नीलेश पांडेय-
इस लड़के के जान जाने के पीछे 9,000 करोड़ का स्कैम छुपा है। कहानी ध्यान से सुनना।
तो हुआ क्या कि 2008, नोएडा में स्पोर्ट्स सिटी स्कीम लॉन्च की गई, जिसके तहत बड़े-बड़े स्पोर्ट्स फैसिलिटीज, जिसमें स्टेडियम, गोल्फ कोर्स वगैरह बनने थे। अब इस स्कीम के तहत 70% ज़मीन में ये स्पोर्ट्स फैसिलिटी बनने थे और बाकी बचे 30% में फ्लैट्स, विलास, दुकानें वगैरह।
अब लेकिन जब 2008 में ये स्कीम लॉन्च की गई तो किसी भी बिल्डर ने कोई इंटरेस्ट नहीं दिखाया। और ये देखते हुए अथॉरिटीज ने रूल्स रिलैक्स करने शुरू किए और कैसी भी कंपनीज़ को ज़मीन अलॉट करने लग गए। इन्हीं में से एक कंपनी थी लोटस ग्रीन कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड। इस कंपनी को नोएडा के सेक्टर 150 में 329 एकड़ ज़मीन दी गई, वो भी मार्केट वैल्यू से बहुत कम में।
लेकिन जैसा कि मैंने पहले बताया, इस ज़मीन पर उस कंपनी को पहले 70% एरिया में स्पोर्ट्स फैसिलिटी बनाना था और उसके बाद ही वो 30% एरिया में फ्लैट्स वगैरह बना सकती थी। लेकिन यहाँ कर दिया कंपनी ने बहुत बड़ा खेल। उसने खुद बहुत सारी कंपनीज़ बनाईं और इस 329 एकड़ के प्लॉट को 24 छोटे-छोटे प्लॉट्स में डिवाइड कर दिया और इन कंपनीज़ को ट्रांसफर कर दिया। क्यों? ताकि कोई हिसाब ही ना लगा पाए।
और स्पोर्ट्स फैसिलिटी के नाम पर सिर्फ पोस्टर छपवाए और उसके नाम पर अल्ट्रा-लक्जरी फ्लैट्स बनवा दिए। और लोगों को गोल्फ कोर्स के व्यू का सपना दिखाकर फ्लैट्स बेच भी दिए। अब वो प्लॉट्स जो लोटस ग्रीन ने ट्रांसफर किए थे, उसी में से एक था प्लॉट नंबर SC-02/A-3। ये प्लॉट उसने विज़टाउन प्लानर्स प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी को ट्रांसफर किया था एक मॉल बनाने के लिए। और उस कंपनी ने मॉल बनाना शुरू कर दिया।
ये सब गड़बड़ घोटाला चल ही रहा था कि 2021 में CAG की रिपोर्ट आ गई और सारा भांडा फूट गया। CAG ने बताया कि ये पूरा प्रोजेक्ट ‘डिज़ाइन्ड टू फेल’ (designed to fail) था, यानी सबको पता था कि प्रोजेक्ट फेल होगा। और गेस करो सरकार को कितना नुकसान हुआ? पूरे 9,000 करोड़ का। 9,000 करोड़!
इस रिपोर्ट के बाद मामला लफड़े में पड़ गया और काम बंद हो गया। अब काम फिर से शुरू करवाने के लिए ये लोटस ग्रीन कंपनी कोर्ट चली गई। कोर्ट ने CBI इंक्वायरी बिठा दी, लेकिन कंपनी सुप्रीम कोर्ट चली गई। और इस सब में वो प्लॉट SC-02/A-3, जिसमें बस मॉल का बेसमेंट खुद पाया था, उसमें सीवेज और बारिश का पानी भर गया। और ये बात नोएडा अथॉरिटी को पता थी। वो टर्निंग कितना डेंजरस है ये बात भी पता थी। उसमें पहले एक्सीडेंट्स हुए थे, ये बात भी पता थी।
लेकिन जब तक हमारे देश में जान नहीं चली जाती है, तब तक कोई एक्शन नहीं लिया जाता है। और होना क्या था? 27 साल का ये नौजवान डूब कर मर गया।
इन बाबुओं को पैसों के अलावा और कुछ नहीं दिखता है, फिर चाहे किसी की जान ही क्यों ना चली जाए।



