दिग्विजय सिंह-
मैं अरुण यादव से सहमत हूँ उन्होंनें बहुत ही अहम सवाल उठाये हैं। यदि केंद्र सरकार की IT टीम नहीं आती तो यह पूरा प्रकरण दबा दिया जाता। अब भी प्रकरण को दबाने का पूरा प्रयास होगा। जो अरुण यादव जी ने सवाल उठाए हैं वो ED IT को संज्ञान में लेना चाहिए। निर्मला सीतारमण और ईडी से उम्मीद है वे किसी के दबाव में ना आ कर उन्हें दोषियों को दंडित करना चाहिए। माननीय मुख्य मंत्री जी एमपी आप निडर हो कर निष्पक्ष जांच में ED IT का सहयोग करें।



अरुण यादव-
आरक्षक सौरभ शर्मा के यहाँ रेड को लगभग एक हफ्ता हो गया है, अभी तक कुछ सवालों के जवाब नहीं मिले है।
1- 54 किलो सोना जो मिला वो 6 दिसंबर 2024 के पेपर में लिपटा मिला था, मतलब इतना सोना क्या हर महीने इधर से उधर होता था?
2- लोकायुक्त की कार्यवाही कैसे लीक हुई?
3- आईटी, लोकायुक्त एवं पुलिस सबके बयानों में भिन्नता क्यों है?
4- किसके प्लाट पर गाड़ी पकड़ाई, उस प्लाट मालिक को किसका संरक्षण था?
5- रेड में शिवराज सिंह के नए मकान के कागज कैसे मिले, आखिरकार यह “शिवराज” कौन है?
6- सौरभ शर्मा की जिस कार से रात को 2 बजे प्रशासनिक माफियाओं के भूखंडों से 54 किलो सोना, 10 करोड़ नगद और किसी महिला के सौंदर्य प्रसाधन की सामग्रियां मिली है, जबकि लोकायुक्त का छापा अलसुबह डल चुका था तो रात को 2 बजे तक यह कार दिन के उजालों में कहाँ से निकली जबकि सड़कों पर इस कार के घूमते हुए सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक हो चुके है, इस लिहाज से कार्यवाही के ही दौरान कार किस जगह से निकली तो जांच एजेंसियां कहाँ थी?
7- जिस थाने में कार की गुमशुदगी की एफआईआर लिखाने एक महिला पहुंची थी, उसकी रिपोर्ट लिखने के लिए पुलिस महकमे के किस अधिकारी ने थाने पर दवाब बनाया था?
8- पुलिस 6 घण्टे तक किसका इन्तिज़ार करती रही, क्या पुलिस ने रेड के लिए मना कर दिया था?
9- रातीबड़ के स्थानीय लोगों के हिसाब से 3 गाड़ियां थी, अब तक 2 गाड़ियां कहाँ है?
10- 18 वर्षों में सीएस परिवहन विभाग के एसीएस, पीएस, टीसी को जांच में शामिल क्यों नहीं किया गया है?
इन सभी वरिष्ठ अधिकारियों के देश – विदेश में अर्जित अकूत संपत्तियों की जांच कराई जाए एवं इन सभी के नियुक्तियां कराने में किस किसकी, क्या – क्या ईमानदार (?) मंशाएं थी उसका भी खुलासा हो।
11- इन सभी अधिकारियों के सीडीआर एवं उनके घरों के आसपास के कैमरा रिकॉर्डिंग को सरकार जनता के समाने लेकर आये।
12- सीएस अनुराग जैन एवं डीजीपी कैलाश मकवाना ईमानदार है तो भ्रष्टाचार पर कार्यवाही कर अपनी ईमानदारी का सबूत दे।
13- पूर्व एवं वर्तमान परिवहन विभाग के मंत्रियों के स्टाफ की सीडीआर को सरकार उजागर करे।
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