चंडीगढ़ प्रेस क्लब ने भठिंडा और लुधियाना के पत्रकारों व यूट्यूबरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने की कड़ी निंदा की है। प्रेस क्लब का कहना है कि पंजाब पुलिस और भगवंत सिंह मान सरकार की यह कार्रवाई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है।
यह एफआईआर मुख्यमंत्री के सरकारी हेलीकॉप्टर के कथित दुरुपयोग से जुड़ी खबरों और कंटेंट को लेकर दर्ज की गई है। प्रेस क्लब ने अपने बयान में कहा है कि इस तरह की कार्रवाई सरकार के आलोचनात्मक और खोजी पत्रकारिता के प्रति असहिष्णु रवैये को उजागर करती है। पत्रकारों और कंटेंट क्रिएटर्स के खिलाफ आपराधिक मुकदमे दर्ज करना उन्हें डराने और दबाव में लेने का प्रयास प्रतीत होता है।
प्रेस क्लब ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार को खबरों के तथ्यों या उनके प्रस्तुतिकरण पर आपत्ति थी तो उसके लिए खंडन जारी करना, स्पष्टीकरण देना या अपना पक्ष सामने रखने जैसे लोकतांत्रिक और कानूनी विकल्प मौजूद थे। एफआईआर जैसी आपराधिक कार्रवाई से पत्रकारों के बीच भय का माहौल बनता है और यह स्वतंत्र आवाज़ों को दबाने तथा खोजी पत्रकारिता को हतोत्साहित करने की कोशिश लगती है।
चंडीगढ़ प्रेस क्लब ने पंजाब सरकार से सभी एफआईआर तत्काल वापस लेने की मांग की है।
गौरतलब है कि भठिंडा से पत्रकार मनिंदरजीत सिद्धू, मिंटू गुरसरिया, मंदीप सिंह और सूचना अधिकार कार्यकर्ता माणिक गोयल के नाम एफआईआर में शामिल हैं, जबकि लुधियाना से छह यूट्यूबरों के खिलाफ भी मामले दर्ज किए गए हैं।
होशियारपुर। पंजाब पुलिस और भगवंत मान सरकार द्वारा पत्रकारों व सामाजिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज की जा रही एफआईआर के विरोध में होशियारपुर प्रेस क्लब ने कड़ा रुख अपनाया है। प्रेस क्लब ने इस कार्रवाई को दबाव और जबरदस्ती की नीति बताते हुए इसे सरकार की आलोचना करने वाली आवाज़ों को निशाना बनाने की कोशिश करार दिया है।

इस मुद्दे को लेकर प्रेस क्लब होशियारपुर की ओर से ज़िलाधिकारी आशिका जैन को एक मांग-पत्र सौंपा गया। इस दौरान प्रेस क्लब के अध्यक्ष बलजिंदर पाल ने कहा कि यह पूरी कार्रवाई आज़ाद मीडिया की आवाज़ को दबाने और आम आदमी पार्टी सरकार की नाकामियों को छिपाने का एक सुनियोजित प्रयास है। उन्होंने कहा कि पत्रकारों और यूट्यूबर्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज करना प्रेस की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है।
प्रेस क्लब ने विशेष तौर पर भठिंडा के पत्रकारों और लुधियाना के यूट्यूबर्स के खिलाफ मुख्यमंत्री के सरकारी हेलीकॉप्टर के कथित दुरुपयोग से जुड़ी रिपोर्टिंग को आधार बनाकर की गई एफआईआर की निंदा की। वक्ताओं ने कहा कि जनहित के मुद्दों पर रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स को अपराधी ठहराना लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है।
प्रेस क्लब ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार को किसी खबर के तथ्यों या उसके प्रस्तुतिकरण पर आपत्ति थी तो उसके लिए स्पष्टीकरण, खंडन या अपना पक्ष रखने जैसे लोकतांत्रिक विकल्प मौजूद हैं। एफआईआर दर्ज करना इसका समाधान नहीं है। क्लब ने दो टूक कहा कि वह प्रेस की आज़ादी और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए मजबूती से खड़ा रहेगा और किसी भी तरह की दमनकारी कार्रवाई का विरोध करता रहेगा।



