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अमर उजाला के बाद नेटवर्क18 और इंडिया टुडे से भी लोग गए ‘वन इंडिया’ में

उत्तर भारत में री-लांच हो रहे वन इंडिया की हिन्दी वेबसाइट ज्वाइन करने के लिए पिछले दिनों अमर उजाला डाट काम से एक साथ छह लोगों के इस्तीफा देने की खबर आई थी। नई सूचना ये है कि कुछ अन्य संस्थानों से भी लोग वन इंडिया ज्वाइन कर रहे हैं जिसमें नेटवर्क 18 और इंडिया टुडे ग्रुप भी शामिल है। पता लगा है कि नेटवर्क 18 से गौतम सचदेव और ब्रजेश मिश्रा वन इंडिया ज्वाइन कर रहे हैं। इंडिया टुडे ग्रुप से समर्थ सारस्वत के जाने की खबर है। वे यहां पर न्यूजफ्लिक्स की टीम में हैं। ये तीनों लोग पहले अमर उजाला डाट काम में अखिलेश श्रीवास्तव के साथ काम कर चुके हैं।

उत्तर भारत में री-लांच हो रहे वन इंडिया की हिन्दी वेबसाइट ज्वाइन करने के लिए पिछले दिनों अमर उजाला डाट काम से एक साथ छह लोगों के इस्तीफा देने की खबर आई थी। नई सूचना ये है कि कुछ अन्य संस्थानों से भी लोग वन इंडिया ज्वाइन कर रहे हैं जिसमें नेटवर्क 18 और इंडिया टुडे ग्रुप भी शामिल है। पता लगा है कि नेटवर्क 18 से गौतम सचदेव और ब्रजेश मिश्रा वन इंडिया ज्वाइन कर रहे हैं। इंडिया टुडे ग्रुप से समर्थ सारस्वत के जाने की खबर है। वे यहां पर न्यूजफ्लिक्स की टीम में हैं। ये तीनों लोग पहले अमर उजाला डाट काम में अखिलेश श्रीवास्तव के साथ काम कर चुके हैं।

वन इंडिया का विस्तार अखबारों की वेबसाइट के लिए बन सकता है चुनौती

वन इंडिया हिन्दी का विस्तार करने की पूरी तैयारी हो गई है। नोएडा में इस वेबसाइट के लिए एक बड़ा न्यूजरूम तैयार हो रहा है, जिसमें वीडियो का सेटअप भी है। उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों में रिपोर्टर भी रखे जाएंगे। खास बात यह है कि इसकी टीम पर बहुत ध्यान दिया गया है। इसमें अमर उजाला, नेटवर्क 18 और आज तक व इंडिया टूडे से युवा पत्रकारों को नियुक्त किया गया है। वन इंडिया के संस्थापक बीजी महेश हैं, जो उन गिने-चुने लोगों मे से एक हैं जिन्होंने भारत में सबसे पहले वेब पोर्टल आरंभ किया और सफल भी रहे। इनके बारे में द मिंट में छपे लेख से विस्तार से जानें। नीचे दिए शीर्षक पर क्लिक करें :

One India Founder BG Mahesh

कंपनी के एमडी बीजी महेश और सीईओ श्रीराम हेब्बार ने करीब 8-9 साल पहले हिन्दी वन इंडिया लांच करने के लिए दिनेश श्रीनेत को ऑफर किया था। उसी दौरान वन इंडिया का एक मल्टीनेशनल कंपनी एओएल से भी अनुबंध हुआ था। जिस वक्त दिनेश श्रीनेत ने बैंगलौर एक छोटी सी टीम बनाकर वन इंडिया हिन्दी आरंभ किया था तब हिन्दी में नवभारत टाइम्स व कुछ अखबारों की वेबसाइट के अलावा कोई स्वतंत्र न्यूज वेबसाइट नहीं थी। यह पहला प्रयोग था जब किसी चैनल या अखबार के सपोर्ट के बिना न्यूज वेबसाइट लांच हुई, जैसे प्रयोग विदेशों में याहू, एमएसएन और एओएल के रूप में हो चुके थे। 

दिनेश तो तीन साल तक वन इंडिया हिन्दी के संपादक की जिम्मेदारी निभाने के बाद जागरण प्रबंधन के बुलावे पर वापस चले गए मगर वन इंडिया हिन्दी का विस्तार होता रहा। आईनेक्स्ट से ही गए अजय मोहन ने दिनेश के साथ काम सीखा और उनके जाने बाद बागडोर संभाली और उसे आगे ले गए। अब इतने साल बाद वन इंडिया ज्यादा आक्रामक तरीके से हिन्दी में उतरना चाहता है। उसने संपादक की जिम्मेदारी के लिए अमर उजाला छोड़ चुके विनोद वर्मा और दिनेश श्रीनेत से भी संपर्क किया। जब दोनों ने अपनी व्यस्तताओं के कारण यह आफर स्वीकार करने से इनकार कर दिया तो कंपनी ने तमिल के संपादक खान को एडीटर इन चीफ बना दिया और तय हुआ कि वे सारी भाषाओं के संपादक होंगे और हिन्दी के संपादक की जिम्मेदारी अखिलेश श्रीवास्तव को दी गई।

इन दिनों हिन्दी के बड़े प्रिंट घरानों के डाट काम ज्यादातर आंतरिक कलह और संकटों से जूझ रहे हैं। ऐसे में इस बात की पूरी उम्मीद है कि वन इंडिया इसका फायदा उठा सकता है। उसके पास बैंगलौर में प्रोफेशन लोगों की टीम है। आने वाले दिनों में यह अखबारों के डाट काम के लिए चिंता की वजह बन सकता है, जो इस नई मार्केट में विस्तार की कोशिशों में जी-जान से लगे हैं। अमर उजाला ने अलग वेब कंपनी बनाई है तो राजस्थान पत्रिका भी यूपी में विस्तार कर रहा है और प्रिंट की तर्ज पर नोएडा में वेब की सेंट्रल डेस्क बना रहा है। 

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