गोरखपुर एम्स का नटवरलाल कहा जाने वाला कथित पत्रकार परमानंद मौर्या के वसूली रैकेट की कहानी बहुत लंबी है। पत्रकारिता के नाम पर एम्स के पूर्व डायरेक्टर से पाँच लाख की रंगदारी वसूल लेने वाला गिरहकट कोई पुराना घाघ ही हो सकता है।
जानकारी मिली है कि परमानंद महीने का डेढ़ लाख रुपया तो एम्स के अंदर सिर्फ रेस्टोरेंट और मेडिकल स्टोर चलाने वालों से वसूल लेता था और अब इसकी नज़र एम्स के पार्किंग स्टैंड पर लगी हुई थी। अपनी हालिया करतूत से जागरण ग्रुप के अख़बार से निकाले जाने के बाद बेशर्मी की सारी हदें पार कर परमानंद अब भी एम्स के ग्रुप में इस अख़बार की खबरें पोस्ट कर रहा है।
नाम न छापने की शर्त पर इंटर्न डॉक्टरों ने बताया है कि सुबह दस बजे से रात दस बजे तक परमानंद का ठिकाना एम्स में ही रहता था।
मक्कारी और बेहयाई की यूनिवर्सिटी का टॉपर रह चुके परमानंद ने तो अपने गुरु और शरणदाता अजय शंकर तिवारी के पीठ में ही छुरा भोंक दिया था। इस पर तरस खाकर अमर उजाला के उपसंपादक रहे अजय शंकर तिवारी ने इस परमानंद को दैनिक जागरण गोरखपुर में नौकरी पर लगवाया था। जरूरत पड़ने पर इसे लगभग 13 लाख रुपये भी ब्याज पर दिए लेकिन अजय जी कोरोना काल में काल की गाल में समा गए। उनके मरते ही इस मक्कार परमानंद ने उनके सारे रुपये हड़प लिए।
अजय जी की विधवा पत्नी पर भी इस परमानंद को तरस नहीं आया। अजय जी की वाइफ फिलहाल अपने होम टाउन बनारस में रह रही हैं।
परमानंद इसी का लाभ उठाकर अजय जी के रुपये हड़पने के मामले में अदालत की कार्यवाही से बच जा रहा है लेकिन इस मामले को जानने के बाद गोरखपुर के खोजी पत्रकार कहे जाने वाले सत्येंद्र ने अजय जी की विधवा पत्नी के मुकदमे को अंजाम तक पहुंचाने की जिम्मेदारी खुद पर ले ली है और साथ में इस वसूलीबाज परमानंद के गुरु और चेलों की कुंडली पर शोध कसरत करना शुरू कर दिया है।
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