परमेंद्र मोहन-
माना कि हमारे देश में प्रीमैरिज सेक्सुअल अफेयर्स, एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स, मल्टीपार्टनर सेक्सुअल रिलेशंस जैसे प्रचलन अब टैबू नहीं हैं, बावजूद इसके ऐसा भी नहीं हो गया है कि सबके सब इस फ्री सेक्स दौर और पोर्न कंटेंट के पक्षधर ही बन चुके हैं। भारतीय समाज का शरीर भले ही काफी हद तक इन गंदगियों से सड़-गल कर नष्ट-भ्रष्ट हो चुका है, लेकिन पारिवारिक-धार्मिक-सांस्कृतिक-नैतिक आत्मा भी मर चुकी है, ऐसा नहीं मान कर चला जाना चाहिए।
संदर्भ है वो नया गाना, जिसके बोल ने अश्लीलता के अब तक के तमाम आयाम को ध्वस्त कर दिया है। सेक्सुअल पेनेट्रेशन की पूरी प्रक्रिया को बयां करने वाले बोल को अपनी अश्लील (आप उत्तेजक भी कह सकते हैं) भाव-भंगिमाओं के जरिये नोरा फतेही ने पूरे विस्तार के साथ प्रस्तुत किया है, वैसे ही जैसे बिहार विधानसभा में सेक्स के दौरान प्रेगनेंसी से बचने के नायाब तरीके से सुशिक्षित मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने माननीयों की मौजूदगी में जनता को प्रशिक्षित किया था।
आज किसी न्यूज़ चैनल की एक क्लिप में एक वरिष्ठ पत्रकार मौजूदा दौर के मीडिया खासकर टीवी को न्यूज़ पोर्न बता रहे थे। सोशल मीडिया के कई प्लेटफॉर्म्स तो सॉफ्ट पोर्न जैसे हैं ही, ये तो सब जानते ही हैं, तो पहले से ही इस विधा में महारत हासिल कर चुकी फिल्म इंडस्ट्री ने एक बड़ी छलांग लगाते हुए बड़े पर्दे पर भी कालजयी गाना पेश किया है..ऐसा अभूतपूर्व गाना, जिसके गंदे बोल लिखने की नैतिकता मैं नहीं जुटा पा रहा, आपको पता ही होगा और नहीं भी होगा तो आज के दौर में सेकंड्स में पता कर ही लेंगे, लेकिन इस गाने के कुछ शब्द ज़रूर लिख रहा हूं ताकि आपको अंदाज़ा हो जाए कि पूरा गाना कैसा होगा? इस गाने में उठा ले, अंदर डाले, ना गिराए, खाली करके निकाले, चूसेगा, चाटेगा जैसे शब्दों के जरिये नोरा अपने सह कलाकार को बता रही है कि चूंकि उसे घर जाना है इसलिए सेक्स के दौरान डू और डोंट्स का क्या-क्या ख्याल रखना है।
इंडस्ट्री के अनुभवी और इस गाने में नोरा के सह कलाकार संजय दत्त को भी इसके बोल से कोई फर्क नहीं पड़ा, तो ये सवाल लाजिमी है कि क्या सोशल मीडिया की तरह ही फिल्में भी अब पूरी तरह अनसेंसर्ड, अनचेक्ड हो गई हैं? अश्लीलता और भौंडेपन की हवा तो अरसे से चल रही थी, अब तो अश्लीलता की आंधी ही चल पड़ी है, जिसकी चपेट में सारा समाज तबाह-बर्बाद हो रहा है। गाने पर बैन की मांग तो हो रही है, लेकिन यूट्यूब से हटाए जाने से पहले ही ये वायरल हो चुका है यानी मकसद पूरा हो चुका है, ऐसे में जिम्मेदारों को कुंभकर्णी नींद से जगाएं कि वो बेसिक काम कर लें और ऐसे कंटेंट, सांग क्रिएटर्स को जेल भी भिजवाएं वर्ना मर्यादा-संस्कार तो पहले ही तेल लेने जा चुके हैं, कम से कम जो बचा-खुचा घर-परिवार है, वो भी गंदगी के गर्त में किस हद तक जा गिरेगा, इसका अंदाज़ा भी नहीं लगा पाएंगे।
