मनोहर कहानियाँ के संपादक पुष्कर पुष्प का कोरोना से स्वर्गवास

यशवंत अग्रवाल-

देश की मशहूर पत्रिका मनोहर कहानियां के संपादक पुष्कर पुष्प अब इस दुनिया में नहीं रहे। कोरोना ने उन्हें छीन लिया। उन्होंने 28 अप्रैल की शाम अंतिम सांस ली।

दिल्ली में सरिता विहार स्थित आवास से बत्रा हास्पिटल पहुंचने पर डाक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए। दो-ढाई दशक पहले तक यूपी के प्रतिष्ठित प्रकाशन समूह मित्र प्रकाशन इलाहबाद की मशहूर पत्रिकाएं माया, मनोहर कहानियां, सत्यकथा, मनोरमा, प्राब आदि मैगजीन लाखों की संख्या में छपती थी।

एक जमाने में मनोहर कहानियां देश में सबसे ज्यादा बिकने वाली पत्रिका थी। मुरादाबाद के रहने वाले पुष्कर जी ने सन् 1980-85 के बीच दिल्ली से मनोहर कहानियां में अपने लेखन का सफर शुरू किया और संपादक बने। उन्होंने अपराध कथाओं की नई शैली इजाद की। फिक्शन लिखने में वे अद्भुत प्रतिभा के धनी थे। उनकी लिखी कई कहानियां बेहद चर्चित रही। कई कहानियों पर फिल्में भी बनीं।

अब मनोहर कहानियां व सत्यकथा पत्रिका दिल्ली प्रेस की हैं। दिल्ली प्रेस ने कई साल पहले इन पत्रिकाओं को टेकओवर कर लिया था। पुष्करजी अब भी मनोहर कहानियां के संपादक थे।

मित्र प्रकाशन में रहते हुए पुष्कर जी ने देश के अनेक नामी संपादकों व पत्रकारों के साथ काम किया। बीच में उन्होंने मनोनीत कहानियां नाम से अपनी खुद की पत्रिका भी निकाली थी। उन्होंने फिल्म लेखन में भी हाथ आज़माए। कई नामी फिल्म निर्माता उनके अच्छे दोस्त हैं। परिवार में पत्नी व एक बेटा है। फिलहाल दोनों कोरोना के कारण अस्पताल में भर्ती हैं। ईश्वर से उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना है।

-यशवंत अग्रवाल
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