Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

सियासत

मोदी राज में NEET पेपर लीक वाले आईएएस सुबोध कुमार सिंह को इनाम मिला!

पेपर लीक और परीक्षा में अनियमितताओं के बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने नीट-यूजी 2026 एग्जाम निरस्त कर दिए हैं। पांच दिन की चुप्पी, फिर इनकार और भारी फजीहत के बाद एनटीए ने वायरल प्रश्नपत्र के सवाल हू-ब-हू होने की बात कबूल की और इसकी जांच सीबीआई को सौंप दी। सीबीआई ने मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है। लेकिन सवाल सरकार पर उठ रहे हैं। अभ्यर्थियों में शासन के खिलाफ नाराजगी पसर रही है। देशभर में प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं। नीचे पढ़िए…


राहुल गांधी-

देश के युवाओं के सामने एक गंभीर बात रखना चाहता हूँ। एक काम कीजिए – खुद Google कीजिए: “NEET 2024 की भयंकर चोरी के दौरान NTA का DG कौन था, और मोदी सरकार ने उसे आज कहां बैठाया है?”

देखा? समझ आया?

BJP इसी तरह आप जैसे लाखों मेहनती विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को इनाम देती है – उनकी रक्षा करती है, ऊपर से उन्हें तरक्की देती है।

साफ़ है – मोदी जी और भाजपा आपके भविष्य की चोरी में ख़ुद साझेदार हैं।

जिस बाज़ार में आपकी मेहनत, आपके सपने नीलाम हो रहे हैं, उसका एक ही उसूल है – जितनी बड़ी चोरी, उतना बड़ा इनाम।


कांग्रेस के आधिकारिक हैंडल का ट्वीट-

इनसे मिलिए- ये हैं IAS सुबोध कुमार सिंह। जब 2024 में NEET का पेपर लीक हुआ था, लाखों बच्चों की मेहनत बर्बाद हुई थी, तब सुबोध कुमार सिंह NTA के DG थे।

लोगों के गुस्से को शांत करने के लिए मोदी सरकार ने चाल चली और इन्हें पद से हटा दिया।

लेकिन जैसे ही लोगों का गुस्सा शांत हुआ, इन्हें स्टील मिनिस्ट्री में पोस्टिंग दे दी और अब ये छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री के Principal Secretary हैं।

BJP सरकार में इसी तरह छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को इनाम दिया जाता है, उन्हें बड़े-बड़े पदों पर बैठाया जाता है।

कारण साफ है- पेपर लीक के इस गोरखधंधे में BJP सरकार खुद ही साझेदार है, जिसका खामियाजा देश के मेहनती छात्रों को चुकाना पड़ रहा है।

BJP का फंडा साफ है- जितनी बड़ी चोरी, उतना बड़ा इनाम


संजय कुमार राय-

सरकार कह रही है कि नीट पेपर लीक मामले में दोषियों पर कार्रवाई होगी। दोषी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और एनटीए डीजी अभिषेक सिंह को भी पदमुक्त किया जाना चाहिए।

मेरा मानना है कि दोषी तो शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और एनटीए डीजी अभिषेक सिंह भी है क्योंकि अगर एक बार पेपर लीक हो तो उसे मानवीय भूल माना जा सकता है, लेकिन पेपर बार बार लीक होना बताता है कि ये लोग अक्षम हैं और इस पद के लिये योग्य नहीं हैं। परीक्षा से जुड़ी कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों को लेकर छात्रों और अभिभावकों में गहरा असंतोष है।

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और एनटीए डीजी अभिषेक सिंह, दोनों को इस्तीफ़ा देना चाहिए और अगर इस्तीफ़ा ना दें, तो उन्हें बर्खास्त किया जाना चाहिये।


अभिरंजन कुमार-

शिक्षा मंत्रालय को लेकर मोदी कभी सीरियस थे ही नहीं। स्मृति इरानी से लेकर धर्मेंद्र प्रधान तक एक से बढ़कर एक… न जाने किन खदानों से खोदकर लाए ये नायाब हीरे। एक सीरियलों से आई। दूसरा वंशवाद से आया।

शायद शिक्षा का मोदी के जीवन में कोई महत्व ही नहीं है। देश का ऐसा पहला और एकमात्र प्रधानमंत्री, जो अपनी शैक्षणिक डिग्री को भी अपनी निजता का विषय समझता हो, और नागरिकों के निजी स्पेस में भी पेगासस छोड़ देता हो।

इसीलिए कहता हूं कि देश को ऐसे नेता चाहिए, जिसका शिक्षा से कुछ नाता भी रहा हो, जिसने रात-दिन मेहनत करके किसी परीक्षा की तैयारी की हो, इस दौरान गंदे ढाबों में खाने की वजह से जिसे बार-बार फूड पॉयजनिंग भी हुई हो, जिसे जॉन्डिस या अन्य बीमारियां हो जाने के कारण घर भी लौटना पड़ा हो, प्रतिकूल हालातों में जिसे महीनों-महीनों निराशा में भी डूबना-उतराना पड़ा हो, जिसे मां-बाप, रिश्तेदार-नातेदार, गांव-समाज की उम्मीदों का बोझ भी ढोना पड़ा हो, जिसे बहुत मुश्किल से पैसे जुगाड़कर परीक्षा देने के लिए सैकड़ों किलोमीटर दूर किसी दूसरे शहर भी जाना पड़ा हो, ट्रेनों-बसों में धक्के भी खाने पड़े हों, जो प्लेटफॉर्मो पर गमछा या पॉलीथीन बिछाकर सोया भी हो, और इतना सारा संघर्ष करके जिसने इम्तिहान दिया हो और उसमें पास किया हो।

