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सरकारी बैग के लिए टूट पड़े रांची के पत्रकार!

एक-एक कर सभी नंगे हो गये. ये हैं रांची के पत्रकार. देखिये क्या कर रहे हैं. ये एक बैग के लिए हाय तौबा मचा रहे हैं. मामूली सरकारी बैग, जिसकी बाजार में कीमत सौ-दो सौ से ज्यादा कुछ भी नहीं. फिर भी मुफ्त के बैग में आनन्द की प्राप्ति होती है, इसलिए वे एक मामूली बैग को लेने के लिए लुच्चे व भिखारी की तरह हरकतें कर रहे हैं. जिन्हें बैग इन पत्रकारों को देना है, वे आराम से दूर से यह दृश्य देखकर, मुस्कुरा रहे होंगे.

एक-एक कर सभी नंगे हो गये. ये हैं रांची के पत्रकार. देखिये क्या कर रहे हैं. ये एक बैग के लिए हाय तौबा मचा रहे हैं. मामूली सरकारी बैग, जिसकी बाजार में कीमत सौ-दो सौ से ज्यादा कुछ भी नहीं. फिर भी मुफ्त के बैग में आनन्द की प्राप्ति होती है, इसलिए वे एक मामूली बैग को लेने के लिए लुच्चे व भिखारी की तरह हरकतें कर रहे हैं. जिन्हें बैग इन पत्रकारों को देना है, वे आराम से दूर से यह दृश्य देखकर, मुस्कुरा रहे होंगे.

बैग देने वाले का नाम है झारखंड सरकार का सूचना एवं जनसंपर्क विभाग। शायद यह विभाग इसलिए मुस्कुरा रहा होगा कि जो काम कोई नहीं कर सका, रांची के इन पत्रकारों ने कर दिया. यानी उधर मुख्यमंत्री रघुवर दास ने 23 जनवरी को विधानसभा में झारखण्ड का बजट पेश किया और इधर ये पत्रकार सीएम की प्रेसवार्ता से कुछ क्षण पहले सरकारी मामूली बैग को हासिल करने के लिए टूट पड़े। कई वरिष्ठ पत्रकार भी तस्वीर में दिख रहे हैं। शर्मनाक! मामूली बैग, जिसके लिए विधानसभा परिसर में पत्रकार भिखारियों की तरह हरकतें कर रहे हैं।

कमाल इस बात का भी, सबकी इज्जत की मिट्टी पलीद करनेवाले ये अखबार और चैनलवाले अपनी इस गंदी हरकतों को न तो छापेंगे और न ही दिखाएंगे। शायद उन्हें लगा कि छापेंगे और दिखायेंगे तो उनकी इज्जत चली जायेगी। दूसरी सूचना यह भी प्राप्त हुई कि एक विधायक से बैग देखने के बहाने एक पत्रकार बैग लेकर ही चलते बना और विधायक उस पत्रकार का मुंह ताकते रह गये। बैग हासिल करने का उस पत्रकार को यह शार्टकट रास्ता दिखा।

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