(संजय पुगलिया के एक्स पर ताजा जो कुछ लिखा गया है वो पाँच दिन पुराना है और अदानी ग्रुप के पोस्ट को रिपोस्ट करते हुए लिखा गया है. इन्हें अपने रिपोर्टर के अपमान की चिंता नहीं है. ये अदानी ग्रुप के चरण चुंबन में ही मस्त हैं!)
यशवंत सिंह-
ये संजय पुगलिया हैं। अदानी tv उर्फ़ एनडीटीवी के सर्वेसर्वा! इनके रिपोर्टर के साथ एक मंत्री ने बदतमीजी कर दी। सोशल मीडिया पर ये मुद्दा छाया हुआ है। लेकिन अदानी पत्रकार संजय पुगलिया के पास फुर्सत और हिम्मत नहीं है मंत्री की घटिया हरकत के ख़िलाफ़ एक लाइन लिखने की। वे अदानी को खुश करने के लिए पाँच दिन पहले ज़रूर कुछ ग़ैर मीडिया कंटेंट पोस्ट किया हुआ है। इतनी महानता का जनहित में अचार ही डाला जा सकता है! #AdaniGroup #sanjaypugalia #ghanta
देवेंद्र सुरजन-
एनडीटीवी का मालिक अगर चाहे तो कैलाश विजयवर्गीय को हमेशा के लिए घर बिठा दे. एनडीटीवी के सबसे सक्रिय वरिष्ठ और संवेदनशील पत्रकार Anurag Dwary से उनका यह घटिया व्यवहार कतई स्वीकार्य नहीं हो सकता.
इतना untoward और uncalled for attitude किसी भी स्वाभिमानी और सम्मानित पत्रकार के लिए असहनीय है. उन्होंने कैलाश विजयवर्गीय के मुंह पर ही जवाब देकर स्वाभिमानी पत्रकारिता के इतिहास में एक नया मुकाम दर्ज किया है.
अडानी अगर अपने चैनल के रिपोर्टर्स की जरा भी कद्र करते होंगे तो वह मोदी को उन पर कार्यवाही करने को अवश्य बोलेंगे. एनडीटीवी इंडिया के हेड संजय पुगलिया खुद भी कभी रीढ़धारी हुआ करते थे पर उनमें अब यह बात नहीं रही. यही वजह है कि उन्होंने एक शब्द नहीं बोला है. शर्मनाक है ये!

अगर ग्रुप के सारे चैनल दो दिन अभियान छेड़ दें तो कैलाश विजयवर्गीय पानी भरते नज़र आयेंगे. सवाल यह है कि क्या देश के रीढ़दार पत्रकारों को इस घटना को इतनी सहजता से छोड़ देना चाहिए. प्रेस क्लब ऑफ इंडिया की नव नियुक्त टीम इस पर क्या प्रतिक्रिया व्यक्त करती हैं और कैसा रवैया अपनाती है, देखना होगा! वैसे तो यह पूरे पत्रकार बिरादरी का अपमान है.
गिरीश मालवीय-
अनुराग द्वारी ने कैलाश विजयवर्गीय के गलत शब्दों पर रिएक्ट करते हुए जो रीढ़ की हड्डी दिखाई वो एक आइकॉनिक मूवमेंट है सालों बाद किसी टीवी पत्रकार ने ऐसा जवाब दिया है, …..एक समय था जब पत्रकारों की इज्जत हुआ करती थी लेकिन सोचने की बात ये है कि ये इज्जत खराब किसने की ?
2014 के बाद राष्ट्रवादी दल के नेताओं को उम्मीद थी कि मीडिया झुक जाएगा लेकिन मीडिया ने तो रेंगना शुरू कर दिया
आज हम 2026 में आ गए है आज घंटाकांड सामने आया है इसी शहर में 2019 में बल्लाकांड हुआ 2024 में इंदौर जिला कोर्ट में फैसला आया कि बल्ला खुद ब खुद चलकर आया और निगम अधिकारी को लगा
मीडिया जवाब दे कि उस वक्त कितने चैनल्स ने इस फैसले को कवर किया था ? और कैसे कवर किया था ?
अनुराग द्वारी को जो कहा गया वो कोई नई बात नहीं है ….’तुम्हारे जैसे चैनल ना पांच वोट बढ़ा सकते हैं, ना पांच वोट घटा सकते हैं। तुम्हारी यह हैसियत नहीं।’
कैलाश विजयवर्गीय ने सालों पहले टाइम्स नाऊ पर एक लाइव चल रही बहस में एंकर अर्नब गोस्वामी को यह शब्द कहे थे
और एक बात बताऊं, बिलकुल ठीक ही कहे थे…..


