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दिल्ली

क्या फिर से राज्यपाल बनने की जुगाड़ बैठा रही हैं शीला दीक्षित

कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री केरल की पूर्व राज्यपाल व दिल्ली पर अधिक समय तक सत्ता की बागडोर सम्भालने वाली दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने एक ऐसा बयान दिया जिससे दिल्ली के सियासत में एक नया मोड़ ही नहीं आया वरन कई सवाल भी खड़े कर दिए. इस समय कांग्रेस की हालत बेहद खराब हैं, आम आदमी पार्टी चुनाव की तैयारी कर रही हैं तथा दिल्ली के उपराज्यपाल से ये बार-बार मांग भी कर रही हैं कि दिल्ली में जल्द से जल्द विधानसभा चुनाव की घोषणा हो. वहीं बीजेपी इस समय दिल्ली में चुनाव कराने से पीछे हट रही हैं और सरकार बनाने के निमंत्रण का इंतजार कर रही हैं.

कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री केरल की पूर्व राज्यपाल व दिल्ली पर अधिक समय तक सत्ता की बागडोर सम्भालने वाली दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने एक ऐसा बयान दिया जिससे दिल्ली के सियासत में एक नया मोड़ ही नहीं आया वरन कई सवाल भी खड़े कर दिए. इस समय कांग्रेस की हालत बेहद खराब हैं, आम आदमी पार्टी चुनाव की तैयारी कर रही हैं तथा दिल्ली के उपराज्यपाल से ये बार-बार मांग भी कर रही हैं कि दिल्ली में जल्द से जल्द विधानसभा चुनाव की घोषणा हो. वहीं बीजेपी इस समय दिल्ली में चुनाव कराने से पीछे हट रही हैं और सरकार बनाने के निमंत्रण का इंतजार कर रही हैं.

बहरहाल, अगर बात शीला दीक्षित के बयान की करे तो एक ऐसा बयान जिसने भारत के सभी राजनीतिक पार्टियों में ही नहीं, वरन मीडिया जगत में भी इस बयान को लेकर हलचल बढ़ गई. आखिर शीला दीक्षित ने भाजपा के दिल्ली में सरकार बनाने के पक्ष में बयान क्यों दिया? कांग्रेस की पूर्व मुख्यमंत्री के इस बयान को दिल्ली में सरकार बनाने के परिपेक्ष्य तक सीमित रखा जाए या इस बयान का कांग्रेस पार्टी के भीतर भी कुछ असर पढ़ता हैं. जाहिर हैं कि शीला के इस बयान ने कांग्रेस में खलबली मचा दी हैं और उन्हें पार्टी से निष्कासित करने की मांग भी उठने लगी हैं हालांकि कांग्रेस के आला नेताओं ने इस बयान को शीला की निजी राय बता के खारिज कर दिया.

वहीं आम आदमी पार्टी ने इसे भाजपा अध्यक्ष से बयान के साथ जोड़ के देख रही हैं. अगर इस बयान को अमित शाह के बयान के साथ जोड़ कर देखा जाए तो लगता तो यही हैं कि शीला कहीं न कहीं शाह की ही भाषा बोल रही हैं. यही कारण हैं कि भाजपा इस बयान का तहे दिल से स्वागत किया हैं. और शीला दीक्षित को राजनीतिक परिपक्वता प्रमाण-पत्र भी दिया हैं. यहाँ एक सवाल उठता हैं कि क्या शीला इस बयान से  भाजपा और अपने बीच की दूरियां खत्म करना चाहती हैं?

ये सवाल इसलिए क्योंकि हाल ही शीला गृहमंत्री से मिलती हैं और उसके बाद केरल के राज्यपाल पद से इस्तीफा अपने मन से देती हैं, फिर ये भाजपा के पक्ष में बयान, अपने राजनीतिक जीवन का लगभग चार दशक पूरा करने के बाद आखिर शीला दीक्षित भाजपा से कोई उम्मीद तो नहीं कर रही, इस बात को इसलिए नजरअंदाज नही किया जा सकता क्योंकि भारत की राजनीति में कब किस को छोड़ कर किसका दामन थाम ले इसका अनुमान लगाना बेहद ही कठिन हैं, क्या अपनी आगे की राजनीतिक जीवन शीला दीक्षित की राजभवन गुजारने की तो नहीं सोच रही, गौरतलब हैं कि हर राजनीतिक व्यक्ति अपने राजनीति का सुखद अन्त करना चाहता हैं.

अगर हम ये कहें कि शीला भविष्य को देखते हुए अपनी निजी स्वार्थ को साधने के लिए इस बयान को दिया हैं तो इसमें तनिक भी अतिशयोक्ति नहीं होगी. वो जानती हैं कांग्रेस की जमीन खिसक रही हैं, जनता कांग्रेस से नाराज है इसका प्रमाण अभी हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव हैं. जिसमे पार्टी को भरी नुकसान हुआ हैं, तथा पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने कांग्रेस को छोड़ा भी तो कई ने पार्टी के विरोध में बयान भी दिए हैं, अभी दिग्विजय सिंह जैसे सरीखे कांग्रेसी ने भी मोदी की तारिफ में कसीदे पढ़े हैं, जो अपने आप में कांग्रेस की मनोदशा को दर्शाता हैं.

शीला राजभवन से लौटी हैं और फिर राजभवन जाने के लिए नये अवसर की तलाश कर रही हैं.

 

आदर्श तिवारी, देवरिया। संपर्कः [email protected]

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