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सुख-दुख

पिता जनार्दन ठाकुर भी बहुत बड़े पत्रकार थे, योग्य पिता के सुयोग्य पुत्र संकर्षण ठाकुर द टेलीग्राफ के तेजतर्रार संपादक थे!

संतोष भारतीय-

श्री संकर्षण ठाकुर का इस नश्वर दुनिया से जाना सिर्फ एक व्यक्ति का जाना नहीं है बल्कि पत्रकारिता के उस ज्वलंत पक्ष का जाना है जो अब यदा कदा ही दिखाई देता है। श्री संकर्षण ठाकुर के पिता श्री जनार्दन ठाकुर भी बहुत बड़े पत्रकार थे और उन्होंने 77 के बाद “ऑल द प्राइम मिनिस्टर्स मैन” नाम की पुस्तक लिखी थी जिसकी बहुत चर्चा हुई और वह आज भी पढ़ी जाती है।

योग्य पिता के सुयोग्य पुत्र संकर्षण ठाकुर द टेलीग्राफ के संपादक थे। टेलीग्राफ के पहले संपादक श्री एमजे अकबर थे। अकबर साहब में टेलीग्राफ को हिंदुस्तान के प्रथम श्रेणी के अंग्रेजी अखबारों में शामिल कर दिया था। संकर्षण ठाकुर श्री एमजे अकबर के सुयोग्य उत्तराधिकारी थे।

संकर्षण ठाकुर सिर्फ संपादक नहीं थे, वे बुनियादी तौर पर पत्रकार थे और उन्होंने जिन घटनाओं को रिपोर्ट किया है वह घटनाएं उनके लिखने के तरीके के कारण लोगों के दिमाग में स्थाई रूप से बस गई है। संकर्षण ठाकुर अंग्रेजी भाषा के जबरदस्त लेखक और पत्रकार थे। पत्रकारिता जगत में उनके प्रशंसक ही प्रशंसक हैं, आलोचक कोई नहीं।

नए पत्रकारों को आगे बढ़ाना और अपने अखबार के उन पत्रकारों का प्रोत्साहन करना जिन्होंने अच्छी रिपोर्ट लिखी है, आज के संपादकों को उनका तरीका सीखना चाहिए।

मैं कश्मीर गया था रिपोर्टिंग के लिए और अचानक एक आईपीएस अफसर शाम को मेरे होटल में आ गया और उसने कहा कि आपको कोई भी मदद चाहिए किसी भी तरह की जानकारी चाहिए तो आप मुझे ने बिना संकोच बताइए।

मैंने पूछा आप क्यों मेरी मदद करना चाहते हैं, उसने कहा मेरे पास संकर्षण ठाकुर का फोन आया है , उन्हें पता चला है कि आप कश्मीर आए हुए हैं तो उन्होंने मुझे कहा कि जितनी भी तरह की सहायता हो सकती है और जो मेरे दायरे में है मैं आपको उपलब्ध कराऊं।

मैंने संकर्षण ठाकुर को नहीं बताया था कि मैं कश्मीर जा रहा हूं। ऐसे थे संकर्षण ठाकुर उनसे कोई कहे या ना कहे लेकिन अगर वह किसी को पसंद करते हैं तो हर तरह से उसकी मदद के लिए खड़े हो जाते थे।

बहुत सारी यादें हैं, हम बहुत पुराने मित्र थे, बहुत सारी बातें करते थे। आज सुबह संकर्षण इस नश्वर दुनिया को छोड़ गए।

उन्हें श्रद्धांजलि किन शब्दों में दी जाए, समझ नहीं आ रहा। बस एक ही चीज समझ आ रही है कि जिस तरह की पत्रकारिता संकर्षण करते थे उस तरह की पत्रकारिता करने वालों के साथ मेरे जैसे लोगों को हमेशा खड़ा होना चाहिए। संकर्षण की याद को जिंदा रखने का मुझे यह तरीका समझ में आ रहा है।

अलविदा संकर्षण!


अभी-अभी मनीष ने बताया कि संकर्षण ठाकुर नहीं रहे. कुछ दिनों से कैंसर से जूझ रहे थे. संकर्षण लंबे अरसे से टेलीग्राफ अख़बार से जुड़े हुए थे. पत्रकारिता के क्षेत्र में संकर्षण का नाम सम्मान के साथ लिया जाता है. लालू और नीतीश पर उनकी किताब काफी पढ़ी जाती है. कई अंदरूनी घटनाओं की जानकारी उस किताब से मिलती है. कश्मीर पर भी उनका गंभीर काम है. टेलीग्राफ के पहले वे इंडियन एक्सप्रेस तथा तहलका के साथ भी जुड़े थे. पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट काम के लिये उन्हें ‘प्रेम भाटिया’ पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था. संकर्षण के पिता जी जनार्दन ठाकुर जी का नाम भी पत्रकारिता के क्षेत्र में बड़ा नाम है. वे अपनी किताब “All the Prime Minister’s Men” के लिए जाने जाते हैं। यह किताब 1977 में प्रकाशित हुई थी और इसमें उन्होंने भारत में आपातकाल के दौरान और उससे पहले के राजनीतिक घटनाक्रमों का बहुत गहरा से विश्लेषण किया था। मेरा सौभाग्य है कि पिता और पुत्र दोनों का स्नेह और सम्मान मुझे प्राप्त था. संकर्षण का विवाह मुंगेर में हुआ था. जनार्दन के निमंत्रण पर मैं भी उस विवाह में बाराती था. संकर्षण अक्सर पटना आते थे. कभी-कभी मेरे घर भी उनका जूठन गिरता था. पत्रकारिता के पतन के इस दौर में संकर्षण का चला जाना बहुत खल रहा है. मैं उनको अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ. -शिवानन्द तिवारी


अजीत अंजुम-

एक शानदार पत्रकार को श्रद्धांजलि. लोकसभा चुनाव के दौरान बनारस के एक होटल में संयोग से संकर्षण ठाकुर से ऐसी मुलाकात हुई थी . चुनाव को लेकर हम लोगों ने अपने अनुभव साझा किए थे . मैं उनसे जब भी मिलता था , यही पूछता था कि आप इतना बढ़िया कैसे लिखते हैं ? वो ठहाके लगाने लगते थे .
संकर्षण की शैली के मुरीदों की कमी नहीं है . हम तो वैसे भी हिंदी वाले हैं . अंग्रेजी वालों को उनकी लेखनी पर फ़िदा होते देखा है . पिछले कुछ सालों से संकर्षण कभी – कभी मेरे वीडियो देखकर कुछ पूछने के लिए फोन करते थे. अब कभी उनका फोन नहीं आएगा , न ही कभी मेरा फोन उठायेंगे .

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