नई दिल्ली : अनिल अंबानी ने NDTV और उसके एडिटर-इन-चीफ राहुल कंवल के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में मानहानि का मुकदमा दायर किया है। मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई से जुड़ी खबरों की रिपोर्टिंग को लेकर है।
दिल्ली हाईकोर्ट में दायर याचिका में अंबानी ने आरोप लगाया कि NDTV के मौजूदा मालिक Adani Group उनके कारोबारी हितों को नुकसान पहुंचाने और उनकी कंपनियों पर नियंत्रण हासिल करने की मंशा से लगातार उनके खिलाफ खबरें चला रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि पिछले कुछ महीनों में NDTV ने उनके खिलाफ 72 “टारगेटेड” खबरें प्रकाशित की हैं।
मामले की सुनवाई जस्टिस सुब्रमोनियम प्रसाद की अदालत में हुई। अदालत ने NDTV, उसकी पैरेंट कंपनी AMG Media Networks Limited और अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई जुलाई में होगी।
अनिल अंबानी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता श्री वेंकटेश ने अदालत में कहा कि जांच एजेंसियां भले रिलायंस समूह की कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई कर रही हों, लेकिन हर गिरफ्तारी और कार्रवाई को NDTV सीधे अनिल अंबानी के नाम से जोड़कर पेश करता है।
उन्होंने अदालत में एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि 1400 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच करने के मामले में हेडलाइन में सीधे “अंबानी” का नाम इस्तेमाल किया गया, जबकि मामला संबंधित कंपनी से जुड़ा था। वकील ने यह भी आरोप लगाया कि NDTV Profit की एक रिपोर्ट में यह दिखाया गया कि अनिल अंबानी को देश छोड़ने से रोका गया है, जबकि उन्होंने केवल अदालत को एक अंडरटेकिंग दी थी।
याचिका में कहा गया है कि NDTV और उससे जुड़े प्लेटफॉर्म बाजार में घबराहट पैदा करने, रिलायंस पावर और रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर की सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचाने और बाजार की धारणा को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि अडानी समूह के कारोबारी हितों को फायदा पहुंच सके।
अनिल अंबानी ने इस मामले में 2 करोड़ रुपये से अधिक हर्जाने की मांग की है। उन्होंने अदालत को बताया कि यदि उन्हें यह राशि मिलती है तो उसे दान में दे दिया जाएगा।
इस मुकदमे में NDTV और राहुल कंवल के अलावा IANS, NDTV मैनेजिंग एडिटर मनोरंजन भारती, NDTV Profit की मैनेजिंग एडिटर तमन्ना इनामदार और IANS एडिटर आशीष मंचंदा को भी प्रतिवादी बनाया गया है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि मामला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता यानी संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) से जुड़ा है, इसलिए बिना पक्ष सुने अंतरिम रोक लगाने का आदेश नहीं दिया जा सकता। अदालत ने फिलहाल सभी पक्षों से जवाब मांगा है।


