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RBI गवर्नर का इंटरव्यू अपलोड करने से पहले चेक कराने भेजा?

शीतल पी सिंह-

अगर यह सही है कि एक बड़े मीडिया समूह ने RBI गवर्नर के इंटरव्यू को अपलोड से पहले उनके कार्यालय को स्क्रिप्ट और वीडियो दिखाने पर सहमति दी, तो यह पत्रकारिता की आत्मा से जुड़ा गंभीर सवाल है।

यह fact-check नहीं, पूर्व स्वीकृति (prior approval) है। दुनिया भर में मानक स्पष्ट हैं—

Reuters, BBC और SPJ सभी pre-publication vetting को अस्वीकार करते हैं।

सत्ता से सवाल पूछने वाली पत्रकारिता, सत्ता की अनुमति से नहीं चल सकती। बड़े मीडिया संस्थान अगर यह रेखा लांघते हैं, तो कीमत पूरी पत्रकारिता चुकाती है।


दयाशंकर मिश्रा-

कॉरपोरेट पत्रकारिता की आत्मा छलनी होते-होते केवल छलनी में बदल गई है। पत्रकारिता के मानक दीवारों पर टंगे ‘ख़ूबसूरत’ स्लोगन में दर्ज हैं। यहाँ केवल वही सच बचा है, जो J&Company से अप्रूव होकर आता है।

आप जिस समूह की बात कर रहे हैं, उस समूह को पूर्व स्वीकृति के मामले में A1 का समूह बहुत पीछे छोड़ चुका है।

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