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बाबाओं के बढ़ते कंपटीशन में श्रीश्री रविशंकर जैसों को विज्ञापन का सहारा लेना पड़ रहा!

आध्यात्मिक गुरु Sri Sri Ravi Shankar एक बार फिर सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं, लेकिन इस बार वजह उनका कोई प्रवचन नहीं, बल्कि प्रमोशनल पोस्ट है।

हाल ही में उनकी एक पोस्ट यूजर्स की फीड में “Ad” टैग के साथ दिखाई दी, जिसके बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कई यूजर्स ने सवाल उठाया कि जिन व्यक्तित्वों की लोकप्रियता इतनी व्यापक मानी जाती है, उन्हें अब अपने कंटेंट के प्रमोशन के लिए पेड विज्ञापनों का सहारा क्यों लेना पड़ रहा है।

कुछ यूजर्स ने इसे डिजिटल दौर की रणनीति बताया, जहां ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचने के लिए विज्ञापन एक आम तरीका बन चुका है। वहीं, आलोचकों ने तंज कसते हुए कहा कि आध्यात्मिक बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के चलते अब प्रचार के नए तरीके अपनाने पड़ रहे हैं।

गौरतलब है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर “Ad” टैग का मतलब होता है कि पोस्ट को प्रमोट किया गया है, ताकि वह ज्यादा यूजर्स तक पहुंचे। हालांकि, इसे लेकर बहस छिड़ गई है कि क्या आध्यात्मिक या सार्वजनिक जीवन से जुड़े बड़े नामों को भी अब इसी रास्ते पर चलना पड़ रहा है।

फिलहाल, यह मुद्दा सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है—जहां कुछ लोग इसे सामान्य मार्केटिंग मान रहे हैं, तो कुछ इसे बदलते समय का संकेत बता रहे हैं।


मैंने सोचा जिन लोगों के प्रति रत्ती भर झुकाव नहीं उनकी पोस्ट क्यों दिख रही!
सोचा जा कर ब्लॉक कर आऊँ। फिर कोने में नज़र आया “Ad”
अब इन्हें ये दिन देखना पड़ रहा की अपना प्रचार-प्रसार Ad से करवाना पड़ रहा!
मार्केट में इतने “बाबा” उतर आए हैं! कंपटीशन टफ हो गया होगा और धंधा शायद मंदा होगा! -प्रियंका भारती, प्रवक्ता आरजेडी

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