आम बजट में प्राथमिक शिक्षा क्षेत्र की अनदेखी, सुधार के वायदे भूल गई सरकारः आरटीई फोरम

नई दिल्ली, 12 जुलाई, 2014। राइट टू एजुकेशन (आरटीई) फोरम, जो कि 10,000 से भी अधिक नागरिक समाज समूहों का एक साझा राष्ट्रीय मंच है, ने नये केन्द्रीय बजट 2014-15 के तहत सर्व शिक्षा अभियान (एसएसए) के लिए अपेक्षित एवं पर्याप्त धन राशि के आवंटन में कमी पर गहरी चिंता व्यक्त की है। नये बजट की घोषणाओं में प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा के लिए कुल बजट में लगभग 12.3 फीसदी की मामूली  वृद्धि के बावजूद समग्र बजटीय आवंटन में शिक्षा क्षेत्र की हिस्सेदारी को कम कर दिया गया है जो कि शिक्षा के क्षेत्र में बुनियादी सुधार के लिए मौजूदा सरकार द्वारा निरंतर किये जा रहे तमाम वायदों की असलियत बयान करता है।

आरटीई फोरम के संयोजक श्री अंबरीष राय ने कहा कि हम एक ऐसे बजट की अपेक्षा कर रहे थे जो लंबे समय से आवश्यक संसाधनों की कमी से जूझते प्राथमिक शिक्षा क्षेत्र में जरूरी सुधार के लिए सर्व शिक्षा अभियान के तहत पर्याप्त धन मुहैया कराता ताकि ढांचागत जरूरतों, योग्य शिक्षकों की बहाली एवं शिक्षण सामग्री के समय पर वितरण जैसे जरूरी मुद्दों को हल करने में सहायता मिलती। उन्होंने कहा कि स्कूल बजट के लिए पूर्वनिर्धारित 27, 758 करोड़ रुपये से 28, 635 करोड़ रूपये यानी महज 1000 रूपये की मामूली बढ़ोत्तरी बेहद निराशाजनक है। माध्यमिक शिक्षा के लिए भी कुछ खास नहीं किया गया है और राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (आरएमएसए) के लिए महज 4966 करोड़ का आवंटन किया गया है। उन्होंने कहा कि ‘देश के  प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों की खस्ताहाल स्थिति में सुधार के बिना उच्च शिक्षा के क्षेत्र में विश्वस्तरीय सुधारों की बात करना बेमानी व हास्यास्पद है। दरअसल सरकार को शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के तहत सभी प्रावधानों को पूर्णतया व जमीनी स्तर पर लागू करने में होने वाले खर्च की गणना करनी चाहिए थी और उसके मुताबिक धन का आवंटन करना चाहिए था। प्राथमिक एवं माध्यमिक, दोनों स्तरों पर समाज के गरीब व वंचित तबकों के बच्चों के लिए शिक्षा के क्षेत्र में बराबरी के अवसर प्रदान करने एवं उसके जरिये समाज के हर स्तर पर उनकी बढ़ी हुई सार्थक भागीदारी सुनिश्चित करने का यह एक बेहतर मौका और रास्ता था जो कि किसी भी लोकतांत्रिक सरकार का दायित्व भी है।’
 
शिक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने में गुणवत्तापूर्ण ढंग से प्रशिक्षित शिक्षकों की अनिवार्यता को चिह्नित करने एवं पं. मदन मोहन मालवीय शिक्षक-प्रशिक्षण योजना के तहत 500 करोड़ रूपये आवंटित करने के सरकार के फैसले का फोरम ने स्वागत किया। हालांकि पूरे देश में प्रशिक्षित शिक्षकों की भारी कमी एवं सुव्यवस्थित तरीके से संचालित प्रशिक्षण संस्थानों की कमी को देखते हुए यह राशि नाकाफी है। आरटीई फोरम ने कहा कि स्कूलों में साफ-सफाई को बढ़ावा देने और शौचालय एवं स्वच्छ पेय जल आदि की सुविधाएं मुहैया कराने (खास कर इन बुनियादी सुविधाओं के अभाव में स्कूली एवं इस तरह से पूरी शिक्षा व्यवस्था के दायरे से ही लड़कियों को बाहर हो जाने पर रोक लगाने के संदर्भ में) पर बजट में दिया गया जोर तो ठीक है, लेकिन आरटीई के सभी प्रावधानों को समग्रता में लागू करने और समान एवं समावेशी शिक्षा व्यवस्था के अनुरूप देश केे सभी स्कूलों को ज्ञान के गुणवत्तापूर्ण केंदों के रूप में विकसित करने के लिए शिक्षा के अधिकार को खंडित दृष्टि से देखने की बजाय एक समग्र व प्रतिबद्ध दृष्टि एवं राजनीतिक इच्छाशक्ति की जरूरत है।(प्रेस विज्ञप्ति)

मित्ररंजन
मीडिया समन्वयक
आरटीई फोरम, मोः 9650436951

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