खुशदीप सहगल-
संस्कारी सरKAR का संस्कारी सेंसर बोर्ड है. इसके चेयरमैन है गीतकार-एड गुरु प्रसून जोशी. एक बार विदेश में प्रधान सेवक का इंटरव्यू भी ले चुके हैं…
इन्हीं कविवर जोशी जी की नाक के नीचे फिल्मों के कैसे ‘संस्कारी’ गाने पास हो रहे हैं, ज़रा एक फिल्म के गाने के इन बोलों की बानगी देखिए-
“पहले उठाले, अंदर वो डाले
नीचे एक बूंद ना गिराए
खाली कर के निकाले
मुझ पे न गिराना, मुझे लगता है डर
भेद खुल जाए ना, संभल के जाना घर
चूसेगा या चाटेगा, जो करना है कर
तेरी बोतल पर न पड़े किसी की भी नज़र…
कन्नड़ फिल्म KD: The Devil का है. इसे हिन्दी में डब कर भी रिलीज़ किया जाएगा. गाने का टीज़र यूट्यूब पर रिलीज़ हो चुका है. फिल्म के इस गाने ‘सरके चुनर, तेरी सरके’ को नोरा फतेही और संजय दत्त पर फिल्माया गया है. नोरा फतेही मोरक्को मूल की कैनेडियन नागरिक है. बरसों से हिन्दी फिल्मों में काम कर रही हैं. चलिए नोरा को तो विदेशी मूल की होने की वजह से हिन्दी अच्छी न समझने की छूट दी जा सकती है लेकिन संजय दत्त तो पैदा ही हिन्दी सिनेमा में हुए वो कैसे इन महा अश्लील बोलों पर थिरक सकते हैं…
गाने को लिखने का क्रेडिट रकीब आलम को दिया गया है. हालांकि वेराइटी इंडिया से हुई बातचीत में रकीब ने बताया कि उन्होंने ये गाना नहीं लिखा है, ये गाना ओरिजनली कन्नड़ भाषा में लिखा गया है. जो कि खुद फिल्म के डायरेक्टर प्रेम ने लिखा है। डायरेक्टर के कहने पर रकीब ने उस गाने को हिंदी में ट्रांसलेट किया है. तो जनाब रकीब आलम आप ऐसे अश्लील बोलों का अनुवाद करने से मना नहीं कर सकते थे क्या?
एडवोकेट और सामाजिक कार्यकर्ता विनीत जिंदल ने फिल्म ’केडी- द डेविल’ के विवादित गाने ‘सरके चुनर’ को लेकर दिल्ली पुलिस की साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई है. इस शिकायत में एक्ट्रेस नोरा फतेही और संजय दत्त समेत, गीतकार रकीब आलम , फिल्म के निर्देशक प्रेम के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है. शिकायत में आरोप लगाया गया है कि गाना अश्लील और आपत्तिजनक है. इसमें भारतीय न्याय सहिता की धारा 294 और आईटी एक्ट के संबंधित प्रावधानों के तहत FIR दर्ज करने की मांग की गई है. साथ ही शिकायत में यह भी मांग की गई है कि इस गाने को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाए….
भारी विरोध के बाद फिल्म मेकर्स को गाने को रिलीज़ के एक दिन बाद ही यूट्यूब से हटाने के लिए मजबूर होना पड़ा…
मेरा सवाल- जब इस तरह के गाने, एनिमल, कबीर सिंह जैसी फिल्में पास की जाती रहेंगी, नारी को ऑब्जेक्टिफाई किया जाता रहेगा, इस देश में यौन अपराधों पर कैसे प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा?


