मानसी सोनी के साथ गलत हुआ यह वीडियो होगा तभी मानेंगे आप? उसके साथ जो सब हुआ और वह अपनी बात कहने के लिए उपलब्ध नहीं है – क्या यह पर्याप्त नहीं है कि उसके साथ गलत हुआ।
वैसे भी बलात्कार का मामला तो है ही नहीं। सहमति से या दबाव डालकर मजबूर करने का मामला है। सफलता का भी दावा नहीं है। मधु किश्वर ने यही लिखा है कि उन्हें भी शक था। वे दूर रहीं। और भी अनुभव है। अब शिक्षा मंत्री बनाने की बात हो तो आप कहिए कि मधु किश्वर और स्मृति ईरानी में कौन योग्य लगता है कौन बना और इसके बाद सबूत का क्या करेंगे? अगर सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध तथ्यों का यह विवरण, विश्लेषण या प्रस्तुति व्यर्थ है तो कुछ किया नहीं जा सकता है। आप नजरअंदाज करने के लिए स्वतंत्र हैं। पर सबूत की जरूरत किसलिए है। बलात्कार या सेक्स करने का तो आरोप ही नहीं है। बताया जा रहा है कि ऐसा हो सकता है। आप मत मानिए। सबूत मांग कर आप बता रहे हैं कि आप व्यक्ति विशेष को बदनामी से बचाना चाहते हैं।
मेरा या किसी का उद्देश्य बदनाम करना नहीं है। मुझे तो जरूरत भी नहीं लगती है। सजा देने की मांग भी बेमतलब है। कोई नहीं कर रहा है। आपको लगता है कि ऐसा व्यक्ति आपका नेता है – ठीक है, कोई दिक्कत नहीं है – तो यही कहिए। सबूत मत मांगिए, सबूत मुद्दा नहीं है। जो काम गवाह करता है वह सबूत नहीं करता और संजीव भट्ट की गवाही का क्या हश्र हुआ हम जानते हैं। क्यों हुआ होगा अब समझ ना मुश्किल नहीं है। इसीलिए मैं कहता हूं संजीव भट्ट की बात मान ली गई होती तो यह सब नहीं होता। नुकसान भाजपा और आरएसएस का हुआ है तो देखना-समझना उन्हें था। हम-आप क्यों परेशान हों या लड़ें।
अगर आपके पास सुप्रीम कोर्ट का अच्छा वकील नहीं है, केंद्र के नेताओं के साथ अच्छे संबंध नहीं हैं… तो उस लंबे ट्वीट के साथ किसी भी लेवल पर इंगेजमेंट मत करिए.
नोटिस आएगा, तो सम्हालते नहीं बनेगा.
-सिद्धांत मोहन (पत्रकार)
यह ठीक नहीं मैडम!
राजीव ध्यानी-
आप तो देश की जानी मानी एकेडमिशियन, लेखक, संपादक और पत्रकार हैं. विद्वान और अति सम्मानित महिला हैं. आप 75 साल के बुज़ुर्ग नेता का इस तरह चरित्र हनन कैसे कर सकती हैं.
आप तो जानती हैं कि पार्टी कार्यकर्ताओं, उद्योगपतियों, सरकारी अधिकारियों, जजों, मीडियाकर्मियों समेत लाखों लोग उन्हें सिर्फ एक बड़े नेता ही नहीं मानते बल्कि किसी देवपुरुष की तरह उन पर आस्था रखते हैं.
तो फिर देश के लाखों लोगों की आस्था से खेलने का हक़ आपको किसने दिया मै’म?
आरोप लगाने के बाद आप ज़्यादा से ज़्यादा यही तो कहेंगी न, कि मेरे पास तथ्य और प्रमाण हैं.
तो क्या? तथ्य क्या आस्था से ऊपर रखे जा सकते हैं? वह जो सबसे बड़ा फ़ैसला आया था, वह तथ्य पर आधारित था या आस्था पर?
आग से खेल लीजिए, लेकिन आस्था से न खेलिए मैडम! किसी सामान्य नेता पर आरोप होता, तो अलग बात थी. आप तो संत समान बुज़ुर्ग पर आरोप लगा रही हैं. वह भी बड़े जघन्य क़िस्म के. क्या उन्हें देख कर लगता है कि वे ऐसा कर सकते हैं?
आपने कहा कि उन्हें ब्लैकमेल किया जा रहा है. आप ख़ुद ही सोचिए, कि जिसे ब्लैकमेल किया जा रहा है उसे दोषी मानना चाहिए या ब्लैकमेल करने वाले को. आपने तो विक्टिम को ही अपराधी बता दिया.
आपने भावना को आहत किया है मैडम. इसलिए अपराधी बुज़ुर्गवार नहीं, बल्कि आप हैं.



Punit Shukla
March 26, 2026 at 6:59 pm
मधु का दर्द समझा जा सकता है। किसी को मंत्री, किसी को सांसद, MLA, गवर्नर से नवाजा और इसकी किश्ती साहब ने मझधार में ही छोड़ दी। चप्पू भी उठाकर कश्ती से दूर फेंक दिया।
Brajesh Shrivastava
March 27, 2026 at 6:51 am
It is very sad to read ,My views Madam Madhu Ji ..why are you rising question against P M of our country, Is it only to come more on lime light or your personal greed , you are renowned writer but I never expected from your pen to vomit such ugly words against P M.
Brajesh Shrivastava
March 27, 2026 at 6:52 am
It is very sad to read ,My views Madam Madhu Ji ..why are you rising question against P M of our country, Is it only to come more on lime light or your personal greed ??, you are renowned writer but I never expected from your pen to vomit such ugly words against P M.