गोलमोल शीर्षक से घेरने की कोशिश कामयाब हो या नहीं, जो कहा गया उसे जस का तस पेश कर देने से बाकी लोगों का प्रयास भी बेकार जायेगा। टेलीविजन पर यह प्रयास आज भी चलता लग रहा है।
संजय कुमार सिंह
आज के अखबारों में संसद की कल की कार्यवाही की रिपोर्ट होनी थी, वही है। लोकसभा चुनाव के बाद नई लोकसभा का अध्यक्ष ओम बिरला को ही बनाये जाने और 49 साल बाद उनके इमरजेंसी को याद करने तथा राष्ट्रपति के अभिभाषण में भी इमरजेंसी का जिक्र होने से जवाब तो मिलना ही था। राहुल गांधी पहली बार विपक्ष के नेता बने हैं तो कांग्रेस के तेवर कड़े होने ही थे। ऐसे में राहुल गांधी ने न सिर्फ ओम बिरला से कहा कि अध्यक्ष चुने जाने के बाद जब मैंने आपसे हाथ मिलाया तो आप सीधे खड़े थे लेकिन प्रधानमंत्री से हाथ मिलाते हुए आप झुके हुए थे। नवोदय टाइम्स में आज यह खबर पहले पन्ने पर है। शीर्षक है, स्पीकर ओम बिरला से बोले राहुल आपने मोदी से झुककर हाथ मिलाया मुझसे नहीं।
अमर उजाला में भी यह खबर पहले पन्ने पर है। यहां अंदाज थोड़ा अलग है। राहुल गांधी के भाषण और उसपर सत्तारूढ़ दल के एतराज की पूरी लीड खबर के साथ कुछ छोटी खबरों में एक यह भी है। शीर्षक है, “स्पीकर से भी विवाद : कहा-मोदी के सामने झुक गये, बिरला का जवाब, ये मेरे संस्कार”। यहां यह बताने की जरूरत है कि राहुल गांधी यह कहना और बताना चाह रहे थे कि लोकसभा में अध्यक्ष चुने जाने के बाद वे ही लोकसभा में सर्वोच्च पद पर आसीन है और उन्हें किसी के आगे झुकने की जरूरत नहीं है। प्रधानमंत्री के आगे भी नहीं। इसपर ओम बिरला ने अपना पक्ष रखा और राहुल गांधी ने कहा कि वे उनकी बात का सम्मान करते हैं। इसके बाद भी उन्होंने कहा, लेकिन इस सदन में आपसे बड़ा कोई नहीं है। यहां आपकी बात आखिरी बात होती है।

समझना मुश्किल नहीं है कि राहुल गांधी क्या कहना चाहते थे। सीधा प्रसारण देख रहे लोगों को समझ में भी आया। लेकिन खबर के अनुसार, इसपर सत्तापक्ष के सदस्यों ने कहा कि यह आसन का अपमान है। कहने की जरूरत नहीं है कि ऐसा कुछ नहीं था फिर भी खबर तो है ही। एक प्रस्तुति नवोदय टाइम्स की दूसरी अमर उजाला की। दिलचस्प यह है कि इसके बाद सोशल मीडिया पर तरह-तरह के ट्रोल सक्रिय हो गये। यह दिखाया जाने लगाया कि मनमोहन सिंह जब प्रधानमंत्री थे और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे प्रधानमंत्री का झुककर सम्मान करते हैं। ओम बिरला ने अपने बारे में जो कहा उसका मतलब यही है कि मामला निजी संबंधों का भी है। और राहुल गांधी ने लोकसभा अध्यक्ष और सदस्य की बात की थी।
सोनिया गांधी के मामले में ऐसा नहीं था। हालांकि, पुराने वीडियो भी तुरंत शेयर किये जाने लगे। इनमें ओम बिरला से प्रधानमंत्री और राहुल गांधी के हाथ मिलाने का वीडियो भी है और दिख रहा है कि ओम बिरला नरेन्द्र मोदी से हाथ मिलाते हुए झुके थे तथा राहुल गांधी ने कुछ गलत नहीं कहा था। फिर भी नवोदय टाइम्स में फोटो छपी है जिसमें ओम बिरला और प्रधानमंत्री एक दूसरे के सामने सीधे एक दूसरे को हाथ जोड़े खड़े हैं। राहुल गांधी पीछे खड़े हैं। यह मीडिया का अपना तरीका है। जो कहा गया उसका समर्थन करना हो तो वैसी ही फोटो लगा दो वरना उससे अलग। पर अभी वह मुद्दा नहीं है। संसद में कल जो कुछ हुआ उसमें सबसे महत्वपूर्ण यह है कि हिन्दुत्व को लेकर हंगामा रहा।
