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सहारा टीवी नेटवर्क को चुकानी होगी 1.10 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम, इन दो कंपनियों ने जीता केस

नई दिल्ली: सहारा इंडिया टीवी नेटवर्क के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं। टेलिकॉम डिस्प्यूट्स सेटलमेंट एंड अपीलेट ट्रिब्यूनल (TDSAT) ने सहारा और उसके अधिकृत डिस्ट्रीब्यूटर ABS Media Services Pvt. Ltd. को दो अलग-अलग मल्टी सिस्टम ऑपरेटर (MSO) कंपनियों—Konark IP Dossiers Pvt. Ltd. और Den New Broad Communication Pvt. Ltd.—को कुल 1.10 करोड़ रुपये से अधिक की बकाया प्लेसमेंट फीस दो महीने के भीतर चुकाने का आदेश दिया है।

ट्रिब्यूनल के सदस्य जस्टिस राम कृष्ण गौतम ने दोनों मामलों में पाया कि सहारा की तरफ से पेश किया गया जवाब प्रक्रियागत रूप से गलत, अधूरा और सबूतों के लिहाज से कमजोर था।

क्या है पूरा विवाद?

Konark और Den, दोनों MSO कंपनियों ने ट्रिब्यूनल में शिकायत की थी कि वे 2011 से Sahara One और Filmy चैनलों का प्रसारण कर रही हैं। 2013 में ABS Media के साथ नए एग्रीमेंट के बावजूद, वर्षों तक उन्हें प्लेसमेंट फीस का भुगतान नहीं किया गया।

  • Konark ने ₹66,18,940
  • Den ने ₹44,12,627

की बकाया राशि की मांग की थी।

दोनों कंपनियों ने लेजर, एग्रीमेंट, इनवॉइस, ईमेल और डिजिटल रिकॉर्ड सहित मजबूत दस्तावेज अदालत में प्रस्तुत किए।

सहारा की दलीलें—और क्यों खारिज हुईं

सहारा इंडिया टीवी नेटवर्क ने दावा किया कि:

  • 2013 का एग्रीमेंट सहारा ने साइन नहीं किया
  • MSO कंपनियों ने मनमाने इनवॉइस भेजे
  • कोई डिमांड नोटिस प्राप्त नहीं हुआ
  • उन पर कोई बकाया नहीं बनता

लेकिन TDSAT में ये सभी दलीलें कमजोर साबित हुईं।

सबसे बड़ी चूक यह रही कि सहारा का जवाब उनके अधिकृत प्रतिनिधि की बजाय एक लॉ फर्म ने दाखिल किया था। जवाब में जरूरी वेरिफिकेशन भी नहीं था, जो सिविल प्रक्रिया संहिता का सीधा उल्लंघन है।

इसके अलावा, सहारा की ओर से लगाए गए हलफनामे Trilogic Digital Media Ltd. के व्यक्ति ने दिए थे—जिसका सहारा से कोई संबंध नहीं था।

सबसे गंभीर बात—सहारा एक भी गवाह पेश नहीं कर सका, जिससे उनका पूरा पक्ष गिर गया।

ट्रिब्यूनल ने कहा, “सबूत के बिना कोई दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता। सहारा का बचाव कानूनी रूप से अस्वीकार्य है।”

ABS Media रही गायब, एक्स-पार्टी घोषित

सहारा की डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी ABS Media ने दोनों मामलों में कोई जवाब दाखिल नहीं किया और न ही सुनवाई में पेश हुई। इसलिए ट्रिब्यूनल ने उसे एक्स-पार्टी माना।

ट्रिब्यूनल ने यह भी माना कि भले ही 2013 के एग्रीमेंट पर सहारा का हस्ताक्षर नहीं है, लेकिन ABS Media पहले भी सहारा की ओर से इसी फॉर्मैट में समझौते साइन करती रही है—इसलिए एग्रीमेंट वैध माना गया।

ट्रिब्यूनल का आदेश

  1. Konark IP Dossiers Pvt. Ltd.
  • ₹66,18,940 बकाया
  • 9% साधारण ब्याज
  • भुगतान की समयसीमा: 2 महीने
  1. Den New Broad Communication Pvt. Ltd.
  • ₹44,12,627 बकाया
  • 9% साधारण ब्याज
  • भुगतान की समयसीमा: 2 महीने

ट्रिब्यूनल ने कहा कि ऐसे मामलों में 9% ब्याज पहले भी मानक दर रही है।

अगर भुगतान नहीं हुआ तो…

ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय में रकम नहीं चुकाने पर दोनों MSO कंपनियां कानूनी रिकवरी प्रक्रिया शुरू करने के लिए स्वतंत्र होंगी।

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