पूर्व जेएनयू छात्र नेता उमर खालिद सितंबर 2020 से दिल्ली की Tihar Jail में बंद हैं। उन्हें फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगा मामले में गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत गिरफ्तार किया गया था। दिल्ली पुलिस का आरोप है कि वह दंगों की “बड़ी साजिश” का हिस्सा थे। हालांकि उमर खालिद और उनके समर्थक इन आरोपों को लगातार राजनीतिक और वैचारिक प्रतिशोध बताते रहे हैं।
उमर खालिद को 13 सितंबर 2020 को गिरफ्तार किया गया था और तब से वह लगातार जेल में हैं। कई बार उन्होंने जमानत की मांग की, लेकिन अदालतों से उन्हें राहत नहीं मिली। हाल के दिनों में सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट में उनकी जमानत याचिकाओं पर सुनवाई हुई है।
अब सोशल मीडिया पर News24 का एक ग्राफिक वायरल हो रहा है, जिसमें लिखा गया है— “तिहाड़ से ‘छूटेगा’ उमर खालिद, क्यों और किन 3 शर्तों पर मिली है जमानत?”
इसी भाषा को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। कई पत्रकारों, मीडिया वॉचर्स और सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि किसी आरोपी या विचाराधीन कैदी के लिए “छूटेगा” जैसे शब्द का इस्तेमाल पत्रकारिता की निष्पक्ष भाषा नहीं माना जाता। आलोचकों का तर्क है कि न्यूज़ चैनलों को अदालत की प्रक्रिया और कानूनी तथ्यों को तटस्थ शब्दों में प्रस्तुत करना चाहिए, न कि ऐसी भाषा में जिससे पूर्वाग्रह झलके।
मीडिया विशेषज्ञों का मानना है कि टीवी पत्रकारिता में पिछले कुछ वर्षों में “क्राइम नैरेटिव” और “स्टूडियो ट्रायल” वाली भाषा बढ़ी है, जहां आरोपियों के लिए उत्तेजक या व्यंग्यात्मक शब्दों का इस्तेमाल आम हो गया है। आलोचकों का सवाल है कि क्या यही भाषा किसी दूसरे चर्चित आरोपी के लिए भी इस्तेमाल की जाती, या फिर उमर खालिद की मुस्लिम पहचान और राजनीतिक पृष्ठभूमि के कारण ऐसी प्रस्तुति की जा रही है।
हालांकि, यह भी सच है कि चैनल की ओर से इस शब्द चयन पर कोई आधिकारिक सफाई सामने नहीं आई है। ऐसे मामलों में यह तय करना कठिन होता है कि भाषा केवल टीआरपी और सनसनी के लिए चुनी गई या उसके पीछे किसी खास पूर्वाग्रह की भूमिका है। लेकिन मीडिया एथिक्स के लिहाज से तटस्थ और संतुलित भाषा की अपेक्षा जरूर की जाती है।

यह news24 tv channel राजीव शुक्ला की पत्नी अनुराधा प्रसाद का है। राजीव शुक्ला काँग्रेस से राज्यसभा सांसद हैं, उनकी पत्नी के भाई रवि शंकर प्रसाद भाजपा के सांसद हैं, और मोदी सरकार में मंत्री रहे हैं। अब इस चैनल की उमर खालिद के लिए भाषा देखिए। चैनल लिख रहा है तिहाड़ से छूटेगा उमर खालिद! यह तू तड़ाक की भाषा! वह भी राजनीतिक बंदी के लिए! क्या ऐसी ही भाषा बलात्कारी आसाराम के लिए भी लिखी जा सकती है? क्या यह चैनल लिख सकता है कि, वापस जेल लौटेगा बलात्कारी आसाराम? नहीं! लेकिन ‘उमर खालिद’ के लिए ऐसी भाषा का इस्तेमाल करेगा, यह जानते हुए भी कि उमर खालिद का जुर्म तक साबित नहीं हुआ है। -वसीम अकरम त्यागी, पत्रकार



Atul Gupta
May 24, 2026 at 8:35 am
Channel ko is akshmaya apradh ke liye pairon mein gir kar kashma maanga chahiye. Aur news punah prakashit Karna chahiye, ki desh ki seva Main Jail gaye Manniya Umar Khalid Sahib ko jamanat sashart Mil gayi hai.