अनिल जैन-
दैनिक भास्कर ने अपने यहां छपी ‘घर-घर सिंदूर पहुंचाने’ वाली खबर को लेकर जो स्पष्टीकरण छापा है, उसे कई लोगों ने अपनी वाल पर यह कहते हुए लगाया है कि भास्कर ने माफी मांग ली। लेकिन यह बात सही नहीं है।
भास्कर के इस स्पष्टीकरण में माफी शब्द का कहीं इस्तेमाल नहीं हुआ है। दरअसल अखबार ने अपनी इस चूक के लिए खेद व्यक्त किया है कि भाजपा द्वारा घर-घर सिंदूर पहुंचाने वाली उसकी खबर में भाजपा का आधिकारिक वक्तव्य शामिल नहीं किया गया। यानी भास्कर ने अपनी खबर को गलत नहीं माना है, क्योंकि खबर गलत थी भी नहीं।
दरअसल भाजपा में बाकायदा घर-घर सिंदूर पहुंचाने का कार्यक्रम तय हुआ था और इसका ऐलान करने के लिए पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा 2 जून को प्रेस कांफ्रेन्स करने वाले थे। लेकिन चूंकि भाजपा कवर करने वाले भास्कर संवाददाता के भाजपा के कई बड़े नेताओं से करीबी रिश्ते हैं, लिहाजा उसे इस बात की जानकारी पहले ही मिल गई और उसने खबर छाप दी। खबर छपने के बाद दो दिन तक भाजपा के तमाम प्रवक्ता भी टीवी चैनलों पर अपनी पार्टी के इस प्रस्ताविक कार्यक्रम के पक्ष में दलीलें देते रहे।
हालांकि सोशल मीडिया पर लोग प्रधानमंत्री मोदी की पत्नी जसोदा बेन का फोटो लगा कर भाजपा के इस कार्यक्रम पर सवाल उठा रहे थे लेकिन तीसरे दिन जब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस कार्यक्रम को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री मोदी के निजी जीवन को लेकर टिप्पणी की तो भाजपा को लगा कि उसका यह ‘सिंदूर खेला’ उसे भारी पड़ सकता है।
लेकिन तब भी भाजपा ने अपने किसी वरिष्ठ पदाधिकारी से नहीं बल्कि पार्टी के आईटी सेल के उस बदनाम प्रभारी से भास्कर में छपी खबर का खंडन कराया जिसकी कोई आधिकारिक हैसियत नहीं है। लेकिन भास्कर ने उसके खंडन वाले ट्वीट से घबरा कर लंबा चौड़ा स्पष्टीकरण छाप दिया। ऐसा करके भास्कर प्रबंधन ने अपने दब्बूपन का ही परिचय दिया।
कायदे से तो भास्कर को अपनी खबर पर कायम रहना चाहिए था और भाजपा के किसी पदाधिकारी या उसके मीडिया विभाग के प्रभारी की प्रतिक्रिया का इंतजार करना था। लेकिन लगता है भास्कर प्रबंधन को चार साल पहले अपने यहां पड़ा आयकर विभाग का छापा याद आ गया होगा और उसे लगा होगा कि कहीं उसके कारोबार के ‘सिंदूर खेला’ न हो जाए!
यहाँ मैं प्रबंधन की बात इसलिए कर रहा हूँ, क्योंकि कुछ अपवादों को छोड़ भास्कर सहित सभी अखबारों में अब ऐसे मामलों में संपादक की कोई निर्णायक भूमिका नहीं होती है, सब कुछ प्रबंधन ही तय करता है।
देखें खबर का खंडन…

जिस खबर पर हुआ बवाल…

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sanjay saxena
June 5, 2025 at 4:27 am
आप को लगता है पत्रकारिता के एथिक्स की जानकारी नहीं है. अखबार ने जिसे अपनी चूक बताया है,दरअसल वह निष्पक्ष पत्रकारिता के खिलाफ है। इसके लिए खेद व्यक्त करने के अलावा और कोई शब्द इस्तेमाल हो ही नहीं हो सकता।