जो व्यक्ति इस प्रक्रिया से कभी गुज़रा ही नहीं, वह छात्रों और नौजवानों का दर्द कैसे समझेगा? वह तो माफिया और दलालों का सिस्टम ही चलाएगा, जिसमें पेपर लीक भी होते रहेंगे, पैरवी और घूसखोरी भी चलती रहेगी, और हमारे फूल जैसे बच्चे सुसाइड भी करते रहेंगे।
किसी का दर्द महसूस करने के लिए एक तो उस दर्द को भोगा हुआ होना चाहिए, और दूसरा दिल भी तो चाहिए, जिसमें केवल चुनावों के सपने ही न आते हों, थोड़ी-सी संवेदना भी बची हुई हो।

वो कहावत है ना- “जाके पग ना फटी बिबाई, सो क्या जाने पीर पराई?” धन्यवाद।


नरेंद्र नाथ मिश्रा-

यह शमर्नाक है! एकबार फिर NEET पेपर लीक की आशंका। हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं। जो लीक पेपर मिले,वही क्वेश्चन परीक्षा में भी मिला! सोचें क्या ट्रामा है!

लाखों स्टूडेंट्स पूरे साल मेहनत करते हैं! बहुत तनाव में रहकर! और जब एग्जाम देकर आते हैं तो उन्हें पता चलता है की पेपर लीक था! उनके मन पर क्या गुजरती होगी!

पिछले साल भी हमने देखा था की पटना से किस तरह खुलासे हुए थे! अंत में स्वीकार कर लिया गया की पेपर लीक तो हुआ लेकिन मान लिया गया की अधिक इलाके तक नहीं गया होगा! तकनीक के समय में कुछ मिनटों में यह हर जगह पहुँच सकता है!

क्यों नहीं बनता है यह मुद्दा? मिडिल क्लास का सबसे बड़ा मुद्दा है! लाखों करोड़ों परिवार इससे जुड़ा है ! क्यों नहीं यह सरकार की प्राथमिकता में है? हर साल एक सा हाल! परीक्षा दर परीक्षा पेपर लीक हो रहे हैं! हर परीक्षा इससे प्रभावित हो रहा है!

रिजल्ट फिक्स हो रहा है! कहीं सालों एग्जाम नहीं हो रहे हैं! और इससे अजीज आकर स्टूडेंट्स प्रोटेस्ट करे उन्हें अर्बन नक्सल बताकर चुप करा दें!

या हर बार हर किसी भी तरीक़े से, कोई तर्क से, कोचिंग वालों को ब्लेम कर, NEET एग्जाम पर लगातार उठ रहे सवाल का जवाब नहीं दिया जा सकता है। वे अपनी गड़बड़ी को जितना डिफेंड करेंगे/करवाएँगे, वे हल्के लगेंगे। ये एग्जाम हर किसी के घर से जुड़ा है। किसी को जानना हो कि क्या मूड है, परीक्षा के बारे क्या राय है, वे वहाँ बच्चों और उनके परिजन से पूछ कर जान सकते हैं।


सुरेश चिपलुनकर-

मोदीजी पहले ही कह चुके हैं कि हमारी सरकार में इस्तीफे नहीं होते.. इसलिए 2026 के इस पेपर लीक पर भी सिर्फ लीपापोती हो जाएगी,, होगा कुछ नहीं…

आपको मूर्ख बनाने के लिए एकाध दो अधिकारियों की “टेंपररी बलि” ले ली जाएगी, जिन्हें पुनः किसी शानदार पद पर बहाल कर दिया जाएगा..

जरा पता कीजिए, NEET 2024 पेपर लीक के समय NTA का मुखिया कौन था? और आज मोदी सरकार ने उसे किस पद पर बैठा दिया है?

बाकी 2014 के बाद तो हमें स्मृति ईरानी से लेकर धर्मेंद्र प्रधान तक एक से बढ़कर एक “नगीने” मिले हैं.. जो इस्तीफा-प्रूफ रहते हैं..


हैरान हूं कि कल मोदी राज में पहली बार नीट यूजी का पूरा एग्जाम ही रद्द हो गया और किसी ने भी NTA के अध्यक्ष प्रदीप जोशी पर उंगली नहीं उठाई।
बाभन पर आरोप लगाने से भी शायद लोगों को अब डर लगने लगा है।
वही प्रदीप जोशी, जो व्यापम के भी अध्यक्ष थे।
नाशिक में एग्जाम माफिया की एक महीने पहले मीटिंग। एक स्टार्टअप की लीज लाइन से जुड़ा प्रॉक्सी सर्वर।
हाईटेक स्कैनर और वॉट्सएप, टेलीग्राम चैनल से गेस पेपर्स की सप्लाई। अरबों का धंधा।
एक पेपर 26–30 लाख का बिका। 300 में से आधे सवाल गेस पेपर से।
भारत में मेडिकल की 59 लाख सरकारी सीटें करीब 23 लाख स्टूडेंट्स। सबका भविष्य खराब।
लेकिन ठीकरा उस निकम्मे सरकारी बाबू पर, जो इसी साल AI इंपैक्ट समिट में गलगोटिया को लाकर बदनाम हो गया।
केरल से कश्मीर तक फैला एग्जाम माफिया का राज और उनके चंदे से मालामाल बीजेपी।
सीबीआई के बस में नहीं, इस साठ–गांठ को तोड़ना।
ऐसा कोई डॉक्टर भी नहीं, जो ऑपरेशन कर इस कैंसर को निकाल सके। -सौमित्र राय, वरिष्ठ पत्रकार

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन