लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार के एमएसएमई विभाग के अंतर्गत संचालित विश्वकर्मा सर्व सम्मान योजना को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। यह योजना कैबिनेट मंत्री राकेश सचान के विभाग से जुड़ी है, जिसके तहत युवाओं को 10 दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण दिया जाना निर्धारित है।
योजना के अनुसार, प्रत्येक जिले में 25 युवाओं का एक बैच बनाया जाता है, जिस पर ₹2.50 लाख की राशि आवंटित की जाती है। इस राशि में से ₹1.55 लाख भोजन और ठहराव की व्यवस्था के लिए निर्धारित है। शासन स्तर पर प्रति युवा ₹10,000 खर्च किए जाने का प्रावधान है। प्रदेश के 75 जिलों में कुल 75 हजार लाभार्थियों का लक्ष्य तय किया गया था। वर्ष 2024 में इस योजना के तहत लगभग 3,000 बैच बनाए जाने का दावा किया गया है।
हालांकि, प्रखर पोस्ट की एक पड़ताल में आरोप लगाया गया है कि योजना के तहत आवंटित राशि का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया गया। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भोजन और ठहराव के लिए आवंटित ₹1.55 लाख की राशि पहले कोऑर्डिनेटर के खाते में जाती है, लेकिन अगले ही दिन उसमें से ₹1.50 लाख वापस ले लिए जाते हैं। आरोप है कि इस राशि का कथित रूप से बंटवारा एमएसएमई विभाग के तत्कालीन निदेशक पवन अग्रवाल और मंत्री राकेश सचान के बीच किया जाता है।
रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुल राशि का लगभग 40 प्रतिशत कमीशन मंत्री स्तर तक जाता है और इस तरह करोड़ों रुपये के घोटाले को अंजाम दिया गया है। पत्रकार अनूप गुप्ता का दावा है कि इस कथित घोटाले की खबर प्रकाशित होने के बाद मंत्री राकेश सचान और पवन अग्रवाल की ओर से उनके खिलाफ कार्रवाई की गई।
अनूप गुप्ता के अनुसार, उनके खिलाफ 5 नवंबर 2025 को गोमतीनगर स्थित विभूति खंड थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई, जबकि 9 नवंबर 2025 को ₹5 करोड़ का मानहानि नोटिस भेजा गया। उनका आरोप है कि बार-बार मांग के बावजूद उन्हें एफआईआर की कॉपी उपलब्ध नहीं कराई गई और न ही मुकदमे का विवरण ऑनलाइन पोर्टल पर डाला गया। इसके अलावा, विवेचक से संपर्क के प्रयासों के बावजूद उनका बयान दर्ज नहीं किया गया।
पत्रकार अनूप गुप्ता ने आरोप लगाया है कि यह कार्रवाई खोजी पत्रकारिता को दबाने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि वे पिछले 25 वर्षों से खोजी पत्रकारिता कर रहे हैं और इस तरह की कानूनी कार्रवाइयों से डरने वाले नहीं हैं।
फिलहाल, मामले में मंत्री राकेश सचान, पूर्व निदेशक पवन अग्रवाल या शासन की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
(यह रिपोर्ट आरोपों पर आधारित है। संबंधित पक्षों का पक्ष सामने आने पर समाचार को अपडेट किया जाएगा।)
“मैं अभी तमाम व्यवधानों में फंसा हुआ हूं। लड़ रहा हूं। खबर, जो खुलासा किया, जो भी न्यूज प्रकाशित की, वह तथ्यों के आधार पर थी। मैं कल पर्सों में इस मामले के विरूद्ध अदालत का रुख करूंगा।” – भड़ास से हुई बातचीत में वरिष्ठ पत्रकार अनूप जी ने कहा….

वरिष्ठ पत्रकार अनूप गुप्ता की मूल पोस्ट-
उत्तर प्रदेश सरकार में कबीना मंत्री राकेश सचान क़ा एम एस एम ई विभाग के अधीन विषकर्मा सर्व सम्मान योजना के तहत युवाओ को दस दिन की ट्रेनिंग दिया जाना निर्धारित था जिसमे 2 लाख 50 हजार रुपये जिसमे 25 युवाओ क़ा का एक बैच बनाया गया आवंटित किया गया. 2 लाख 50 हजार धनराशि में से 1 लाख 55 हजार रुपये ट्रेनिंग के दौरान युवाओ को खाना और ठहरने के लिए आवंटित किया गया. हर जिले में करीब 1000 के हिसाब से 75 जिलों में 75 हजार लाभार्थियों का लक्ष्य रखा गया है। दस दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण के लिए 10 हजार प्रति युवा की राशि शासन द्वारा दी जाती है। जिलों में 25 लाभार्थियों का एक बैच बनाया जाता है। इस तरह प्रदेश में 2024 में कुल 3000 बैच बनाए गए थे। प्रति 25 बच्चों के बैच पर ढाई लाख रुपए की राशि आवंटित की जाती है, लेकिन जब प्रखर पोस्ट की पड़ताल बहुत गहनता के साथ अंदर जाने लगी तो पूरी दाल ही काली नजर आई। दाल की जगह पानी ही पानी नजर आया।
