
नरेंद्र नीरव-
सोनभद्र के प्रतिष्ठित अन्वेषी साहित्यकार डॉ जितेंद्र कुमार सिंह ‘संजय’ की पुस्तक ‘सोनभद्र का इतिहास’ का लोकार्पण भव्य समारोह में हुआ। रावर्ट्सगंज के होटल डीआर ड्रीम्स लग्ज़री बैंक्वेट में दोपहर १२ बजे से २३ जनवरी २०२६ को समारोह प्रारंभ हुआ।
श्री रघुनाथ मंदिर, देवगढ़ तीर्थक्षेत्र न्यास के प्रधान संरक्षक डॉ सरजीत सिंह ढंग द्वारा प्रेषित निमंत्रण-पत्र के अनुसार आयोजन में सर्वश्री महंत डॉ योगानंद गिरि जी महाराज, अवधूत कर्मवीर राम, रमाशंकर पांडेय विकल अजयशेखर, डॉ शंभूनाथ त्रिपाठी ‘अंशुल’, पारसनाथ मिश्र, रामनाथ ‘शिवेंद्र’, नरेंद्र नीरव, डॉ रचना तिवारी, ईश्वर विरागी, कमलेश ‘ राजहंस’, अशोक ललित ‘महेंद्रू’, डॉ हीरालाल पांडेय, ब्रजदेव पांडेय, डॉ अनुज प्रताप सिंह, डॉ अर्जुन दास केसरी, गणेश ‘गंभीर,’ जगदीश ‘पंथी’, राजेंद्र त्रिपाठी,’लल्लू तिवारी’ ओम प्रकाश त्रिपाठी, डा. लखन राम ‘जंगली’, हरिदर्शन सांख्य उपस्थित रहे।


अध्यक्षता पद्मश्री अभिराज राजेंद्र मिश्र, मुख्य अतिथि श्री अरुण कुमार उपाध्याय, अति विशिष्ट अतिथि श्री योगेश्वर राम मिश्र आई.ए.एस., तथा विशिष्ट अतिथि सर्वश्री श्याम नारायण ‘विनीत सिंह’, (सदस्य विधान परिषद) ,भूपेश चौबे (विधायक), डा.अनिल कुमार सिंह (विधायक), श्रीमती रूबी प्रसाद (अध्यक्ष, नगरपालिका परिषद रावर्ट्सगंज), श्री बद्रीनाथ सिंह आई.ए.एस.(जिलाधिकारी, सोनभद्र) श्री अभिषेक वर्मा आई.पी.एस. (पुलिस अधीक्षक, सोनभद्र) उपस्थित रहेंगे।श्री बद्रीनाथ सिंह आई.ए. एस. ने पुस्तक ‘सोनभद्र का इतिहास’ का संपादन किया है।
कृतिकार डा. जितेंद्र कुमार सिंह ‘संजय’ की पुस्तकें कुंडवासिनी स्तोत्र, कुंडवासिनी, साहित्यकार द्विवेदी दंपति, बघेल वंश के चार कवि रत्न, भारतीय भाषा साहित्य और छंद की भूमिका,हिंदीकवि और काव्यालोचक: शास्त्रीय अवधारणा और व्यवहारिक स्वरूप, पुष्कर, प्रणम्य सोनभद्र, प्रसन्न सोनभद्र, सोनभद्र का समाज, संस्कृति शिला पर उत्कीर्ण रचनायें, श्री राम की अयोध्या, आदि प्रकाशित और चर्चित हैं। वे अनेक पुरस्कारों से विभिन्न प्रदेशों में सम्मानित हो चुके हैं। उनके सतत लेखन और अन्वेषण के लिये बधाई तथा यशोमय भविष्य की हार्दिक शुभकामनायें।
जितेंद्र कुमार सिंह-
‘सोनभद्र का इतिहास’ का लोकार्पण समारोह सम्पन्न
