यशवंत सिंह-
शैलेंद्र शर्मा उर्फ़ शालू पंडित फ्रंट फुट पर खेलने वाले आदमी हैं। साफ़ सपाट बेबाक बात करते हैं। कोई हिडन एजेंडा नहीं। वे राणा यशवंत के जाल में फँस गए।
नया चैनल अपना खर्चा ख़ुद निकाले, इसके लिए राणा यशवंत द्वारा कोई प्रयास नहीं। बस अपने करीबियों, बेरोजगारों, शागिर्दों, लड़कियों को लगातार भरते गए। वो भी बिना डॉक्यूमेंट। सिर्फ़ ऑफर लेटर को ज्वाइनिंग लेटर बना दिया।
एक ऐसे आदमी को कंसलटेंट बनाया जो कई किस्म के फ्रॉड का आरोपी है और अभी हाल में ही अपने बीमार दोस्त का तीस पैंतीस लाख मार लिया था।
राणा यशवंत ने लंदन पेरिस न्यूयॉर्क तक में नियुक्तियाँ कर डालीं पर ये नहीं प्लान किया कि चैनल चलेगा कैसे। बिना वित्त प्रबंधन नया चैनल चला पाना नामुमकिन है।
नेताओं, कलाकारों, कवियों का इंटरव्यू करने से चैनल नहीं चलता। “अर्धसत्य” सुनाने से चैनल नहीं चलता। चैनल चलता है पैसे से।
सवाल है कि क्या राणा यशवंत ने ज्वाइन करने से पहले दो साल तक वित्तीय संकट न होने की लिखित गारंटी प्रबंधन से ली थी? अगर नहीं तो फिर किस आधार पर लोगों को भरते जा रहे थे, इन्हें सैलरी कौन देगा?
क्या इन्होंने चैनल को अपने पैरों पर खड़ा करने की कोई कोशिश की? नहीं तो फिर एक नए चैनल में उसके नए मालिक के पैसे से कितने दिनों तक क्रांति करने की योजना थी?
इस गुब्बारे को फूटना ही था। शैलेंद्र शर्मा बहुत जल्दी हकीकत समझ गए अन्यथा वे ढीले पड़ते तो उनका जाने कितने करोड़ रुपये अभी और बर्बाद होते।
सच्चाई तो ये है कि सैटेलाइट चैनल अब संपादक के दम पर नहीं चलते, दाम लाने वाले संपादकों के बल पर चलते हैं।
क्रांति के लिए यूट्यूब है न, चैनल बनाइये फ्री में और शुरू हो जाइए।
सैटेलाइट चैनल के संचालन की मजबूरियों की तल्ख़ शर्तों को जानने के बावजूद आपने न्यूज़ इंडिया को आर्थिक बोझ से लाद दिया, जो बहुत दुर्भाग्यपूर्ण साबित हुआ। आख़िरकार यहाँ से भी बहुत बेआबरू होकर आपको जाना पड़ा!
विदाई के बाद अब आप कई किस्म की क्रांतिकारी अफ़वाह फैला रहे हैं जो ग़लत है। सच्चाई को कुबूल करना चाहिए। वैसे शैलेंद्र शर्मा भी दबने के मूड में नहीं हैं। उनका कहना है कि अफवाह फैलाई तो गंभीर धाराओं में दर्ज करवाऊंगा राणा यशवंत पर मुकदमा!
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