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प्रसार भारती का नया कदम: कंटेंट से कमाई का प्लान, उद्योग जगत से मांगे सुझाव

नई दिल्ली। आकाशवाणी और दूरदर्शन का कंटेंट अब सिर्फ प्रसारण तक सीमित नहीं रहेगा। प्रसार भारती ने फैसला किया है कि अपने पुराने और नए कार्यक्रमों को टीवी, रेडियो, ओटीटी, डिजिटल और विदेशों के प्लेटफॉर्म पर बेचकर या शेयर करके कमाई की जाएगी। इसके लिए संस्थान ने ‘कंटेंट सिंडिकेशन पॉलिसी 2025’ का ड्राफ्ट जारी किया है और मीडिया जगत से सुझाव मांगे हैं।

क्या है योजना?

इस पॉलिसी के तहत यह तय किया जाएगा कि कौन सा कंटेंट किसे दिया जाए, उसका इस्तेमाल कैसे हो, कितने पैसे में मिले और उसमें प्रसार भारती का कितना हिस्सा हो। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि कंटेंट पर विज्ञापन कैसे मिलें, सब्सक्रिप्शन मॉडल कैसे बने और विदेशों में भारतीय कार्यक्रमों की पैकेजिंग कैसे की जाए।

किन-किन बातों पर सुझाव मांगे गए?

  • कंटेंट के इस्तेमाल के बदले पैसे लेने का तरीका—फिक्स फीस, पार्टनरशिप या शेयरिंग।
  • विज्ञापन और सब्सक्रिप्शन से होने वाली कमाई का बंटवारा।
  • देशी-विदेशी प्लेटफॉर्म पर अलग-अलग शर्तें।
  • दर्शकों तक पारदर्शी आंकड़े पहुंचाने की व्यवस्था।
  • तकनीकी मॉडल जैसे OTT पर एड टारगेटिंग, ब्लॉकचेन के जरिए रॉयल्टी ट्रैकिंग आदि।

क्यों है यह अहम?

डीडी और आकाशवाणी के पास दशकों पुराना कंटेंट खजाना है। फिल्मों से लेकर समाचार और मनोरंजन कार्यक्रमों तक। अब प्रसार भारती चाहती है कि इस कंटेंट से आमदनी भी हो और इसकी पहुंच दुनिया भर तक फैले।

संस्थान का कहना है कि यह कदम सिर्फ कमाई के लिए नहीं है, बल्कि जन सेवा प्रसारण (Public Service Broadcasting) की ताकत को और ज्यादा दर्शकों तक पहुंचाने की कोशिश भी है।

कब तक भेज सकते हैं राय?

मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र से जुड़े लोग 21 सितंबर 2025 तक इस ड्राफ्ट पर अपने सुझाव ईमेल के जरिए भेज सकते हैं। इसके बाद अंतिम पॉलिसी तैयार की जाएगी।

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