नई दिल्ली। राष्ट्रीय सहारा (हिंदी और उर्दू प्रकाशन) ने लंबित विज्ञापन बकाया की वसूली के लिए विशेष प्रोत्साहन (इंसेंटिव) योजना लागू की है। प्रबंधन की ओर से जारी दस्तावेज़ के मुताबिक 1 जनवरी 2020 से 31 दिसंबर 2025 तक के बकाया भुगतान की रिकवरी के लिए यह अभियान चलाया जा रहा है।
दस्तावेज़ में “वर्तमान फंड संकट” का हवाला देते हुए वसूली को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं। योजना के तहत संवाददाताओं, स्ट्रिंगर्स और सेल्स स्टाफ के लिए कुल कमीशन व इंसेंटिव मिलाकर अधिकतम 30% तक भुगतान का प्रावधान किया गया है।
क्या है नई इंसेंटिव स्लैब?
जारी पेपर के अनुसार अलग-अलग अवधियों के बकाया पर अलग दरें तय की गई हैं:
- अप्रैल 2024 से 31 दिसंबर 2025: कुल 20% (15% कमीशन + 5% इंसेंटिव)
- अप्रैल 2023 से मार्च 2024: कुल 25%
- अप्रैल 2021 से मार्च 2023: कुल 30%
- 1 जनवरी 2020 से मार्च 2021: कुल 30%
योजना 1 दिसंबर 2025 से 31 मई 2026 तक प्रभावी रहेगी। दस्तावेज़ में स्पष्ट किया गया है कि इंसेंटिव का भुगतान वसूली की वास्तविक प्राप्ति के बाद तुरंत या अधिकतम पखवाड़े के आधार पर किया जाएगा।
किन पर लागू होगी योजना?
- विज्ञापन कारोबार लाने वाले एक्जीक्यूटिव/स्ट्रिंगर को प्राथमिकता से इंसेंटिव मिलेगा।
- यदि वे वसूली न कर पाएं, तो संबंधित सेल्स स्टाफ को यह लाभ दिया जाएगा।
- जो स्ट्रिंगर कंपनी छोड़ चुके हैं, लेकिन उनके लाए विज्ञापनों की राशि बकाया है, उसकी वसूली पर भी संबंधित स्टाफ को इंसेंटिव दिया जाएगा।
- हिंदी और उर्दू दोनों प्रकाशनों पर यह योजना लागू होगी।
शीर्ष प्रबंधन की मंजूरी
दस्तावेज़ पर दिल्ली यूनिट के हेड सेल्स एंड रिकवरी जे.पी. सिंह, नेशनल हेड (सेल्स एंड मार्केटिंग) मुनेश सक्सेना तथा एडमिनिस्ट्रेटिव हेड अब्दुल माजिद निजामी के हस्ताक्षर दर्ज हैं। एक हस्तलिखित टिप्पणी में “नॉट मोर दैन 30%” (30% से अधिक नहीं) का उल्लेख भी किया गया है।
क्या संकेत देता है यह कदम?
मीडिया उद्योग में आर्थिक दबाव के बीच इतनी ऊँची दर पर कमीशन तय करना यह संकेत देता है कि संस्थान के सामने बकाया वसूली बड़ी चुनौती बन चुकी है। जानकारों का कहना है कि सामान्य परिस्थितियों में मीडिया संस्थान 10–15% से अधिक इंसेंटिव नहीं देते, ऐसे में 30% तक का प्रावधान असाधारण माना जा रहा है।
फिलहाल प्रबंधन की ओर से इस अभियान पर कोई सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन आंतरिक दस्तावेज़ सामने आने के बाद मीडिया हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
आदेश देखें…





AMARNATH KULKARNI
February 25, 2026 at 9:30 am
Don’t pay the amount as the company have not repay the deposit amount of the investors.
Sahara company become bankruptcy.
Anuradha
February 25, 2026 at 9:31 am
Don’t pay the amount as the company have not repay the deposit amount of the investors.
Sahara company become bankruptcy.