
हेमंत शर्मा-
स्वभाव से अक्खड़. व्यवहार में फक्कड़. विरोधियों के प्रति भुलक्कड़. जीवन शैली में झक्कड. विद्वता के छक्कड. पाकशास्त्र के चक्कड. मेरे मित्र पाणिनि आनंद का आज जन्मदिन है. पाणिनि नाम से ही भाषा, व्याकरण और साहित्य का रस चूता है. इसलिए वे भयानक बतरस, मजेदार, अध्ययनशील और तीव्र मेधा के धनी है. पत्रकारिता पेशा है और बौद्धिक विमर्श शग़ल.
ऐसे बीहड़ व्यक्तित्व वाला शख्स रायबरेली में कैसे पैदा हो सकता है, मेरे सामने हमेशा यह सवाल रहा. उन्हें बनारसी होना चाहिए. शिव और कबीर दोनों के मूल तत्व उनके व्यक्तित्व में धंसे हैं. वे शिव का समाजवाद, कबीर की समरसता और तुलसी का वैदुष्य का फ्यूजन हैं. तभी तो वे बाबा के अनन्य भक्त हैं. किसी भी बहाने बनारस जाने के लिए हमेशा आतुर पाणिनि बनारस पहुंचते ही बाबा के विग्रह पर हाथ फेरने जरूर जाते हैं. उनका घंटा भी हिलाते हैं. संगीत के प्रेमी हैं. रसीले हैं. रंगीले हैं. पूजापाठी हैं. और छानने घोटने के उस्ताद हैं. इस लिहाज से आप बनारसी हैं चाहे जन्म कहीं हुआ हो. क्योंकि आपके व्यक्तित्व में बनारस बोलता है. रस खोलता है.
धन्य है वह तिथि, नक्षत्र, ग्रहचाल और वार जिस वक्त आप इस धरा पर अवतरित हुए. जिस साल आपका जन्म हुआ उसी समय से दुनिया में अजब गजब हुआ. सोवियत संघ में विघटन की शुरुआत हुई. वाम पंथ का बुरा दौर शुरू हुआ. सोवियत संघ में नेतृत्व परिवर्तन हुआ. सोवियत नेता लियोनिद ब्रेझनेव का निधन हुआ, फॉक लैण्ड का युद्ध हुआ. एशियाई खेलों के कारण दिल्ली की दशा दिशा बदली. भारत में रंगीन टेलीविजन आया. तेलगूदेशम पार्टी की स्थापना हुई और भारत की उदार अर्थव्यवस्था के जनक मनमोहन सिंह रिजर्व बैंक के गवर्नर बने. नक्षत्रों का ग़ज़ब संयोग था.
बनारस में पान खाया नहीं जमाया जाता है. पान जमाने और पान मसाला खाने के आप चैम्पियन हैं. जनश्रुति है कि जब बाबा तुलसी दास पैदा हुए तो उनके मुंह में दॉंत थे. आपके बारे में यह किंवदंती है कि जब आप पैदा हुए तो मुंह में पान जमा हुआ था.
यह भी संयोग ही है कि वैलेंटाइन डे से सिर्फ तीन दिन पहले ही आप अवतरित हुए. यानी आपका जन्मदिन वैलेंटाइन समारोहों की पूर्व सूचना है. नक्षत्रों के ग्रह गोचर से आप पर वैलेंटाइन बाबा की छाप भी है.
हमारे ऋतुचक्र में शरद और बसंत यही दो उत्सव-प्रिय ऋतुएं हैं. इस ऋतु में जन्मने वाले जातक की कन्या राशि पर शुक्र की दृष्टि पड़ती है. इसलिए मन वासंतिक रहता है. वैसे भी बसंत में चुहल है, राग है, रंग है, मस्ती है. काम बसंत में ही भस्म हुआ था. तब से वह अनंग तो हुआ, लेकिन बसंत के दौरान ही सबसे ज्यादा सक्रिय रहता है. पहले बसंत पंचमी से ही बसंत के आने की आहट होती थी. अब ‘ग्लोबल वॉर्मिंग’ से वह थोड़ा आगे खिसक गया है. लेकिन बसंत तो बसंत है. पूरा मास रमण, प्रेम, उत्सव, उमंग और ललित क्रीड़ाओं से भरा हुआ. इसीलिए पाणिनि का जन्मदिन बसंत पर्व भी है.
तो आप सब आज के उत्सव में शामिल हो. और उन्हें शुभकामना दें कि उनका बसंत ऐसे ही चर्राया रहे. जय जय



मार्कण्डेय महादेव
February 12, 2026 at 5:51 pm
पाणिनी मिश्रा काशी हिंदू विश्वविद्यालय के छात्र रहे हैं। वहां से पत्रकारिता भी किए हैं। तो बनारसी तो हैं हीं। काशी हिंदू विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संपर्क में आए और आरएसएस के ही विश्व संवाद केंद्र से अपनी पत्रकारिता आरंभ किए। 2001 के महाकुंभ प्रयागराज में आप मेरे साथ ही विश्व हिंदू परिषद के टेंट में रहते हुए पत्रकारिता सीख रहे थे। बाद में आपने समझ लिया कि हिंदू तन मन हिंदू जीवन वाले गाना हिट नहीं हो रहा है और संघी होने से ग्राेथ नहीं है, तो रास्ता बदल लिए और फैज अहमद फैज के गजल गाने लगे। यह बात तुकबंदी में शामिल कर लिजिए हेमंत शर्मा जी।