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सुख-दुख

नहीं रहे फोटोग्राफी के गुरु हिमांशु तिवारी जी!

एसके यादव-

सुप्रसिद्ध फोटोग्राफर और इलाहाबाद विश्वविद्यालय में फोटोग्राफी डिपार्टमेंट के लंबे समय तक इंचार्ज रहे मेरे गुरु हिमांशु तिवारी सर का फरीदाबाद में शनिवार को सुबह 7:30 बजे देहांत हो गया। उनकी बड़ी बेटी गुंजन तिवारी के अनुसार फरीदाबाद में ही उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। वह अपने पीछे पत्नी और तीन बेटियों सहित पूरा परिवार और अपने शिष्य छायाकारों कि लंबी फौज छोड़ गए हैं।

ब्लैक एंड व्हाइट फोटोग्राफी के जमाने में ऐसे समय में वह फोटोग्राफी की शिक्षा दे रहे थे जब डाक रूम में फिल्म डेवलप करना उसकी प्रिंटिंग करना सबके बस की बात नहीं थी और कंप्यूटर तथा डिजिटल फोटोग्राफी का नामोनिशान नहीं था। सिल्वर युग की श्वेत श्याम फोटोग्राफी में उनको महारत हासिल थी। 1980 में जब मैंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में फोटोग्राफी डिप्लोमा में एडमिशन लिया तब मुझे इस बात का एहसास नहीं था की तिवारी सर के सान्निध्य में मैं इस विधा में इतना रम जाऊंगा कि फोटोग्राफी ही मेरे जीवन की दिशा तय करेगी। तब फोटोग्राफी आउटिंग का बहुत चलन था, जिसमें उनके साथ कैमरे के पीछे की बारीकियां सीखने का अद्भुत अवसर मिलता था।

हिमांशु तिवारी जी

हिमांशु सर फोटोग्राफी के लिए पूरी तरह समर्पित थे। अपने छात्रों के बीच बेहद लोकप्रिय थे और छात्रों के साथ उनका व्यवहार मित्रवत रहता था। वह बेहद हंसमुख स्वभाव के थे और उनके चुटकुले फोटोग्राफी के राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी प्रसिद्ध थे।

श्री तिवारी ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में फोटोग्राफी के शिष्यों की एक पूरी पीढ़ी तैयार की जो देश भर में विभिन्न संस्थाओं और व्यावसायिक फोटोग्राफी में कार्यरत हैं । वह इंडिया इंटरनेशनल फोटोग्राफिक काउंसिल के अध्यक्ष भी रहे। काउंसिल के संस्थापक सचिव और देश जाने-माने छायाकार पद्मश्री ओपी शर्मा का उन्हें विशेष स्नेह प्राप्त था। उनके नेतृत्व में इलाहाबाद में राष्ट्रीय सेमिनार और कार्यशालाओं का आयोजन हुआ, जिसमें देश भर के दिग्गज फोटोग्राफर जुटते थे। वह छायाकृति और फोटोग्राफिक सोसाइटी ऑफ इलाहाबाद तथा इलाहाबाद विश्वविद्यालय की सेंट्रल कल्चरल कमेटी से भी सक्रिय रूप से जुड़े थे।

एक बार लद्दाख फोटोग्राफी टूर के दौरान पहाड़ पर उन्हें हार्ट अटैक हुआ जिसके बाद वह लंबे समय तक बिस्तर पर रहे और सक्रिय फोटोग्राफी से दूर हो गए, लेकिन जीने की प्रबल इच्छा ने उन्हें लंबे समय तक जीवित रखा। फोटोग्राफिक सोसायटी आफ इलाहाबाद ने उन्हें “लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड” से सम्मानित कर स्वयं को गौरवांवित किया।

उनके निधन से फोटोग्राफी के एक युग का अंत हो गया। उनका जाना मेरे लिए एक व्यक्तिगत क्षति है। देशभर में उनके चाहने वालों में शोक व्याप्त है।

उनके निधन पर वरिष्ठ छाया कर अजामिल जी, वरिष्ठ फोटो पत्रकार विभु गुप्त, रंजन मिश्रा, संजय बनौधा, शिवानी संजय, राजेश कुमार सिंह, राजीव वार्ष्णेय ने अपनी शोक संवेदना व्यक्त की है। गुरु के श्रीचरणों में मेरी अश्रुपूरित श्रद्धांजलि। आप हमारी स्मृतियों में सदैव जीवित रहेंगे।

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