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दिल्ली

रमेश बिधूड़ी और दुष्यंत गौतम को ऊपर से हरवाया गया है!

(दिल्ली चुनाव: कोई माने न माने)

अभिषेक श्रीवास्तव-

रमेश बिधूड़ी और दुष्यंत गौतम को ऊपर से हरवाया गया है। दुष्यंत मुख्यमंत्री का सबसे संभावित चेहरा थे और रमेश दिल्ली भाजपा में बार बार विवाद पैदा करने वाली जड़, भाजपा ने दोनों से मुक्ति पा ली।

जिन्हें लगता है कि इस चुनाव के नतीजों का कोई पैटर्न है या फिर भाजपा की हवा थी और आप के खिलाफ गुस्सा, उन्हें छतरपुर की सीट देखनी चाहिए। यहां आप से पांच साल विधायक रहा आदमी भाजपा से प्रत्याशी बन कर जीत गया जबकि भाजपा का आदमी आप से टिकट लेकर हार गया।

इसी तरह, चुनाव में पैसे का खेल भी बहुत जटिल है। सबसे अमीर आप विधायक धर्मपाल लकड़ा कांग्रेस से लड़कर हार गया जबकि करीब उतना ही अमीर नेता मनजिंदर सिरसा अकाली से भाजपा में आकर जीत गया।

जिन्हें चुनाव का काम से रिश्ता दिखता है, उन्हें शाहदरा की तरफ देखना चाहिए। यहां भाजपा के नेता रहे जितेंद्र सिंह शंटी ने कोविड के दौरान खूब सामाजिक सेवा कर के नाम कमाया था लेकिन आप में आते ही वे उससे लड़कर हार गए। बगल में दिलचस्प घटना हुई कि कभी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रहे अरविंदर लवली भाजपा में जाकर जीत गए।

मनीष सिसोदिया को हराने वाले तरविंदर मारवाह कांग्रेस से भाजपा आए और जीत गए। इसी तरह राजकुमार चौहान कांग्रेस से भाजपा में आए और मंगोलपुरी से जीत गए। ये लोग कांग्रेस से लड़ते तो हार जाते। इससे क्या मतलब निकाला जाय?

चुनाव से पहले टिकट पाने के लिए दल बदलने वालों का ट्रेंड देखते हुए कहा जा सकता है कि आप से कांग्रेस और vice versa आए गए लोगों को औसतन नुकसान हुआ जबकि कांग्रेस से भाजपा में आए लोग लाभ में रहे। वहीं, आप से भाजपा में आए सभी को बराबर लाभ नहीं मिला।

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