मनीष दुबे-
पहलगाम अटैक के बाद पूरा देश भारत सरकार की तरफ देख रहा है। उससे सख्त कदम उठाए जाने की उम्मीद कर रहा है। घटना के दो दिन बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज बिहार के मधुबनी में चुनावी जनसभा को संबोधित किया। बिहारियों को हिंदी और अंग्रेजी में दिए तीन मिनट 45 सेकंड के अपने भाषण में पीएम ने एक बार भी पाकिस्तान का नाम नहीं लिया।
सोशल मीडिया पर लोगों को हजम नहीं हो रहा कि पुलवामा के वक्त आतंकियों को घर में घुसकर मारने की बात कहने वाले पीएम ने 2025 में आतंकियों के देश का नाम तक नहीं लिया…?
एक्स पर राजीव जैन नामक यूजर ने सवाल किया है- “ये अडानी की बिजली पाकिस्तान को मिलती रहेगी या उसपर भी रोक लगाई गई है।”
हालांकि, भारत की मीडिया ने सरकार की तरफ से सिंधु जल समझौते समेत पांच बड़े एक्शन लेने की बात प्रकाशित की है। उधर पाकिस्तान ने भी कई समझौतों को दरकिनार करने के अलावा भारतीयों को जल्द से जल्द पाक छोड़ने की हिदायत दी है।
पत्रकार राजेश साहू ने लिखा है- पहलगाम हमले के बाद भारत के कड़े फैसलों के जवाब में पाकिस्तान ने दोनों देशों के बीच सभी द्विपक्षीय समझौते स्थगित कर दिए हैं। इसके अलावा, 1972 का शिमला समझौता रद्द कर दिया है। ये फैसले पाकिस्तान की नेशनल सिक्योरिटी कमेटी में लिए गए। इसकी अध्यक्षता पीएम शहबाज शरीफ ने की। एक दिन पहले भारत ने भी सिंधु जल समझौता स्थगित करने समेत 5 बड़े फैसले लिए थे।
पाकिस्तान ने कहा कि अगर भारत सिंधु जल समझौते को रोकता है तो इसे एक्ट ऑफ वॉर यानी जंग की तरह माना जाएगा। पाकिस्तान ने SAARC SVE के तहत सभी वीजा निलंबित कर दिए। सिख तीर्थयात्रियों को छोड़कर सभी भारतीय नागरिकों को 48 घंटे के भीतर वापस जाने का आदेश दिया है।
अडानी के पॉवर प्रोजेक्ट पर द गॉर्जियन से लेकर पाकिस्तानी अखबार डॉन (DAWN) ने भी रिपोर्ट प्रकाशित की है। और यह बताया है कि गुजरात के कच्छ में अडानी एक बड़ा पॉवर प्रोजेक्ट लगा रहे हैं, जिसे नियमों को ताक पर रखकर अडानी को दिया गया है। आने वाले समय में अडानी 10,000 मेगावाट बिजली पैदा कर पाकिस्तान को सप्लाई करने वाले हैं।


ऐसे में पहलगाम की 28 शहादतों के बाद देश की जनता को उम्मीद है कि सरकार पाक को कड़ा जवाब देगी। लेकिन यदि जवाब दिया तो अडानी सेठ को सबसे तगड़ा झटका लग सकता है। तो क्या इस स्थिति में भारत की मोदी सरकार पाकिस्तान को नेस्तनाबूद करने का दम दिखाएगी। और क्या सरकार अडानी को घाटा पहुंचाने की जहमत उठाएगी…?
अडानी का पाकिस्तान से क्या व्यापार है?
अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (AGEL) ने गुजरात के कच्छ जिले के खावड़ा क्षेत्र में एक विशाल नवीकरणीय ऊर्जा पार्क की स्थापना की है, जो पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटा हुआ है। यह पार्क 538 वर्ग किलोमीटर में फैला है — पेरिस शहर से करीब पाँच गुना बड़ा। यहाँ सौर और पवन ऊर्जा से ग्रीन एनर्जी तैयार की जा रही है।
इस परियोजना का सामरिक महत्व भी कम नहीं है, क्योंकि यह क्षेत्र भारत की पश्चिमी सीमा पर स्थित है। यह ग्रीन एनर्जी हब भविष्य में भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
कृषि और FMCG सेक्टर में व्यापार
अडानी विल्मर लिमिटेड के तहत अडानी समूह खाद्य तेल, दालें, चावल, आटा और अन्य पैकेज्ड खाद्य उत्पादों का उत्पादन करता है। यह भारत की अग्रणी FMCG कंपनियों में से एक है। रिपोर्टों के अनुसार, अडानी समूह भारत से पाकिस्तान को कुछ उत्पादों का निर्यात भी करता है, जो कृषि या उपभोक्ता वस्तुओं की श्रेणी में आते हैं।
मुंद्रा पोर्ट और पाकिस्तान से व्यापार
गुजरात का मुंद्रा पोर्ट, जिसे अडानी समूह संचालित करता है, पाकिस्तान से व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। हालांकि, 2021 में भारी मात्रा में नशीली दवाओं की बरामदगी के बाद अडानी पोर्ट्स ने पाकिस्तान, अफगानिस्तान और ईरान से कंटेनर कार्गो पर अस्थायी रोक लगा दी थी, जिसे बाद में सुरक्षा समीक्षा के बाद हटा लिया गया।
अडानी के इस पोर्ट को लेकर गुजरात के वरिष्ठ पत्रकार दत्तेश भावसर सवाल करते हैं- “पूरे देश में सभी पोर्ट की सुरक्षा CISF के जिम्मे है पर अदाणी के मुंद्रा पोर्ट पर उसकी खुद निजी सुरक्षा क्यों है जबकि सबसे ज्यादा ड्रग्स वहीं पकड़ा गया था।”
राजनीतिक और सामरिक सवाल
भारत-पाकिस्तान के रिश्तों की संवेदनशीलता को देखते हुए, अडानी समूह की इन गतिविधियों पर राजनीतिक हलकों और मीडिया में चर्चा हो रही है। विपक्षी दलों ने यह मुद्दा उठाया है कि जब सरकार पाकिस्तान के साथ व्यापार को सीमित करने की नीति अपनाए हुए है, तब निजी क्षेत्र में ऐसा संबंध कैसे चलता है।


भड़ास4मीडिया में इसी संदर्भ में 13 फरवरी को प्रकाशित हुआ यह लेख भी पढ़ें….



Sanjay Mittal
April 30, 2025 at 8:49 am
Agar ye kehte ke ki vipaksh ke neta pakistan ka chatan chatna kab band karange to samajh me aata kisi media ki itni aukat nahi ho rahi hai ki vipaksh ke neta se ye pooch sake ki apke neta kya kah rahe hai aur unpar kab action hoga aadhe se jyada media khud bikau hai aur jo vipaksh ke neta ke liye kuch vipreet kah de to usko poora media bikau kehne me jut jata hai