अश्विनी कुमार श्रीवास्तव-
कानपुर में लैंबोर्गिनी केस में अरबपति कारोबारी के बेटे शिवम मिश्रा को हिरासत और तत्काल जमानत तो मिली ही है, खुलेआम कानून के loopholes और पैसे की ताकत पर किसी और को उस दुर्घटना का दोषी भी ठहराए जाने की कोशिश हो रही है।
भारत में कानून और अदालत के साथ जब तक पैसे वाले, रसूख वाले और ताकतवर लोग इसी तरह की राहत लेने में कामयाब रहेंगे, तब तक शायद ही कभी हमारे देश में कमजोर या गरीब आदमी को संविधान/ कानून/ न्याय पर पूरा भरोसा कायम हो पाएगा।
विकसित देशों में कानून अपना काम करता है और फिर चाहे किसी ताकतवर धनकुबेर का मामला हो या सत्ता में बैठे राजनेता का, सजा सभी को भुगतनी पड़ती है। शिवम मिश्रा जिस आसानी से दुर्घटना करके पैसे की ताकत से बिना सजा काटे छूटेगा, उतनी ही आसानी से वह अपने जीवन में खुद या अपने परिजनों को कानून से खिलवाड़ करने के अगले मामले में इन्वॉल्व करेगा।
हौसला इसी तरह बढ़ते बढ़ते संगीन अपराध तक चला जाये, यह भी सम्भव है। बहरहाल, 14 करोड़ की लैंबोर्गिनी से चलना और इसीलिए किसी भी अपराध के बाद कानून से आसानी से राहत पा लेना, किसी भी देश के कानून और संविधान के लिए शर्म की बात है।
विवेक त्रिपाठी-
लैंबॉर्गिनी वाला शिवम मिश्रा गिरफ्तार हो गया है.. अरबपति तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा का बेटा है.. चांदी का चम्मच मुंह में लेकर पैदा हुआ तो कानून को अपने ड्राइंग रूम की दीवार पर टंगा सस्ता सा शोपीस समझ लिया था..
कानपुर पुलिस ने आज अपना इकबाल दिखा दिया और “ब्लू आईड बॉय” के पापा को जता दिया कि कानून से ऊपर कुछ भी नहीं..
अब कानपुर पुलिस को लैंबॉर्गिनी कार चलाने की फर्जी थ्योरी गढ़ने वाले मोहन समेत अन्य लोगों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए..
राजेश साहू-
कानपुर में तेज रफ्तार लेम्बोर्गिनी से 6 लोगों को टक्कर मारने वाला अरबपति कारोबारी का इकलौता बेटा आखिरकार गिरफ्तार हो गया। तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा ने अपने बेटे को बचाने की तमाम कोशिश कीं, लेकिन नाकाम रहीं।
पहले घटनास्थल से बेटे को हटवाया, फिर कहा कि मेरा बेटा गाड़ी नहीं चला रहा था। पुलिस को मैनेज करने की कोशिश की गई, लेकिन मामला सीएम योगी तक पहुंच गया। जब यह पैतरा एक्सपोज हो गया तो पुलिस कमिश्नर को ही झूठा करार दिया।
फिर अचानक मंगलवार को कोर्ट में नकली ड्राइवर को सरेंडर करवा दिया। हालांकि, कोर्ट ने ड्राइवर मोहन की अर्जी खारिज कर दी और उसे आरोपी नहीं माना।
पुलिस का कहना है कि शिवम को आर्यनगर में घर के सामने से गिरफ्तार किया गया। इस दौरान आरोपी बीमार नजर आया। उसके हाथ में वीगो लगा है। पुलिसवाले और रिश्तेदार उसे सहारा देते नजर आए।
9 फरवरी को हुआ क्या था, पूरा प्रकरण जानिए..
कानपुर की सड़कों पर तंबाकू व्यापारी के बेटे शिवम मिश्रा ने लेम्बोर्गिनी कार से तांडव कर दिया, नशे में धुत शिवम ने कार, ऐसे चलाई, जैसे सड़क भी, उसके बाप की है, बुलेट सवार को पीछे से टक्कर मार दी, जिससे बुलेट पर सवार तीन लोग बुरी तरह से घायल हो गये, जिसके बाद लेम्बोर्गिनी डिवाइडर में घुसा दी, ग्वालटोली थाना पुलिस कार ले गई तो, कार को वीवीआईपी सुरक्षा में रखा गया, घटना रविवार की है, जो चर्चा का विषय बनी हुई थी…
पहले तो शिवम् मिश्रा के कारोबारी बाप ने पैसे के दम पर अपने ड्राईवर मोहन को बलि का बकरा बनाने की कोशिश की लेकिन कल कोर्ट ने मोहन को आरोपी मानने से इन्कार कर दिया, ड्राईवर मोहन मालिक शिवम् मिश्रा के लिए कुर्बानी देने की कोशिश किया लेकिन कोशिश फेल हो गई। जिसके बाद तमाम दबाव पड़ने पर कानपुर पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी की है।


