तेलुगु भाषा के न्यूज़ चैनलों में अब मुकाबला नहीं, बल्कि एकतरफा वर्चस्व की तस्वीर सामने आ चुकी है। आरटीवी ने लगातार रिकॉर्ड प्रदर्शन करते हुए न सिर्फ चुनावी कवरेज में बाजी मारी, बल्कि पूरे देश में नंबर 1 डिजिटल न्यूज़ चैनल बनकर उभरा है।
मार्च 2026 में, जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान–अमेरिका तनाव अपने चरम पर था, उस दौरान आरटीवी ने 41.9 करोड़ व्यूज़ हासिल किए। यह आंकड़ा पूरे भारत में सभी भाषाओं के न्यूज़ चैनलों में सबसे ज्यादा रहा।
इसके बाद अप्रैल 2026 में भी आरटीवी ने अपना दबदबा कायम रखा और 258.7 मिलियन व्यूज़, 2.7 मिलियन घंटे का वॉच टाइम और 48 हजार से ज्यादा नए सब्सक्राइबर्स जोड़ते हुए एक बार फिर खुद को देश का नंबर 1 डिजिटल न्यूज़ चैनल साबित किया।
और जब बात चुनावी कवरेज की आई, 4–5 मई 2026 को 5 राज्यों के चुनाव नतीजों के दौरान आरटीवी ने 64 मिलियन से अधिक दर्शक जुटाए।
चुनावी दिन के आंकड़े तस्वीर को और भी साफ कर देते हैं।
जहां आरटीवी ने 64 मिलियन से ज्यादा व्यूअरशिप हासिल की, वहीं टीवी9 करीब 11 मिलियन, एनटीवी लगभग 1 मिलियन, एबीएन करीब 4 लाख 21 हजार, वी6 करीब 2 लाख 64 हजार और बिग टीवी करीब 1 लाख 80 हजार दर्शकों तक ही सीमित रहे।
यानी आरटीवी और बाकी चैनलों के बीच का अंतर सिर्फ बढ़त नहीं, बल्कि कई गुना का अंतर है।
टीवी9 जैसे पुराने और स्थापित चैनल, जो कभी तेलुगु न्यूज़ मार्केट में नंबर 1 माने जाते थे, आज आरटीवी से काफी पीछे नजर आ रहे हैं।
आरटीवी ने सिर्फ बढ़त नहीं बनाई, बल्कि पूरे मार्केट को बुरी तरह पछाड़ दिया। इस पूरी कहानी का एक अहम चेहरा है -रवि प्रकाश। वही रवि प्रकाश, जिन्होंने कभी टीवी9 की नींव रखी थी। लेकिन 2019 में प्रबंधन विवादों के बाद हालात बदले।
आज वही रवि प्रकाश अपने नए नेटवर्क आरटीवी न्यूज़ नेटवर्क के साथ न सिर्फ वापसी कर चुके हैं, बल्कि उसी मार्केट में अपनी मजबूत पकड़ बना चुके हैं। और अब तस्वीर बिल्कुल साफ है। आरटीवी सिर्फ चुनौती नहीं दे रहा बल्कि बहुत आगे निकल चुका है।
तेलुगु न्यूज़ मार्केट में जहां कभी टीवी9 का दबदबा था, वहीं आज आरटीवी ने खेल पूरी तरह बदल दिया है। मार्च, अप्रैल और चुनावी आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि आरटीवी अब सिर्फ एक चैनल नहीं , बल्कि एक राष्ट्रीय डिजिटल न्यूज़ पावरहाउस बन चुका है।
यह सिर्फ सफलता नहीं है। यह एक नया युग है।



