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उत्तर प्रदेश

शामली में ग्राउंड रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकार के साथ जो हुआ, उस पर इतना सन्नाटा क्यों है?

Mithilesh Dhar : शामली में एक पत्रकार के साथ जो हुआ उस पर इतना सन्नाटा क्यों है? क्योंकि वे जमीन पर पत्रकारिता करते हुए पीटा गया है, सोशल मीडिया पर बकैती करते हुए नहीं?

क्योंकि वो किसी जाति विशेष पर टिप्पणी नहीं करता था? क्योंकि शायद वह आईआईएमसी का छात्र नहीं रहा होगा?

क्योंकि वो शायद किसी पार्टी का अंधविरोधी नहीं रहा होगा?

आप बताइये, मेरी फ्रेंडलिस्ट में बहुत से ऐसे पत्रकार हैं जो प्रशांत के ट्वीट/फेसबुक पोस्ट को पत्रकारिता कह रहे थे, गिरफ्तारी को प्रेस की आजादी का हनन कह रहे थे, वे बताएं कि अमित शर्मा को पीटे जाने पर कोई हैशटैग क्यों नहीं ट्रेंड कर रहा है?

एसी में बैठकर पत्रकारिता करने वाले पत्रकार लामबंद क्यों नहीं हो पा रहे? क्यों वे नई दिल्ली में मार्च नहीं निकाल रहे?

Rajendra Singh : पत्रकारों को यूपी में चल रहे राम राज्य में पीटा जा रहा है, मुँह पर पेशाब की जा रही है।

Ambrish Kumar : पत्रकार संगठन भी तो हैं देश में. कवरेज करने वाले को पीटा जाएगा तो भी खामोश रहेंगे?

Mahendra Mishra : पेशाब तो पी लिए. अब मैला खाना बाकी रह गया है. पांच सालों की गोदी पत्रकारिता का यही हासिल है.

सौजन्य : फेसबुक


मूल खबर….

यूपी में जंगलराज : डिबेट करने के ‘जुर्म’ में एंकर गिरफ्तार, कवरेज करने के ‘जुर्म’ में रिपोर्टर को पीट कर पेशाब पिलाया

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