वसन्त पंचमी के पावन अवसर पर श्रीरघुनाथ-मन्दिर देवगढ़ तीर्थक्षेत्र न्यास के तत्वावधान में मेरी पुस्तक ‘सोनभद्र का इतिहास’ के द्वितीय संशोधित-परिवर्द्धित संस्करण का लोकार्पण सोल्लास सम्पन्न हुआ। रॉबर्ट्सगंज के होटल डी.आर. ड्रीम्स लग्जरी बैंक्वेट में आयोजित इस भव्य समारोह के सभाध्यक्ष पूर्वकुलपति पद्मश्री अभिराजराजेन्द्र मिश्र, मुख्य अतिथि ओडिशा के पूर्व डी.डी.पी. महामहोपाध्याय अरुणकुमार उपाध्याय, अतिविशिष्ट अतिथि पूर्व आयुक्त योगेश्वरराम मिश्र, विशिष्ट अतिथि के रूप में पूर्व डी.आई.जी. डॉ. धर्मवीर सिंह, नगरपालिका अध्यक्ष श्रीमती रूबीप्रसाद, राजा चन्द्रविक्रमपद्मशरण शाह, युवराज देवांशब्रह्म जी की उपस्थिति रही।
सरस्वती प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीपप्रज्ज्वलन से प्रारम्भ हुए इस समारोह सर्वप्रथम ग्रन्थकार डॉ. जितेन्द्रकुमार सिंह ‘संजय’ ने सोनभद्र के गौरवपूर्ण इतिहास को विस्तारपूर्वक रेखांकित करते हुए इतिहास के औचित्य पर प्रकाश डाला। उत्तरप्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. सरजीत सिंह डंग ने सोनभद्र को प्राचीनता और आधुनिकता का संगम बताते हुए ‘सोनभद्र का इतिहास’ के वैशिष्ट्य को रेखांकित किया।
‘सोनभद्र का इतिहास’ के सम्पादक एवं सोनभद्र के ज़िलाधिकारी श्री बद्रीनाथ सिंह ने सोनभद्र को मानवता के इतिहास का साक्षी बताते हुए सलखन के जीवाश्म, अगोरी, विजयगढ़, शिवद्वार, गोठानी, नलराजा आदि के प्रामणिक इतिहास को रेखांकित किया। ज़िलाधिकारी ने कहा कि डॉ. जितेन्द्रकुमार सिंह ‘संजय’ ने ‘सोनभद्र का इतिहास’ लिखकर एक बहुत बड़े अभाव की पूर्ति की है।
पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा ने ग्रन्थकार डॉ. जितेन्द्र के सारस्वत श्रम की भूरि भूरि प्रशंसा की। पूर्व डी.आई.जी. डॉ. धर्मवीर सिंह ने ‘सोनभद्र का इतिहास’ के लेखन के लिए डॉ. संजय को हार्दिक बधाई दी।
विन्ध्याचल मण्डल के पूर्व आयुक्त एवं उत्तरप्रदेश राज्य लोकसेवा अधिकरण के प्रशसनिक सदस्य श्री योगेश्वरराम मिश्र ने मिर्ज़ापुर और सोनभद्र के अन्योन्याश्रित सम्बन्ध को रेखांकित करते हुए इस धरती को ज्ञान, वैराग्य और भक्ति की त्रिवेणी कहा।
विजयगढ़ के राजा चन्द्रविक्रमपद्मशरण शाह ने इस ग्रन्थ के प्रकाशन और लेखन के औचित्य पर प्रकाश डाला। नगरपालिका परिषद् रॉबर्ट्सगंज की अध्यक्ष श्रीमती रूबीप्रसाद ने सोनभद्र के आधुनिक सन्दर्भों को रेखांकित किया। मुख्य अतिथि महामहोपाध्याय अरुणकुमार उपाध्याय ने ग्रन्थकार संजय की भारतीय दृष्टि को रेखांकित करते इस ग्रन्थ को न केवल सोनभद्र के सन्दर्भ में, अपितु सम्पूर्ण भारतीय सन्दर्भ में भी आवश्यक बताया।
