भीलवाड़ा। फर्जी नर्सिंग कॉलेज के खिलाफ प्रकाशित की गई खबर पूरी तरह सत्य और दस्तावेजों पर आधारित है। इन फर्जी कॉलेज के पास आर एन सी और आई एन सी की मान्यता नहीं है। इसके फर्जीवाड़े को सामने लाने के लिए खबर जी न्यूज के पत्रकार दिलशाद खान और पॉप्यूलर लाइव (पूर्व भास्कर रिपोर्टर) के पत्रकार पंकज पारीक द्वारा खुलासा किया गया तो बौखलाए नर्सिंग माफिया ने षड्यंत्रपूर्वक कानून का सहारा लेकर दोनों पत्रकारों की छापी को धूमिल करने का काम किया है।
स्टूडेंट्स की बाइट और सरकारी दस्तावेजों के आधार पर पता चलता है कि इन कॉलेज के खिलाफ इनके ही स्टूडेंट्स ने मोर्चा खोलते हुए 31 अक्टूबर को पहली बार कृष्णा नर्सिंग कॉलेज की तालाबंदी की। इसकी कवरेज के दौरान पता चला कि राजस्थान में इस तरह के 50 से ज्यादा फर्जी नर्सिंग कॉलेज संचालित हो रहे है। इनमें से तीन कॉलेज (श्री बालाजी, रूही और कृष्णा) राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में भी संचालित हो रहे है।


इन कॉलेजों के स्टूडेंट्स खुद भीलवाड़ा विधायक अशोक कोठारी के पास जाकर बिना मान्यता के चल रहे इन फर्जी कॉलेज के बारे में शिकायत दर्ज करवा कर आए, जिन्हें सभी प्रमुख चैनल और अखबारों ने भी प्रकाशित किया है। कॉलेज प्रबंधन की ओर से विधायक कोठारी को भी आश्वासन दिया गया था कि इनकी मान्यता दिसंबर के पहले हफ्ते तक मिल जायेगी जो अभी तक नहीं मिली।
इसी दौरान 16 दिसंबर को श्री बालाजी नर्सिंग कॉलेज के स्टूडेंट्स ने जिलाधिकारी कार्यालय में विरोध प्रदर्शन करके ज्ञापन सौंपा। इस दौरान स्टूडेंट्स ने खुद ऑन कैमरा सभी मीडिया संस्थानों को कॉलेज के फर्जीवाड़ा और उनसे की जा रही अवैध वसूली के बारे में बाइट दी।


स्टूडेंट्स ने ही मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी भीलवाड़ा डॉ रामकेश गूर्जर को भी श्री बालाजी नर्सिंग कॉलेज को लेकर शिकायत की थी, जिसके बाद सीएमएचओ द्वारा भी इस कॉलेज के खिलाफ कुलसचिव राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्विद्यालय, जयपुर को कार्यवाही हेतु लिखा गया। इन आरोपों की तस्दीक करके और संबंधित कॉलेज प्रबंधन, सीएमएचओ और आरोप लगाने वाले स्टूडेंट्स की ऑफिसियल बाइट के आधार पर ही खबर का प्रकाशन किया गया।
इन कॉलेजों का सच सामने आने के कारण और पत्रकारों की आवाज को दबाने के उद्देश्य से नर्सिंग माफिया ने अपनी बौखलाहट और राजनीतिक रसूख के चलते एफआईआर करवा कर सच्चाई को दबाने और 15 साल से जी मीडिया ने निष्पक्ष और निडरता से पत्रकारिता करने वाले दिलशाद खान और 9 साल तक भास्कर के सीनियर जर्नलिस्ट के पद पर कार्यरत पंकज पारीक ने खबर छापी। ऐसे में एक सच्चा पत्रकार क्या कर सकता है। वह सिर्फ दस्तावेज उपलब्ध करा सकता है जिसके आधार पर खबर का प्रकाशन किया गया।
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