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साहित्य अकादमी पुरस्कार पर चला मोदी सरकार का बुलडोजर, अवार्ड प्रक्रिया रद्द!

नई दिल्ली: साहित्य अकादमी को गुरुवार को अपने वार्षिक साहित्य पुरस्कारों की घोषणा के लिए बुलाई गई प्रेस कॉन्फ्रेंस रद्द करनी पड़ी, जिससे भ्रम की स्थिति बन गई। यह कदम केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के निर्देश के बाद उठाया गया।

प्रेस कॉन्फ्रेंस दिल्ली में अपराह्न 3 बजे होनी थी। इससे पहले साहित्य अकादमी की कार्यकारी परिषद की बैठक में पुरस्कार विजेताओं के नामों को मंजूरी दी जा चुकी थी। लेकिन प्रेस कॉन्फ्रेंस शुरू होने से कुछ मिनट पहले यह घोषणा कर दी गई कि प्रेस मीट रद्द की जा रही है और पुरस्कार प्रक्रिया फिलहाल स्थगित कर दी गई है।

संस्कृति मंत्रालय ने अकादमी को एक नोट भेजकर उस समझौता ज्ञापन (MoU) की याद दिलाई, जो उसके अधीन चारों स्वायत्त सांस्कृतिक संस्थानों—राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, संगीत नाटक अकादमी, ललित कला अकादमी और साहित्य अकादमी—के साथ किया गया है। इस MoU में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि पुरस्कारों के पुनर्गठन (रीस्ट्रक्चरिंग) से जुड़ा कोई भी अभ्यास मंत्रालय से परामर्श करके ही किया जाएगा।

मंत्रालय के नोट में यह भी कहा गया है कि 2025–26 के लिए किए गए MoU के अनुसार पुरस्कारों के पुनर्गठन की प्रक्रिया मंत्रालय के साथ परामर्श में ही होगी। नोट में यह भी अनुरोध किया गया है कि अब तक उठाए गए कदमों की जानकारी मंत्रालय को दी जाए।

संस्कृति मंत्रालय ने आगे निर्देश दिया कि जब तक पुनर्गठन प्रक्रिया को मंत्रालय की औपचारिक मंजूरी नहीं मिल जाती, तब तक पुरस्कारों की घोषणा की कोई भी प्रक्रिया मंत्रालय की पूर्व अनुमति के बिना नहीं की जाएगी। यह नोट गुरुवार को सभी चारों स्वायत्त सांस्कृतिक संस्थाओं को भेजा गया।

मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि यह नोट इसलिए भेजा गया क्योंकि प्रेस कॉन्फ्रेंस मंत्रालय की जानकारी के बिना बुलाई गई थी और पुरस्कार चयन की निर्धारित प्रक्रिया को भी मंजूरी नहीं मिली थी।

सूत्रों के अनुसार, पुरस्कारों के पुनर्गठन से जुड़े MoU केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन, सभी क्षेत्रों में किए जा रहे पुरस्कारों के व्यापक पुनर्गठन के अनुरूप हस्ताक्षरित किए गए हैं।


लीजिए, अब साहित्य अकादमी पर भी मोदी सरकार का बुल्डोजर चल गया। आख़िरी क्षणों में फ़रमान आ गया कि अवार्ड न बांटे जाएं और अकादमी ने तुरंत घुटने टेक दिए। लेकिन ये तो होना ही था। जिस सरकार को साहित्य – संस्कृति का शऊर न हो वह यही तो करेगी। उसे तो प्रचार साहित्य चाहिए और उसी को रचने वालों को वह पुरस्कृत करेगी। साहित्य अकादमी के बाद बाक़ी अकादमियों का भी वह यही हाल करेगी। – डॉ मुकेश कुमार, वरिष्ठ पत्रकार

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