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दिल्ली

राघव चड्ढा बीजेपी ज्वाइन करने वाले हैं?

प्रमोद जोशी-

आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को पत्र लिखकर मांग की है कि राघव चड्ढा को उच्च सदन में पार्टी के उपनेता पद से हटा दिया जाए और उन्हें AAP के कोटे से बोलने का समय आवंटित न किया जाए। AAP ने सचिवालय से यह भी अनुरोध किया है कि अशोक मित्तल को उच्च सदन में AAP का उपनेता नियुक्त किया जाए।

पिछले हफ्ते आम आदमी पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनावों के लिए अपने स्टार प्रचारकों की सूची से चड्ढा का नाम हटा दिया था।


पुष्प रंजन-

राघव चड्ढा के मिसाइलनुमा सवालों से तो ‘मोदी मंडपम’ का गंडप्पम हो रहा था, केजरी को क्या हुआ, जो राज्यसभा में पार्टी के उप-नेता पद से हटाया?

आम आदमी पार्टी (AAP) ने गुरुवार को राज्यसभा सचिवालय को पत्र लिखकर राज्यसभा में पार्टी के उप-नेता पद से सांसद राघव चड्ढा को हटाने की मांग की, और उनकी जगह सांसद अशोक मित्तल को नियुक्त करने की सिफारिश की।

गोदिये बताते है, “यह घटनाक्रम AAP नेतृत्व और चड्ढा के बीच बढ़ती दूरी के बीच सामने आया है; चड्ढा पर हाल के महीनों में पार्टी के अहम कार्यक्रमों और बैठकों से नदारद रहने के आरोप लगे हैं।”

हालांकि AAP सूत्रों ने कहा कि इस फैसले के पीछे कोई “खास वजह” नहीं थी और न ही चड्ढा को किसी “पार्टी-विरोधी गतिविधि” का दोषी पाया गया था, लेकिन उन्होंने इस बात की पुष्टि की है, कि पार्टी इस कदम को उठाने के लिए सही समय का इंतज़ार कर रही थी। लेकिन, सच यह है कि मारक सवालों से राघव चड्ढा Gen Z वालों के बीच हीरो बनते जा रहे थे, और केजरी पर दबाव था, कि रिप्लेस करो इसे.


राजेश साहू-

आम आदमी पार्टी (AAP) ने गुरुवार को सांसद राघव चड्ढा को राज्यसभा के उपनेता पद से हटा दिया है। उनकी जगह यह पोस्ट राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल दे दी है। पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को पत्र लिखकर यह जानकारी दी।

लेटर में कहा कि सदन में पार्टी की तरफ से बोलने का समय न दिया जाए। राघव 2022 से पंजाब से राज्यसभा सांसद हैं। उनका कार्यकाल 2028 तक है।

पार्टी ने इस फैसले की वजह नहीं बताई है। हालांकि, उन्होंने लंबे समय से पार्टी से दूरी बना ली थी और AAP को लेकर कोई बयान नहीं दे रहे हैं।

27 फरवरी को जब एक निचली अदालत से अरविंद केजरीवाल को दिल्ली शराब नीति मामले में राहत मिली, तब भी उन्होंने कोई बयान नहीं दिया था। राज्यसभा में वे लोगों से जुड़े गिग वर्कर्स और स्कूल फीस जैसे मुद्दे उठा रहे थे।


राघव चड्ढा जो लोक लुभावन बातें सदन में कर रहे थे, उसे न्यू पोजिशनिंग कहा जाता है। सच यह है कि परोक्ष रूप से वह सत्ता पक्ष के हिस्सा बन चुके हैं और विपक्ष के सभी सामूहिक प्रयासों से दूर रह रहे थे। आज आम आदमी पार्टी ने जो निर्णय लिया, वह देर सबेर होना ही था जैसे देर सबेर उन्हें सत्ता पक्ष का सीधे हिस्सा बनना ही है।

-अशोक कुमार पांडेय


कुछ दिनों पहले मैंने वीडियो बनाई थी और कहा था कि राघव चड्ढा आरएसएस का आदमी है और जल्दी BJP जॉइन करेगा तो आम आदमी पार्टी के समर्थकों ने मुझे खूब गाली दी थी। अब खबर आ रही है कि आप ने राघव चड्ढा को राज्यसभा उपनेता पद से हटा दिया है और राज्यसभा सचिवालय को चिट्ठी लिखी है कि उसको संसद में बोलने न दिया जाए। खबर यहां तक है कि पार्टी चाहती थी कि राघव LPG क्राइसिस और भारत की विदेश नीति पर बोले,पर राघव ने इसको मना कर दिया। इसके बाद आप पार्टी ने ये कदम उठाया। राघव चड्ढा विशुद्ध तरीके से केवल अपना PR करता है और एक नंबर का सेल्फ सेंटर्ड नेता है।

-आलोक त्रिपाठी


देवेंद्र सुरजन-

सत्र समाप्ति के ठीक पूर्व आम आदमी पार्टी ने पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट अपने सांसद राघव चड्ढा को सदन में पार्टी उपनेता पद से हटा दिया गया है. उन्हें बोलने नहीं देने का आग्रह भी राज्यसभा अध्यक्ष से भी किया गया है. लगता यही है केजरीवाल और राघव चड्ढा से खटक गई है.

पिछले पंजाब चुनाव में राघव चड्ढा का आम आदमी पार्टी के चुनावी मैनेजमैंट में बोलबाला था. टिकिट वितरण से लेकर हर फैसले में उनका बड़ा दख़ल हुआ करता था.

बला के खूबसूरत, हैंडसम और सुसंस्कृत राघव चड्ढा में सुनीता केजरीवाल अपना दामाद तक ढूंढने लगीं थी, लेकिन सबकी उम्मीदों पर क्रमशः तुषारापात होते चला गया.

राज्यसभा में भी राघव चड्ढा का प्रदर्शन काफ़ी प्रभावी रहा है, पर परिणीति चौपड़ा से परिणय के बाद बन्दा अपने में ही खो गया. आंख के इलाज के नाम पर लंदन में लंबा हनीमून मनाता रहा, और इधर जेल में बंद केजरीवाल की आंखे उसके एक स्टेटमेंट तक के लिए तरस गईं.

सो, बुराई तो होना ही थी, ऊपर से यह कि राज्यसभा में वे जो भी मांगे रखते, मोदी जी उनकी पूरा करते जाते.

शक और गहरा गया जब गिग वर्कर्स को राहत दिलाने उनकी मांग मान ली गई, एयरपोर्ट्स पर चाय समोसे भी उनकी मांग पर सस्ते कर दिए गए. स्वास्थ्य बीमा पर लगने वाला जीएसटी हटा दिया गया, आईटी रिटर्न फॉर्म को आसान कर दिया गया, वगैरह वगैरह.

ऐसे में स्वाभाविक है कि लगे, मोदी जी उन पर डोरे डाल रहे हैं और केजरीवाल को लगे कि ढील कुछ ज्यादा ही दे दी.

मोदी और केजरीवाल की रस्सा-कसी में राघव का गला घुटना निश्चित है. उनकी राज्यसभा की अवधि भी पूरी होने को होगी ? इसलिए हरेक को तेवर बदलने ही पड़ेंगे.

राज्य सभा में आम आदमी पार्टी के संजय सिंह को छोड़कर बाक़ी सब सांसद निठल्ले हैं. पर जिन्हें बोलने का भी समय नहीं मिलने वाला है उनमें स्वाति मालीवाल के बाद राघव चड्ढा ही होंगे.

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