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साहित्य

प्रयोगधर्मी पत्रकार रश्मि कुलश्रेष्ठ ने अपने पहले उपन्यास में भी खूब प्रयोग किए हैं!

विकास मिश्रा-

इसी 8 फरवरी को दिल्ली के विश्व पुस्तक मेले में यूं ही घूम रहा था, अलग-अलग स्टॉल्स पर जाकर किताबों के पन्ने पलट रहा था। ऐसे ही शिवना प्रकाशन के स्टॉल पर पहुंचा था। अचानक आवाज आई- अरे विकास सर नमस्ते। मैंने नजर उठाई, सामने थीं रश्मि यानी रश्मि कुलश्रेष्ठ। मैंने हालचाल पूछा, रश्मि ने बताया कि सर मेरी भी किताब आई है। मैंने कहा- अच्छा, मुझे तुम्हारी किताब खरीदनी है।

रश्मि की आंखें बता रही थीं कि उसे भरोसा नहीं हुआ था कि मैं उनकी किताब खरीदकर पढ़ने की बात कहूंगा। मैंने किताब खरीदी, बोला- इस नाते नहीं खरीद रहा हूं कि ये तुम्हारी किताब है। इस विश्वास के कारण खरीद रहा हूं कि तुमने बहुत अच्छा लिखा होगा।

ये बातें बेवजह नहीं थीं। जनवरी 2022 में मैंने न्यूज नेशन चैनल ज्वाइन किया था। एक दिन चैनल हेड रंजीत कुमार के साथ बैठा था, तभी रश्मि आई थीं। रंजीत जी ने प्रोमो प्रोड्यूसर के रूप में परिचय करवाया था। एक सामान्य लड़की, बिल्कुल कम बोलने वाली। मुझे लगा कि न्यूज नेशन वैसे भी कुलश्रेष्ठ बहुल चैनल है। जिधर देखो उधर कुलश्रेष्ठ। उसी कुलश्रेष्ठ के नाते रिश्ते में होंगी रश्मि। फिर रंजीत जी ने रश्मि के लिखे कुछ प्रोमो दिखाए, जिन्हें देखकर मैं दंग रह गया। पता चला कि रश्मि कहानियां भी लिखती हैं और इनकी कई कहानियों को नीलेश मिसरा ने रेडियो पर अपनी आवाज भी दी है। इसके बाद रश्मि के प्रति मन में सम्मान बढ़ गया।

न्यूज नेशन में हम लोग प्राइम टाइम में डेढ़ घंटे का एक शो प्लान कर रहे थे। ऐसा नाम चाहिए था, जिससे राष्ट्रीय भावना का प्रबल रूप दिखाई दे। कई नाम सोचे गए, लेकिन बात बनी नहीं। रश्मि ने शो के लिए नाम सुझाया- राष्ट्रमेव जयते। ये बिल्कुल वही नाम था, जैसा हम लोग चाहते थे। इस नाम से डेढ़ घंटे का शो लॉन्च किया गया, जिसकी एंकरिंग पीनाज त्यागी करती थीं। रश्मि की प्रतिभा और लेखन के हम सभी मुरीद थे। बाद में रश्मि न्यूज नेशन से टाइम्स नाऊ नवभारत चली गईं।

खैर, रश्मि की पहली किताब- ’शेष रहेगा प्रेम’ लेकर मैं पुस्तक मेले से लौटा था, एकमात्र किताब इस साल यही खरीदी थी। पढ़ना शुरू किया तो अद्भुत एहसास हुआ। विश्वास पहले से ही था कि कुछ न कुछ नया होगा, कहानी और ट्रीटमेंट दोनों। रश्मि ने इस विश्वास को और भी पुख्ता किया। इस उपन्यास में दो कालखंड की दो प्रेम कहानियां चलती हैं। दोनों एक साथ चलती हैं। मैं अक्सर कहता हूं कि लेखन वही सार्थक है, जिसे आप पढ़ना शुरू करें तो कुछ ही देर बाद आपके सामने तस्वीरें चलने लगें। रश्मि के इस उपन्यास को पढ़ते हुए भी दो प्रेम कहानियां चलचित्र की तरह दिखाई दे रही थीं, ऐसा लग रहा था कि पीछे वायलिन भी बज रहे हैं। जैसे बांग्ला साहित्यकारों के उपन्यासों में विस्तार से चित्रण मिलता है, उसी तरह इस उपन्यास में वस्तु चित्रण अद्भुत तरीके से हुआ है। यहां तक कि कहानी की नायिका तृष्णा और केशव के एक इंटीमेट सीन को लेखिका ने ऐसे शब्द चित्रों से उकेरा है, जिसे पढ़कर आप अचंभित हो जाएंगे। जिस तरह से दोनों प्रेम कहानियों का संगम हुआ है, वह भावुक करने वाला है।

रश्मि प्रयोगधर्मी हैं। इस उपन्यास में उन्होंने खूब प्रयोग किए हैं। कहानी की सूत्रधार ‘मुहब्बत’ है। यानी मुहब्बत ही मुहब्बत की ये दास्तान सुनाती है। डायलॉग खूबसूरत हैं। हम दिल दे चुके सनम फिल्म की झलक भी इसमें मिलेगी। यह रश्मि का पहला उपन्यास है। इसकी पांडुलिपि पर रश्मि को शिवना नवलेखन का प्रथम पुरस्कार मिल चुका है। मुझे भरोसा है कि रश्मि को आने वाले कुछ सालों में साहित्य की दुनिया में एक अलग और अच्छी पहचान मिलेगी।

मैं इस किताब की समीक्षा बिल्कुल भी नहीं लिख रहा हूं। बस पढ़ने के बाद अपनी प्रतिक्रिया बता रहा हूं। दिल को छू गया यह उपन्यास। पढ़कर मैंने रश्मि को बताया भी नहीं कि कैसा लगा। सोचा कि सार्वजनिक रूप से लिखकर बताऊंगा। यह भी जानता हूं कि रश्मि को यह उम्मीद भी नहीं रही होगी कि मैं उनकी किताब पर कुछ लिखूंगा। मैंने रश्मि से कहा था कि किताब इस नाते ले रहा हूं क्योंकि तुम्हारे लिखने पर मुझे भरोसा है। किताब पढ़कर वह भरोसा और भी बढ़ा है। यह पोस्ट उसी भरोसे को कायम रखने के लिए एक छोटा सा पारितोषिक है।

रश्मि कुलश्रेष्ठ का यह उपन्यास- शेष रहेगा प्रेम, शिवना प्रकाशन से प्रकाशित है। ऑनलाइन माध्यम पर उपलब्ध है।

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