इस दौरान राहुल गांधी ने एक बार अपने साथ बैठे लोगों की ओर ओर इशारा करते हुए यह भी कहा कि यहां बैठे हुए लोग भी हिन्दू हैं। एक बार उन्होंने यह भी कहा कि नरेन्द्र मोदी या भारतीय जनता पार्टी या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सभी हिन्दुओं का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं। इसमें किसी को शक होना भी नहीं चाहिये। पर आज के अखबारों में यह मुद्दा है। कुछेक की प्रस्तुति अच्छी है, कुछेक की बहुत फूहड़। इसमें यह साबित हो जाता है चालाक दुश्मन मूर्ख मित्र से बेहतर होते हैं। ऐसे में इंडियन एक्सप्रेस का मुख्य शीर्षक गोल मोल है तो बाकी से उसने बताया है कि प्रधानमंत्री आज लोकसभा में धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देंगे। राहल गांधी ने विपक्ष के नेता के रूप में शुरुआत की और प्रधानमंत्री ने उन्हें रोका (और कहा) : हिन्दू समाज को हिंसक कहना एक गंभीर मुद्दा है; अमितशाह ने माफी मांगने के लिए कहा।
मुद्दा यह है कि राहुल गांधी ने ऐसा कुछ नहीं कहा है कि जो पूरे हिन्दू समाज के लिए है। उन्होंने जो कहा है वह हिन्दुओं के उस वर्ग या हिस्से के लिए है जो हिन्सा करते हैं। अमर उजाला ने दोनों लोगों की बातों को जस का जस छापा है। साढे छह कॉलम की लीड का शीर्षक दो लाइनों में है। पहली लाइन है, “खुद को हिन्दू कहने वाले हर समय हिंसा करते हैं : राहुल” दूसरी लाइन है, “पूरे हिन्दू समाज को हिंसक कहना गंभीर मामला है : मोदी”। कहने की जरूरत नहीं है कि इसमें राहुल गांधी ने कुछ गलत नहीं कहा है और वे सभी हिन्दुओं की बात नहीं कर रहे हैं और उनके कहने का मतलब है कि खुद को हिन्दू कहने वाले हिंसा करते हैं। इसका मतलब भी यह नहीं हो सकता है कि खुद को हिन्दू कहने वाले सभी लोग हिंसा करते हैं। पूरे हिन्दू समाज की तो बात ही नहीं है। वरिष्ठ मंत्रियों ने उनके दावे को ठहराया गलत, माफी की मांग”।
जो हुआ या कहा गया उसका सीधा प्रसारण हो रहा था और भले लिखने वालों ने देखकर लिखा हो लेकिन टेलीविजन पर बेहतर दिखता है, इसमें कोई शंका नहीं है। वैसे भी, हिन्दुस्तान टाइम्स का शीर्षक है, “विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सरकार पर हमला बोला तो सदन में शक्ति परीक्षा”। टाइम्स ऑफ इंडिया की लीड का शीर्षक है, “राहुल की हिन्दू टिप्पणी ने संसद में प्रधानमंत्री के साथ जोरदार टकराव की शुरुआत की”।
सदन की यह शक्ति परीक्षा सोशल मीडिया पर भी है और भाजपा या सरकार की तरफ से मीडिया संस्थानों का जोर लगाना भी दिख रहा है। सबके बावजूद द हिन्दू ने इसे पहले पन्ने पर नहीं छापा है। पहले पन्ने पर खबर अंदर होने की सूचना भर है। इसका शीर्षक है, राहुल ने भाजपा पर हिंसा फैलाने का आरोप लगाया। द टेलीग्राफ की लीड का मुख्य शीर्षक है, “हिन्दू समाज आरएसएस /भाजपा की ठेकेदारी नहीं है”। फ्लैग शीर्षक है, हमलावर राहुल ने चकित ट्रेजरी बेंच का मजाक उड़ाया, खरी खोटी सुनाई। कल की खबरों में राहुल गांधी तो थे ही लेकिन हिन्दुत्व पर उनकी टिप्पणी और भाजपा का उनपर जवाबी हमला ही मुद्दा नहीं था। और भी मुद्दे थे जिन्हें अखबारों में प्रमुखता तो नहीं ही मिली है भाजपा का सूचना तंत्र भी उसकी चर्चा नहीं करेगा।
आज द टेलीग्राफ में लीड के साथ सिंगल कॉलम की एक खबर है, “डरिये मत, सुनकर जाइयेगा, महुआ मोइत्रा ने मोदी से कहा”। द टेलीग्राफ की सेकेंड लीड नए अपराध कानून से संबंधित है। खबर के अनुसार अमित शाह ने कहा है कि नए आपराधिक कानून को लेकर राजनीति न की जाये। अखबार ने इसके साथ एक बॉक्स में लॉ वर्जेस फ्लॉ के तहत कई बुलेट प्वाइंट छापे हैं। द हिन्दू में आज यह खबर लीड है। अमित शाह के बयान के अनुसार, नये अपराध कानून न्याय को प्राथमिकता देंगे। नवोदय टाइम्स में आज की लीड का शीर्षक है, हिन्दुत्व पर हंगामा। इसके साथ दो खबरें दो दो कॉलम में हैं। दोनों के दो शीर्षक हैं। एक शीर्षक है, “अपने को हिन्दू कहने वाले करते हैं 24 घंटे हिंसा : एलओपी राहुल”। दूसरी खबर का शीर्षक है, “पूरे हिन्दू समाज को हिंसक कहना हिन्दुत्व का अपमान : पीएम मोदी’। इसके साथ वे 10 मुद्दे भी हैं जो राहुल गांधी ने उठाये हैं।


