अरशद जमाल-
दिसम्बर माह में पूर्व कुलपति प्रभात कुमार की विश्वविद्यालय से विदाई के बाद वरिष्ठ प्रोफेसर होने के नाते सैफई विश्वविद्यालय में कार्यवाहक कुलपति के रूप में शासन से बैठाये गये प्रोफेसर पी के जैन अपने गुरु डॉक्टर प्रभात कुमार की भ्रष्ट नीति के नक्शे कदम पर चला रहे अपने 4 माह के कार्यवाहक कार्यकाल में अब भ्रष्टाचार के गम्भीर सवाल खड़े होने लगे है, आउटसोर्सिंग फर्मों के कार्यकाल बढ़ाने से लेकर,खरीददारी और विश्वविद्यालय में हो रही नियुक्तियों भी अब सवालों के घेरे में है, दबी जुबान अब लोग बोल रहे है कि अँधा बाँटे रेवड़ियाँ अपने अपनो को दे।
क्या है मामला जानिए?
सैफई विश्वविद्यालय के अधीन पैरामेडिकल साइंस और फार्मेसी संकाय में 20 जून 2024 को विज्ञापन संख्या 37/यूपीयूएमएस/पैरामेडिकल/फार्मेसी/2024-25 में 5 विभागों में 5 प्रोफेसर, 3 एसोसिएट प्रोफेसर और 8 असिस्टेंट प्रोफेसर कुल 16 पदों पर भर्ती प्रकाशित हुई, जबकि नियम यह कहता है कि अभ्यर्थियों का परिणाम विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर अपलोड कर जारी करना चाहिए, लेकिन सैफई विश्वविद्यालय के भ्रष्ट युगों का नियम है कि चयनित अभ्यर्थी का नियुक्ति पत्र उसकी पर्सनल मेल पर भेज दिया जाता है।
रेस में सैकड़ों अभ्यर्थी लेकिन फायदा अपने को
ऑप्टोमेट्री विभाग में 1 प्रोफेसर और 2 असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिये 71 आवेदन आये, फिजियोथेरेपी विभाग में 1 प्रोफेसर, 1 एसोसिएट प्रोफेसर और 2 असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिये 131 आवेदन आये, मेडिकल लेबोरेटरी में 1 प्रोफेसर और 2 असिस्टेंट प्रोफेसर के पद के लिये 126 आवेदन प्राप्त हुये तो वही रेडियोलॉजिकल और इमेजिंग टेक्निकस में 1 प्रोफेसर, 1 एसोसिएट प्रोफेसर और 2 असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिये 126 आवेदन आये।
नियुक्तियों में अंधेर
नियम कहता है कि एक विज्ञापन संख्या पर सभी पदों की नियुक्ति पूर्ण होने तक एक साथ चयनित लोगो की चयन सूची अपलोड कर विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर डालना चाहिये लेकिन यहाँ ऐसा नही हुआ,12 मार्च को चयनित हुये 2 प्रोफेसरों और 1 एसोसिएट प्रोफेसर को पर्सनल मेल द्वारा नियुक्ति पत्र देकर उनका होली मिलन समारोह भी कर दिया, विश्वविद्यालय के वर्तमान एसोसिएट प्रोफेसर डॉक्टर कमल पंत को ऑप्टोमेट्री विभाग में प्रोफेसर पद पर नियुक्ति कर दी बाकी बचे 70 अभियर्थियों को आईपीएल मैच का टिकट थमा दिया, विश्वविद्यालय के वर्तमान पैरामेडिकल डीन डॉक्टर जे पी मथुरिया को मेडिकल लेबोरेट्री में प्रोफेसर पद पर नियुक्ति देकर उनके गालों पर होली का गुलाल लगा दिया बाकी 125 लोगो को आईपीएल मैच देखने की इजाजत दे दी, पैरामेडिकल में लेक्चरर पद पर कार्यरत डॉ0 गौरीशंकर पटूरी को फीजियोथेरेपी विभाग में सीधे एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर काबिज करवा दिया और जैन साहब ने कह दिया होली मुबारक हो जी।
चिकित्सा अधीक्षक का भतीजा भी बना असिस्टेंट
