सुभाष सिंह सुमन-
इस तस्वीर में जो पैराशूट नारियल तेल है, उससे हिंदुस्तान का घर-घर परिचित है. बचपन में हम लोगों ने नारियल तेल का यही एक ब्रांड देखा. अब भले मार्केट में कई ब्रांड आ गए. अभी भी इसका मार्केट बहुत बड़ा है. आज इसकी एक मजेदार कहानी सुनाता हूं.
एक FMCG कंपनी है Marico. यही कंपनी पैराशूट नारियल तेल बेचती है. इस ब्रांड की जो मार्केटिंग है, वो तो है ही. अभी इसने टैक्स डिपार्टमेंट को एक मजेदार केस में हराया है. कहानी बीस साल से चल रही थी. अब जाकर सुप्रीम कोर्ट में चैप्टर क्लोज हुआ है.
टैक्स डिपार्टमेंट ने 20 साल पहले कंपनी को नोटिस भेजा. यह कहते हुए कि कंपनी पैराशूट तेल पर टैक्स की चोरी कर रही है. टैक्स डिपार्टमेंट का कहना था यह नारियल तेल हेयर ऑयल है, तो इसपर ज्यादा टैक्स बनता है.
कंपनी ने जवाब में बताया यह हेयर ऑयल नहीं है, बल्कि एडिबल ऑयल है. खाने वाला तेल.
टैक्स डिपार्टमेंट यह मानने के लिए राजी नहीं हुआ. मुकदमा शुरू हुआ. लड़ते-लड़ते मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया. सुप्रीम कोर्ट ने इसी बुधवार को ऑर्डर दिया और मान लिया कि यह हेयर ऑयल नहीं, एडिबल ऑयल ही है.
अब कंपनी के तर्क सुनिए. हमने पैकेज पर कहीं लिखा नहीं हेयर ऑयल. बहुत सारे गरीब लोग हैं भारत में. बहुत सारे स्टूडेंट भी हैं, जो घर से दूर शहर में कहीं पढ़ाई के चक्कर में अकेले रह रहे हैं. बहुत सारे दिहाड़ी मजदूर हैं. उनके पास एक बार में महीने भर का राशन खरीदने के पैसे नहीं होते. उनके लिए कंपनी छोटे पैकेट में नारियल तेल बेच रही है. अब ये तेल खरीदने वाली पब्लिक इसे बालों में लगा लेती है तो इसमें हमारा क्या कसूर है?
एडिबल ऑयल पर अभी जीएसटी है 5%. हेयर ऑयल सौंदर्य प्रसाधन है, इस कारण उसके ऊपर जीएसटी है 18%. मतलब बिक्री पर सीधे 13% की बचत. टैक्स डिपार्टमेंट के कैलकुलेशन के हिसाब से इस एक फर्क से कंपनी के 120 करोड़ रुपये बचने वाले हैं.
इस कहानी को कॉरपोरेट/टैक्स मुकदमेबाजी में क्लासिक एग्जांपल के रूप में पढ़ाया जाता है. पहले से कई जगह इसे पढ़ाया जाता रहा है. बिजनेस स्कूलों में पढ़ने वालों ने जरूर पढ़ा होगा इसके बारे में.
अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह चैप्टर और क्लासिक हो गया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है 200 एमएल या उससे छोटे पैकेट एडिबल ऑयल माने जाएंगे और उनके ऊपर 5% ही टैक्स लगेगा.


