सुप्रीमकोर्ट से मजीठिया क्रांतिकारियों की एक और बड़ी जीत, ३० जून २०१८ तक लेबरकोर्ट को फैसला सुनाना अनिवार्य

मजीठिया वेज बोर्ड के दावों पर श्रम न्यायालय छह माह में ही सुनवाई पूरी करें : सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड के तहत अपने वेतन और बकाये की लड़ाई लड़ रहे देश भर के मीडियाकर्मियों को माननीय सुप्रीमकोर्ट से एक और बड़ी जीत मिली है। माननीय सुप्रीमकोर्ट जयपुर की एक लेबरकोर्ट के उस आवेदन को ठुकरा दिया जिसमें लेबरकोर्ट ने सुप्रीमकोर्ट के ६ माह के टाईम बांड मामले में समयसीमा बढ़ाने का अनुरोध किया था। सुप्रीमकोर्ट ने सभी लेबरकोर्ट को निर्देश दिया है कि ३० जून २०१८ तक लेबर कोर्ट वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट की धारा १७(२) के तहत चल रही सुनवाई पूर्ण कर ३० जून तक अपना आदेश जारी कर दें।

मजीठिया वेजबोर्ड मामले में माननीय सुप्रीम कोर्ट का एक और सख्त आदेश जारी हुआ है। माननीय न्यायालय ने जयपुर के लेबर कोर्ट की सुनवाई की समयसीमा बढ़ाने की याचिका पर ताजा आदेश जारी करते हुए स्पष्ट कर कर दिया है कि लेबर कोर्ट को रेफरेंस जारी होने के 6 माह के दौरान ही फैसला सुनाना होगा। हालांकि कोर्ट ने जयपुर लेबर कोर्ट को मामूली राहत देते हुए 30 जून 2018 तक निर्णय सुनाने को कहा है।

माननीय सुप्रीमकोर्ट का यह फैसला देश के सभी लेबरकोर्ट को मानना अनिवार्य होगा। बताते हैं कि जस्टिस मजीठिया वेजबोर्ड मामले में माननीय सुप्रीमकोर्ट ने देश की उन सभी लेबरकोर्ट को हिदायत दिया था कि उनके यहां अगर वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट की धारा १७(२) के तहत कोई मामला विचाराधीन है तो रेफ्रेंश लगाने की तिथि से ६ माह के भीतर इस मामले की सुनवाई पूरी करें।

इसके बाद माननीय सुप्रीमकोर्ट के इस आदेश पर रियायत मांगने और इसकी समय सीमा बढ़ाने के लिये जयपुर के लेबरकोर्ट नंबर २ ने एक आवेदन माननीय सुप्रीमकोर्ट में लगाया और निवेदन किया है ६ माह में सुनवाई पुरी करने के टाईमबांड मामले में सुप्रीमकोर्ट लेबरकोर्ट को रियायत दे और इसकी समय सीमा जनवरी २०१९ तक बढ़ा दे।

सुप्रीमकोर्ट द्वारा ६ माह के टाईमबांड की समय सीमा इसी महीने के अंत तक खत्म हो रही थी मगर सुप्रीमकोर्ट ने साफ कह दिया कि वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट की धारा १७(२) के तहत जितनी भी सुनवाई लेबरकोर्ट में चल रही है उसकी रेफ्रेंश लगाने के ६ माह के भीतर सुनवाई पूरी करना अनिवार्य है।

जयपुर की अदालत को कुछ राहत देते हुये सुप्रीम कोर्ट ने साफ कह दिया कि ३० जून २०१८ तक वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट की धारा १७(२) के तहत चल रहे मामले में लेबरकोर्ट को फैसला सुनाना अनिवार्य होगा। यह आदेश सभी लेबरकोर्ट में जहां वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट की धारा १७(२) के तहत सुनवाई चल रही है वहां मान्य होगा। यह आदेश मजिठिया वेजबोर्ड मामले की सुनवाई करने वाले जस्टिस रंजन गोगोई और एस भानूमति ने दिया है। इस फैसले पर देशभर के मजीठिया क्रांतिकारियों ने खुशी जतायी है।

