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वरिष्ठ पत्रकार सिद्धार्थ वरदराजन और करण थापर पर राजद्रोह का शिकंजा, गुवाहाटी पुलिस ने किया तलब! प्रेस संगठनों ने कहा- हमला है प्रेस की आज़ादी पर!

गुवाहाटी पुलिस ने वरिष्ठ पत्रकार सिद्धार्थ वरदराजन (The Wire के संस्थापक-संपादक) और चर्चित टीवी इंटरव्यूअर करण थापर को राजद्रोह के मामले में तलब किया है। दोनों को 22 अगस्त को गुवाहाटी पुलिस की क्राइम ब्रांच के सामने पेश होने का आदेश दिया गया है।

मामला असम में दर्ज एक एफआईआर से जुड़ा बताया जा रहा है, हालांकि पुलिस ने अब तक न तो एफआईआर की कॉपी सार्वजनिक की है और न ही आरोपों का ब्योरा दिया है।

पत्रकारों पर इस कार्रवाई को लेकर देशभर के पत्रकार संगठन सामने आए हैं। मुंबई प्रेस क्लब और प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने इसे प्रेस की आज़ादी पर हमला बताया और कहा कि सरकार आलोचनात्मक रिपोर्टिंग को दबाने के लिए राजद्रोह जैसे औज़ार का इस्तेमाल कर रही है।

गौरतलब है कि कुछ ही दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर प्रकाशित एक लेख को लेकर असम में दर्ज केस में सिद्धार्थ वरदराजन को दमनात्मक कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की थी।

अदालत ने साथ ही भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 152 की संवैधानिक वैधता पर भी नोटिस जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा था कि पत्रकारों के लेख या वीडियो को पहली नज़र में राजद्रोह नहीं माना जा सकता और हिरासत में पूछताछ की ज़रूरत नहीं है।

इसके बावजूद गुवाहाटी पुलिस का यह ताज़ा कदम पत्रकारों पर लगातार बढ़ते दबाव और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर मंडराते ख़तरे को और गहरा करता दिख रहा है।

जिन्होंने देश को ग़ुलाम बनानेवालों का साथ निभाया
अब उन मुख़बिरों ने वतनपरस्तों पर इल्ज़ाम लगाया!

भाजपा ने भारत के अंतरराष्ट्रीय ख्याति के पत्रकारों पर राजद्रोह लगाकर अपने को बेहद कमज़ोर साबित कर दिया है।

निंदनीय!

-अखिलेश यादव, पूर्व मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश

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