


“पहले इंटरव्यू” की होड़ में मीडिया की साख दांव पर, कई चैनलों ने BJP अध्यक्ष नितिन नबीन के “पहले एक्सक्लूसिव इंटरव्यू” का दावा किया, लेकिन तारीखें और तथ्य अलग कहानी बताते हैं.
BJP के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन जनवरी 2026 में पार्टी की कमान संभालने के बाद से मीडिया में चर्चा का केंद्र रहे हैं. वे BJP के 16वें और सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, जो 45 वर्ष की आयु में इस पद पर पहुँचे. इसी वजह से उनका पहला विस्तृत मीडिया इंटरव्यू कई चैनलों के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गया.
विवाद तब शुरू हुआ जब एक के बाद एक कई बड़े न्यूज चैनलों ने नितिन नबीन के “पहले एक्सक्लूसिव TV इंटरव्यू” का दावा किया.
ABP News, News18 नेटवर्क, NDTV और DD News, सभी ने अलग-अलग समय पर यही दावा किया कि नबीन का पहला बड़ा इंटरव्यू उनके चैनल पर हुआ.
इतना ही नहीं, DD News के लिए पत्रकार रीमा परासर ने सोशल मीडिया पर प्रचार करते हुए इसे “पहला इंटरव्यू” बताया, जबकि News18 के साथ हुई बातचीत को Moneycontrol जैसे प्रतिष्ठित प्लेटफॉर्म ने भी “पहला TV इंटरव्यू” करार दिया.
तारीखों पर नजर डाली जाए तो तस्वीर और साफ होती है.
ANI न्यूज एजेंसी को नितिन नबीन का LIVE इंटरव्यू लगभग दो सप्ताह पहले मिला, जो बाकी सभी दावेदारों से काफी पहले है. लेकिन एएनआई न्यूज़ एजेंसी है, न्यूज़ चैनल नहीं। इसलिए इसके इंटरव्यू को किनारे रख देते हैं।
इसके बाद ABP News ने करीब पाँच दिन पहले अपना इंटरव्यू प्रसारित किया और उसे LIVE एक्सक्लूसिव बताया.
NDTV का इंटरव्यू इसके तीन दिन बाद, यानी करीब दो दिन पहले आया.
यानी तारीखों के आधार पर TV चैनलों में ABP News का दावा सबसे मजबूत दिखता है, लेकिन ANI को यदि गिना जाए तो वह सबसे पहले था.
असली समस्या यह है कि हर चैनल “पहला” की अपनी परिभाषा गढ़ रहा है. कोई कह रहा है “हिंदी TV पर पहला”, कोई कह रहा है “BJP अध्यक्ष बनने के बाद पहला”, कोई “लाइव पहला” और कोई “प्राइम टाइम पर पहला”. इस तरह एक ही इंटरव्यू को कई चैनल अपनी-अपनी सुविधा के अनुसार “एक्सक्लूसिव” साबित करने की कोशिश करते हैं.
यह घटना कोई नई नहीं है, लेकिन इस बार यह बहुत खुलकर सामने आई है. भारतीय न्यूज मीडिया में TRP की होड़ और सोशल मीडिया पर वायरल होने की ललक ने “एक्सक्लूसिव” और “पहला” जैसे शब्दों को अर्थहीन बना दिया है.
जब एक ही व्यक्ति का एक ही विषय पर इंटरव्यू चार-पाँच चैनल “पहला” बताने लगें, तो दर्शक के मन में न केवल भ्रम पैदा होता है, बल्कि मीडिया की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठता है.
नितिन नबीन के इंटरव्यू को लेकर मचा यह घमासान दरअसल उस बड़ी बीमारी का एक छोटा लक्षण है, जो आज के मीडिया परिदृश्य में गहरी जड़ें जमा चुकी है.