इससे यह भी स्पष्ट हो गया है कि जो मीडियाकर्मी जब भी मजीठिया का क्लेम लेबर कोर्ट में लगाएगा, उसे छह माह के भीतर लेबर कोर्ट का फैसला मिल जाएगा।

जयपुर के लेबर कोर्ट नंबर-2 के पीठासीन अधिकारी ने अवमानना याचिका नंबर 411 आफ 2014 पर 19.06.2017 को आए फैसले में वर्किंग जर्नलिस्ट्स एक्ट की धारा 17 (2) के तहत लेबर कोर्ट में सुनवाई को टाईम बाउंड करने को लेकर डाली गई आईए नंबर 187 आफ 2017 पर 11-10-2017 को जारी 17 (2) के तहत रेफरेंस की सुनवाई छह महीने में पूरी करने के आदेश में 31 जनवरी, 2019 तक छूट देने की अपील की थी।

इस अर्जी पर सुनवाई करते हुए माननीय न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई और आर. भानुमति की खंडपीठ ने 23 मार्च, 2018 को जारी आदेश में साफ तौर पर कहा है कि 17 (2) के तहत रिकवरी के मामलों में रेफरेंस जारी होने के 6 माह के दौरान ही हर हाल में सुनवाई पूरी करके फैसला सुनाना होगा। हालांकि माननीय सुप्रीम कोर्ट ने जयपुर के लेबर कोर्ट नंबर -2 को छह माह से अधिक समय में थोड़ी राहत देते हुए 30 जून तक सुनवाई पूरी करके निर्णय सुनाने को कहा है।

माननीय सर्वोच्च न्यायालय के इन आदेशों के बाद मजीठिया वेजबोर्ड की रिकवरी के मामलों को लटकाए बैठे श्रम न्यायालयों और अधिकारियों को अवमानना की कार्रवाई में लपेटा जा सकता है। ज्ञात हो कि माननीय सुप्रीम कोर्ट के टाइम बाउंड आदेशों को लेकर यह कहते हुए भ्रम की स्थिति पैदा की जा रही थी कि इसमें preferly लिखा गया है, जो सख्त आदेश नहीं है और देर होने पर राहत मिल सकती है। पर इस तेइस मार्च के फैसले से साफ है कि श्रम न्यायालयों को छह माह में ही मजीठिया वेज बोर्ड के दावे निपटाने होंगे। माना जा रहा है कि इस आदेश के बाद मजीठिया वेज बोर्ड के तहत दावा लगाने वाले मीडियाकर्मियों की संख्या में जबरदस्त उछाल आ सकती है।

पत्रकार और आरटीआई एक्टीविस्ट शशिकांत सिंह की रिपोर्ट. संपर्क : ९३२२४११३३५



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Comments on “सुप्रीमकोर्ट से मजीठिया क्रांतिकारियों की एक और बड़ी जीत, ३० जून २०१८ तक लेबरकोर्ट को फैसला सुनाना अनिवार्य

  • sudesh sharma says:

    Jay Bhole aasa hi hona chiyaa both parshaan kar diya 36 years service ki fir bi mera sath acha nahi kiya blole nath en k sath bi kuch bora hoga har aati ka end haa en ka bi hoga

    Reply
  • Yeh Bhaskar wale majhetia nai denge. Bhaskar Chandigarh ke office mein HR deptt se Manoj Mehta, Naveen Sharma employees ko harrass kr rhe hai.

    Accounts deptt se Amit Mittal aur Ravinder Dua bhi employees ko harrass kr rhe hai. Amit Mittal to apne aap ko Bhaskar ka baap samajhta hai…

    In logo ki wajah se Bhaskar Chandigarh
    dubega

    Reply

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