महिला बैंककर्मी से ठगी करने वाला फर्जी पत्रकार अरेस्‍ट

बिहार के पूर्णिया जिला में महिला बैंक अधिकारी से एक लाख 78 हजार की ठगी करने वाले एक फर्जी पत्रकार को पुलिस ने रविवार को दबोच लिया। फर्जी रिपोर्टर दीपांकर वर्मा को पुलिस ने पूर्णिया के एक होटल से गिरफ्तार किया। ठग की गिरफ्तारी में धमदाहा डीएसपी दिलनवाज अहमद ने अहम भूमिका निभाई। दीपांकर ने खुद को किशनगंज जिले के ठाकुरगंज निवासी बताया है। पूछताछ के बाद फर्जी पत्रकार को जेल भेज दिया गया।

जानकारी के अनुसार सेंट्रल बैंक की पूर्णिया शाखा में सहायक प्रबंधक के पद पर कार्यरत रागिनी कुमारी की पहचान फेसबुक के जरिये आज तक के कथित पत्रकार दीपांकर वर्मा से हुई। दीपांकर ने उन्‍हें बताया कि वह चैनल में ऊंचे ओहदे पर कार्यरत है। उसने अपना पता दिल्ली स्थित मयूरगंज बताया। फेसबुक के जरिए ही धीरे-धीरे उनमें निकटता बढ़ी। एक दिन रागिनी ने उससे अपने बहनोई के बारे में जानकारी दी जो भुवनेश्वर में सरकारी कर्मी हैं तथा साजिश के तहत किसी केस में फंसा दिए गए हैं। तब दीपांकर ने बताया कि कुछ पैसे खर्च होंगे, वह उन्हें केस से बरी करा देगा।

बस, यही से शुरू हो गया दीपांकर के ठगी का सिलसिला। धीरे-धीरे उसने उन‍के बहनाई को छुड़ाने के नाम पर रागिनी से एक लाख 78 हजार रुपये ऐंठ लिए। लेकिन केस में कोई प्रगति नहीं हुई। तब बैंक अधिकारी को फर्जीवाड़े का एहसास हुआ। इसके बाद उसने पैसे देना बंद कर दिया तो वह उल्टे उसके जीजा को बदनाम करने की धमकी देने लगा। इसके बाद कथित पत्रकार ने उसे शादी का प्रलोभन भी दिया साथ ही बर्बाद करने की धमकी भी देने लगा। इस बीच एक बार जब वह बैंक कार्य से पटना गई तो वहां उसने आजतक चैनल के ऑफिस जाकर दीपांकर के बारे में जानकारी मांगी। तब उसके पैर तले की जमीन खिसक गई। दरअसल वहां उसे पता चला कि चैनल में दीपांकर नाम का कोई पत्रकार नहीं है।

इसके बाद उन्‍होंने धमदाहा पुलिस को सारी जानकारी दी। पुलिस ने रागिनी को लगातार दीपांकर के साथ बातचीत करते रहने की सलाह दी। डीएसपी के कहने पर ही उसने शादी की बात करने के लिए दीपांकर को पूर्णिया के एक होटल में बुलाया। वहां डीएसपी अहमद पहले से ही सादे ड्रेस में तैनात थे। पुलिस ने नाटकीय अंदाज में दीपांकर को गिरफ्तार कर लिया। फिर उसे एसपी अजीत सत्यार्थी के पास लाया गया जहां पूछताछ के बाद उसे जेल भेज दिया गया है। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि महिला बैंक अधिकारी से कथित पत्रकार द्वारा जनवरी माह से ही आर्थिक शोषण किया जा रहा था। काम कराने के नाम पर जब मोटी रकम की मांग की गई तब कथित पत्रकार के बारे में पता लगाया जाने लगा और पुलिस के गिरफ्त में फंस गया।

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