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सियासत

पी. चिदंबरम का बीजेपी की वॉशिंग मशीन में धुलने का वक्त आ गया है?

राकेश कायस्थ-

पी. चिदंबरम लगातार जिस तरह के बयान दे रहे हैं, उससे समझ में आ रहा है कि उनके बीजेपी की वॉशिंग मशीन में धुलने का वक्त आ गया है। ईडी के जंजाल से निकलना है। बीजेपी को तमिलनाडु में किसी हिमंता बिस्वा शर्मा की जरूरत है। बहुत संभव है, फिलहाल अपनी पार्टी के पुराने फैसलों पर सवाल उठाते चिदंबरम आनेवाले दिनों में मोदी नाम जपते नज़र आयें।

अपनी पत्नी सुनंदा पुष्कर की संदिग्ध मौत के बाद पूछताछ के दायरे में आये शशि थरूर का भी यही हाल रहा है। थरूर, चिदंबरम और गुलाम नबी आज़ाद जैसे दर्जनों लोग कांग्रेस के वर्गीय चरित्र का प्रतिनिधि चेहरा हैं। ये लोग साबित करते हैं कि पार्टी पर परंपरागत रूप से सत्ता सुख भोगने वाले इलीट का कब्जा रहा है।

कामराज के बाद राहुल गाँधी पहले ऐसे नेता हैं, जिन्होंने पार्टी के इस चरित्र को पहचाना है और उसे बदलने की कोशिश कर रहे हैं। राहुल गाँधी भारत के इतिहास के एकमात्र राजनेता है, जिसने अंतहीन प्रताड़ना के बावजूद झुकने से इनकार किया है। उनका यह व्यवहार निजी आचरण के पाक-साफ होने का प्रमाण भी है

कांग्रेस की राजनीति को बरसों तक कवर करने वाले एक पत्रकार ने (फिलहाल नाम याद नहीं आ रहा) बहुत दिलचस्प बात कही थी “राहुल गाँधी और नरेंद्र मोदी की चुनौतियां एक जैसी थी। दोनों अपनी पार्टियों में जमे पुरानी दिग्गजों से नाराज़ थे, और परंपरागत संरचना को तोड़ना चाहते थे। राहुल गाँधी के पास सत्ता पर पकड़ मजबूत करने का मौका था, लेकिन दस साल में उन्होंने इसका कोई फायदा नहीं उठाया और निचले पर लीडरशिप तैयार करने में जुटे रहे। पार्टी के भीतर बैठे गिद्धों को ये बात पसंद नहीं आई और उन्होंने राहुल गाँधी के पप्पू प्रोजेक्ट में परोक्ष रूप से भरपूर योगदान दिया।”

“नरेंद्र मोदी ने ठीक इसका उल्टा किया। जब उनके हाथ में सत्ता नहीं थी, वो तमाम वरिष्ठ नेताओं से अतिशय विनम्रता से पेश आते रहे। लेकिन जैसे ही सत्ता आई, उन्होंने आडवाणी और जोशी ही नहीं बल्कि राजनाथ सिंह सरीखे लोगों को तक को निबटा दिया।”

सत्ता के प्रति अरुचि राहुल गाँधी को महँगी पड़ी। बिना ताकतवर हुए आप कुछ भी नहीं बदल सके। बेशक राहुल गाँधी ब्रांड के तौर पर लगातार मजबूत हो रहे हैं लेकिन संगठन पर पकड़ के मामले में ये बात नहीं कही जा सकती।

देश राहुल गाँधी का आकलन उनकी बौद्धिक क्षमता से नहीं बल्कि इस बात से करेगा कि वो आलसी और मौकापरस्त लोगों से भरी कांग्रेस पार्टी को किस हद तक बदल पाते हैं।

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