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साहित्य

रवि नायर और परंजॉय गुहा ठाकुरता की ये किताब रक्षा सौदों में प्रधानमंत्री की भूमिका की जांच करती है!

दयाशंकर मिश्रा-

रवि नायर की पत्रकारिता… पत्रकार रवि नायर को केवल ट्वीट के लिए सज़ा नहीं दी गई है। पत्रकार के रूप में रवि नायर की मूल पहचान खोजी पत्रकारिता है। रवि का काम ट्विटर की दुनिया से आगे ज़मीनी, संजीदा है। फ़्रंटलाइन में भी आप उनके लेख पढ़ सकते हैं।

हिंदी पत्रकारों की सोशल मीडिया पर भारी मौजूदगी के बावजूद उनका ज़िक्र अंग्रेज़ी के मुक़ाबले बहुत कम हो रहा है।

यह किताब जो आपके सामने है; ‘राफ़ेल सौदा सफ़ेद झूठ?’ भारत के सबसे ‘बड़े रक्षा घोटाले’ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका की जाँच करती है।

किताब सीधे -सीधे सवाल उठाती है; भारत में उन उपकरणों के लिए 40 प्रतिशत से ज़्यादा भुगतान क्यों किया जिनकी क़ीमत तय हो चुकी थी? इसके साथ ही यह भी कि ; भारत सरकार और व्यक्तिगत रूप से प्रधानमंत्री ने पहले से तय हो चुकी वार्ता पर फिर से बातचीत क्यों की?

किताब के लेखक रवि नायर और परंजॉय गुहा ठाकुरता हैं। किताब में लेखकों ने सुप्रीम कोर्ट के साथ ही भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) द्वारा इस मामले में मोदी सरकार को क्लीन चिट दिए जाने की आलोचना की है।

रक्षा सौदों पर रिपोर्ट करने के लिए विशेष दक्षता, संपर्कों और संसाधनों की ज़रूरत होती है । हिन्दी के पत्रकारों में यह और भी कम नज़र आती है। इस किताब को पढ़ कर आप रवि नायर पर सरकार की ‘दृष्टि’, मुक़दमे और सज़ा को ठीक तरह से समझ पाएंगे।

इस किताब के दूसरे प्रतिष्ठित और सुपरिचित लेखक परंजॉय गुहा ठाकुरता पहले ही तरह-तरह से खोजी पत्रकारिता, लेखन के लिए सरकारी एजेंसियों द्वारा प्रताड़ित किए जा रहे हैं। मुकदमों की सुनवाई में उलझाए जा चुके हैं।

हिंदी में सबसे ज़्यादा प्रकाशित होने वाले अख़बारों में पत्रकारों के ‘सरकारी’ उत्पीड़न पर छपने वाली ख़बरों की संख्या शून्य है। अगर कभी ख़बर छपती भी है तो वह पत्रकार को ही दोषी बताते हुए छापी जाती है।

पत्रकारों का दमन जब तक संदर्भ सहित जनता के विमर्श का केंद्र नहीं बनेगा, सरकार की तानाशाही उजागर नहीं हो पाएगी।

सरकार की तानाशाही सोशल मीडिया की बहुत छोटी दुनिया ख़ास तौर पर ट्विटर पर केंद्रित रह जाने की क़ीमत हमारा लोकतंत्र पहले ही चुका रहा है।

रवि नायर के काम को जानिए। इससे सरकार की नीयत और तानाशाही को बेहतर तरीक़े से समझ पाएंगे।

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2 Comments

2 Comments

  1. अनन्त वर्मा

    February 13, 2026 at 9:57 am

    इस किताब की लिंक भी दें या कहां से खरादी जा सकती है वो बतायें

  2. अनन्त वर्मा

    February 13, 2026 at 9:58 am

    भैया इस किताब की लिंक भी दें या कहां से खरादी जा सकती है वो बतायें

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