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न्यूज़ इंडिया 24×7 में फ़र्ज़ी भर्ती करने, जबरन बढ़ी सैलरी लेने की साज़िश को बेनकाब करते ये दो माफीनामें देखिए!

यशवंत सिंह-

दिल्ली एनसीआर में कथित संपादकों के कई गैंग हैं जो हर वक्त मालिक पकड़ो मालिक पटाओ अभियान में लगे रहते हैं। मालिक मिल गया और पट गया तो समझो साल दो साल की व्यवस्था हो गई। इन वर्षों में नौकरी के अलावा बहुत किस्म के रैकेट भी चल निकलते हैं जिससे मोटी कमाई होती है।

चैनल मालिक कभी गरम हुआ तो उसके मूल धंधे पर छापा डलवा दिया जाता है। छापा वालों से सेटिंग के नाम पर मोटी वसूली होती है, कुछ अपनी जेब में, कुछ छापे वालों के पास। मालिक भी खुश, जान बची तो लाखों पाये।

अगर मालिक बिल्कुल नया चैनल शुरू करना चाहता है तो इससे अच्छा कुछ नहीं होता। स्टूडियो बनाने से लेकर महंगी मशीनों की ख़रीद तक में भारी कमीशन का खेल होता है। डिस्ट्रीब्यूशन के नाम पर मोटा माल पेल दिया जाता है। चिटफंड वाले मालिकों के साथ ऐसा खूब हुआ।

फिलहाल चर्चा में जो प्रधान संपादक हैं, इनका सही समय पर मालिक ने इलाज कर दिया अन्यथा दस लाख मंथली सैलरी खर्च को तीस लाख महीने तक पहुँचा चुके थे और बदले में साहित्यकारों का इंटरव्यू प्रसारित कर रहे थे।

साला कौन खलिहर आदमी है जो साहित्यकार का इंटरव्यू देखता है।

फ़र्ज़ी लोगों को भर्ती करने, सैलरी जबरन बढ़ा कर लेने की साज़िश का पर्दाफाश करता दो माफीनामा लगा रहा हूँ। सबसे ऊपर। पढ़िए और थोड़ा सिर खुजाइये।

नैतिकता मर्यादा की लक्ष्मणरेखा से उपजे संपादक जी से पूछिये आप लोग, ये पत्र किस संस्कारशाला की उपज हैं, क्या इस फ्रॉड की साजिश रचने के लिए आप पर और आपके इन चेलों पर मुकदमा नहीं होना चाहिये?

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