विश्वविद्यालय में पिछले ढाई साल से एमएस की कुर्सी पर बैठकर चाय में मोटी मलाई डालकर खा रहे डॉ शैलेन्द्र पाल सिंह जिनका चर्चित पेसमेकर घोटाले की सीओ की जाँच रिपोर्ट में मरीजों की फाइलों के साथ छेड़छाड़ करवाने जैसे आरोप लगे वह आज भी कुर्सी पर विराजमान होकर कहते है कि “बाकी सब सपने होते है अपने तो अपने होते है इसी अपनेपन की चाह में सैफ़ई विश्वविद्यालय से 2016 में रेडियोग्राफी की पढ़ाई करने वाले अपने सगे भतीजे मयंक पाल सिंह को ओबीसी कोटे की 1 सीट पर रेडियोग्राफी विभाग में अस्सिस्टेंट प्रोफेसर बनवाने में सफल हो गये (जैसा कि सूत्र बताते है), यह है जैन युग का कार्यवाहक दौर, जिसमे अपने अपने होते है, बाकी सब सपने होते है। इसी कड़ी में मेडिकल कॉलेज में माइक्रोबायोलॉजी, पैथोलॉजी विभाग में प्रोफेसर डॉक्टर प्रदीप मिश्रा की पत्नी डॉक्टर निशि मिश्रा जो पैरामेडिकल कॉलेज के मेडिकल लैब टेक्नोलॉजी विभाग में कार्यरत है उनको मेडीकल लेबोरेट्री में सूत्रों के मुताबिक सम्भावित असिस्टेंट प्रोफेसर बनाया गया है, डॉक्टर प्रदीप मिश्रा कुलपति पी के जैन के ग्रह क्षेत्र ग्वालियर के हैं और जैन साहब से आपसी पारिवारिक सम्बंध भी है।
जैन युग के भ्रष्ट दौर में चेला आगे गुरु पीछे
विश्वविद्यालय के एमएस डॉक्टर एस पी सिंह के भतीजे मयंक पाल सिंह को सैफई विश्वविद्यालय में 2016 में रेडियोग्राफी की पढ़ाई पढ़ाने वाले उनके गुरु मोहम्मद अराफात ने भी 62 अभियर्थियों के साथ असिस्टेंट प्रोफेसर के लिये आवेदन किया लेकिन 10 दिन चले साक्षात्कार के बाद विश्वविद्यालय के भ्रष्ट अंधे युग मे चेले की चाल गुरु को भी फेल कर गई, पढ़ने वाला खरगोश बना दिया गया और पढ़ाने वाला कछुआ बना दिया गया,यह गम्भीर जाँच का विषय है कि किस तरह चिकित्सा अधीक्षक के भतीजे के चयन के लिये अनिवार्य आहर्ता को भी घटाया गया और गुरुओं कि जगह चेलो का चयन कर दिया गया।
रिक्रूटमेंट समिति के अध्यक्ष आज भी जमे हैं
शासन द्वारा अभी हाल ही में कार्यवाहक कुलसचिव के पद से हटाये गये डॉक्टर चन्द्रवीर सिंह लंबे समय से विश्वविद्यालय में रिक्रूटमेंट समिति के अध्यक्ष के पद पर जमे होकर सारी नियुक्तियों का ठेका आज भी अपने पास रखे है जो गम्भीर जाँच का विषय है। सूत्र बताते है कि मयंक पाल सिंह की नियुक्ति में इनका बड़ा योगदान है।
शासन की उदासीनता, कार्यवाहक कुलपति की चाँदी
नवंबर माह में सैफई विश्वविद्यालय के कुलपति पद का विज्ञापन प्रकाशित हुआ था, 8 दिसम्बर को डॉक्टर पी के जैन को कार्यवाहक कुलपति बनाया गया उसके बाद से शासन अभी तक स्थायी कुलपति की नियुक्ति कर पाने में लाचार दिखाई दे रहा है, जहाँ कार्यवाहक की चाँदी ही चाँदी है, इससे पहले डॉक्टर राजकुमार को हटाए जाने के बाद डॉक्टर रमाकांत यादव को कार्यवाहक कुलपति बनाया गया था जिनका कार्यकाल 9 महीने से अधिक समय का रहा वही जैन साहब भी 9 महीने पूरे करने को आतुर है, लेकिन सवाल वही कि कुलपति स्थायी हो या अस्थायी सबकी नियत विश्वविद्यालय में महमूद गजनबी बनकर लूटने की है।
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