सभाध्यक्ष पद्मश्री प्रो. अभिराजराजेन्द्र मिश्र ने महीयसी प्रभा सिंह का स्मरण करते हुए डॉ. जितेन्द्र के विशाल वाङ्मय की प्ररोचना करते हुए कहा कि निष्पक्ष न्यायाधीश की तरह रागद्वेष से मुक्त होकर डॉ. जितेन्द्रकुमार सिंह ‘संजय’ ने सोनभद्र का इतिहास लिखा है। इस ग्रन्थ की जितनी प्रशंसा की जाय, कम है।
कन्तित राज विजयपुर परिवार के सदस्य बाबू गोविन्दप्रसाद सिंह, बाबू देवराज सिंह, बाबू राजेश सिंह, बाबू देवेशप्रताप सिंह, बाबू योगेशबहादुर, बाबू जैनेन्द्र सिंह, बाबू सुधीर सिंह ने समन्वित रूप से डॉ. जितेन्द्रकुमार सिंह ‘संजय’ को सम्मानित किया।
आंग्ल सेनापति कर्नल जेम्स स्कीनर की छठीं पीढ़ी के उत्तराधिकारी, प्रख्यात कला-समीक्षक अशोक ललित महेन्द्रू (मसूरी), प्रख्तात चित्रकार हरिदर्शन सांख्य (ऋषिकेश), मानस-मर्मज्ञ डॉ. कृष्णमणि चतुर्वेदी ‘मैत्रेय’ (सुल्तानपुर), अवधूत बाबा करमवीरराम जी, प्रख्यात साहित्यकार रामनाथ शिवेन्द्र, गीतकार ईश्वर ‘विरागी’, राष्ट्रपति-राज्यपाल पदक प्राप्त शिक्षाविद् ओमप्रकाश त्रिपाठी, कविवर अमरनाथ ‘अजेय’, वरिष्ठ पत्रकार राहुल श्रीवास्तव, वरिष्ठ पत्रकार विजयशंकर चतुर्वेदी, डॉ. लखनराम जंगली, कविश्री प्रद्युम्नकुमार तिवारी ‘पद्म’, कविवर अशोक तिवारी, श्री राकेश त्रिपाठी ‘शिशु’, प्राचार्य डॉ. गोपाल सिंह, बाबू शीतलाप्रसाद सिंह, कवयित्री कौशल्याकुमारी चौहान, ए.डी.एम. श्री वागीश कुमार शुक्ल, सी.एम.ओ. डॉ. पी.के. राय, डी.डी.ओ. हेमन्तकुमार सिंह, समाज कल्याण अधिकारी ज्ञानेन्द्र सिंह भदौरिया, पी.डी. श्रवण राय, ज़िला पंचायत राज अधिकारी श्रीमती नमिताशरण, बी.एस.एस. मुकुल आनन्द पाण्डेय, अपर ज़िला सूचना अधिकारी श्री विनयकुमार सिंह, ज़िला पर्यटन अधिकारी डॉ. राजेश भारती प्रभृति की गरिमापूर्ण उपस्थिति रही।
इस अवसर पर अगोरी, बड़हर, विजयगढ़, सिंगरौली, कन्तित, विजयपुर एवं माण्डा रियासत के प्रमुख ठिकानेदारों, ताल्लुक़ेदारों के अतिरिक्त हज़ारों की संख्या में सुधी श्रोता उपस्थित थे। समारोह का काव्यात्मक संचालन पूर्वांचल के गौरव कविवर राजेन्द्र त्रिपाठी उपाख्य लल्लू तिवारी ने किया। समारोह को सफल बनाने में आदरणीय अग्रज बाबू अरविन्द सिंह ‘स्वामी अन्तरहंस’ (सिरविट), बाबू राजेश सिंह राष्ट्रवादी (बैधा-गढ़वा), बाबू मुन्ना सिंह (मण्डल अध्यक्ष, श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना), बाबू रमेश सिंह (पकरी), प्रिय अनुज बाबू प्रभात सिंह चन्देल, ज्ञानेन्द्र सिंह ‘बृजेश’, धर्मेन्द्र सिंह ‘राजेश’, बाबू सर्वेन्द्र सिंह (बकौली), बाबू सत्यप्रताप सिंह (छतेहरी), बाबू मनीषप्रताप सिंह (बघनार), बाबू रोहित सिंह चन्देल (सिरविट), बाबू रामनारायण सिंह (सिद्धी), आदि की भूमिका सराहनीय रही है।