ढाई लाख रुपए में से एक लाख 55 हजार रुपए भोजन, बच्चों को रहने की मद में आवंटित किए जाते हैं। पड़ताल में पता चला कि एक लाख 55 हजार कोऑर्डिनेटर के अकाउंट में जाता है और दूसरे दिन ही एक लाख 50 हजार कोऑडिनेटर से वापस ले लिए जाते हैं। इस पैसे का उद्यमिता का पूर्व निदेशक पवन अग्रवाल और राकेश सचान बंदरबांट कर लेते हैं। 40 परसेंट का सीधा-सीधा कमीशन राकेश सचान के मद में जाता है। इस तरह 45 करोड़ का डाका डाल रहा है। ज़ब प्रखर पोस्ट ने मंत्री राकेश सचान और उद्दमिता क़ा पूर्व निदेशक पवन अग्रवाल के खिलाफ करोड़ों रूपए क़ा घोटाले क़ा खुलासा किया तों मंत्री राकेश सचान और पवन अग्रवाल बोखला गए और मेरे खिलाफ विभूती खंड गोमती नगर लखनऊ में 5/11/2025 को फर्जी एफ आई आर दर्ज करबाई गई और 9/11/2025 को 5 करोड़ क़ा मानिहानि का नोटिस भेजा गया. मेरे द्वारा बार बार एफ आई आर की कॉपी मांगी गई लेकिन मुझे एफ आई आर कॉपी उपलब्ध नहीं कराई गई और ना ही 5/11/ 2025 क़ा लिखा मुकद्दमे को ऑन लाइन ऐप पर डाला गया और ना ही विबेचक को बार बार ब्यान देने के लिए मेरे द्वारा फोन किया गया लेकिन उसकी बाबजूद विबेचक ब्यान लेने नहीं आया. एक भ्रस्टाचारी और कफनचोर मंत्री राकेश सचान एक 24 कैरेट ईमानदार खोजी पत्रकार को जेल भिजबाने की जिद पाल बैठा हैं.
जो मुकद्दमा मेरे ऊपर पंजीकृत हुआ हैं वो मुकद्दमा संख्या धारा 308(2)/356(2) के तहत दर्ज हुआ हैं. में एक बात मंत्री राकेश सचान और पवन अग्रवाल को बता दूँ. में एक 24 कैरेट ईमानदार खोजी पत्रकार था, 24 कैरेट ईमानदार खोजी पत्रकार हूँ और चिता पर लेटने तक 24 कैरेट ईमानदार खोजी पत्रकार रहूंगा तुम्हरे जैसे भ्रस्टाचारी और कफनचोर मंत्री एफ आई आर और जेल भेजनें के नाम पर डरा नहीं सकते ना जाने 25 साल की पत्रकारिता तुम्हरे जैसे कितने मंत्री आये और गए. में हमेशा सत्य और ईमानदारी के मार्ग पर चलकर 25 साल से खोजी पत्रकारिता कर रहा हूँ… जय हिन्द… अनूप गुप्ता संपादक दृष्टांत और प्रखर पोस्ट…
रामनाथ रावत-
पत्रकारिता का वह ’24 कैरट’ सोना, जिसे सत्ता की भट्टी भी न पिघला सकी
लखनऊ। आज के दौर में जहाँ पत्रकारिता ‘चरणवंदना’ और ‘सुविधा’ के बीच झूल रही है, वहाँ अनूप गुप्ता जैसे कुछ ‘पुरातनपंथी’ पत्रकार भी हैं, जिन्हें दुनिया ’24 कैरट का पत्रकार’ कहती है। अब 24 कैरट का मतलब तो आप समझते ही होंगे—एकदम खरा, जिसमें मिलावट की गुंजाइश शून्य हो।
अनूप गुप्ता का जीवन किसी रोलर-कोस्टर सवारी से कम नहीं रहा। जब उन्होंने भ्रष्ट नेताओं और कुर्सी से चिपके अधिकारियों के काले कारनामों को ‘साक्ष्यों’ की धार पर चढ़ाया, तो सत्ता के गलियारों में हड़कंप मच गया। अक्सर लोग साक्ष्य (सबूत) ढूंढते हैं, अनूप गुप्ता ने उन्हें ‘छाप’ दिया।
व्यंग्य की पराकाष्ठा तो तब दिखी, जब शासन और सत्ता ने अपना ‘दबाव’ वाला हंटर घुमाया। उस वक्त उनके तथाकथित ‘करीबी’ और ‘शुभचिंतक’ ऐसे गायब हुए जैसे गधे के सिर से सींग! जो कल तक कंधे पर हाथ रखकर फोटो खिंचवाते थे, वे कोसों दूर खड़े होकर ‘तमाशा’ देखने लगे। शायद उन्हें डर था कि अनूप की ईमानदारी की चमक उनकी ‘पॉलिश’ न उतार दे।
लेकिन साहब, अनूप गुप्ता तो ठहरे ‘पुराने चावल’। उन्होंने संघर्षों से हाथ मिलाने के बजाय उन्हें ठेंगा दिखा दिया। जब दुनिया ‘शॉर्टकट’ ढूंढ रही थी, अनूप गुप्ता ईमानदारी की ढाल और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की उंगली थामे, सीना तानकर खड़े रहे।
आज भी, जब भ्रष्टाचार की आंधी चलती है, तो लोग सुरक्षित ठिकानों की तलाश करते हैं, लेकिन यह ’24 कैरट’ का योद्धा आज भी अपनी कलम की नोक को तीखा कर रहा है। आखिर सोना कितना भी तपे, कुंदन ही बनता है!



