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सुदर्शन न्यूज चैनल से राजीव शर्मा, आलोक नंदन, योगेश गुलाटी और राय तपन भारती समेत कई मीडियाकर्मी कार्यमुक्त

सुदर्शन न्यूज चैनल से खबर है कि यहां कार्यरत चार सीनियर्स के साथ लगभग दो दर्जन कर्मचारियों को चैनल से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है. बाहर किए गए लोगों में ज्यादातर लोग वही हैं जिन्हें मैनेजिंग एडिटर नवीन पाण्डेय ने नियुक्त किया था. यह बात अलग है कि उनमें से कईयों को ऑफर या अपाइंमेंट लेटर भी नहीं दिए गए थे. कर्मचारियों को चैनल से बाहर करने का काम मालिक सुरेश चव्हाणके ने आरपी सिंह नाम के सीओओ के हाथों करवाया. यह वही आरपी सिंह हैं जिन्हें खुद सुरेश चव्हाणके ने करीब छह महीने पहले निकाल दिया था. उस वक्त चैनल नोएडा के सेक्टर चार से संचालित होता था. फिलहाल जिन लोगों का कार्यमुक्त किया गया है, उनमें राजीव शर्मा, आलोक नंदन, योगेश गुलाटी और राय तपन भारती हैं.  इसके अलावा आउटपुट-इनपुट के शिफ्ट इंचार्जों समेत कई कर्मचारी बाहर किए गए हैं.

सुदर्शन न्यूज चैनल से खबर है कि यहां कार्यरत चार सीनियर्स के साथ लगभग दो दर्जन कर्मचारियों को चैनल से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है. बाहर किए गए लोगों में ज्यादातर लोग वही हैं जिन्हें मैनेजिंग एडिटर नवीन पाण्डेय ने नियुक्त किया था. यह बात अलग है कि उनमें से कईयों को ऑफर या अपाइंमेंट लेटर भी नहीं दिए गए थे. कर्मचारियों को चैनल से बाहर करने का काम मालिक सुरेश चव्हाणके ने आरपी सिंह नाम के सीओओ के हाथों करवाया. यह वही आरपी सिंह हैं जिन्हें खुद सुरेश चव्हाणके ने करीब छह महीने पहले निकाल दिया था. उस वक्त चैनल नोएडा के सेक्टर चार से संचालित होता था. फिलहाल जिन लोगों का कार्यमुक्त किया गया है, उनमें राजीव शर्मा, आलोक नंदन, योगेश गुलाटी और राय तपन भारती हैं.  इसके अलावा आउटपुट-इनपुट के शिफ्ट इंचार्जों समेत कई कर्मचारी बाहर किए गए हैं.

उल्लेखनीय है कि कुछ दिनों पहले सुदर्शन न्यूज चैनल के न्यूज रूम में पीसीआर के इंचार्ज निर्भय और नोएडा के रिपोर्टर राकेश पाण्डेय ने योगेश गुलाटी और नवीन पाण्डेय के साथ मारपीट की थी. मामला पुलिस तक भी पहुंचा था. पीसीआर और इलाके के दारोगा भी दलबल के साथ सुदर्शन चैनल में घण्टों बैठे रहे थे. उस समय से ही ये तय माना जा रहा था कि कई लोगों की विदाई हो कर रहेगी क्यों कि निर्भय और राकेश पाण्डेय की तरफ से सुरेश चव्हाणके के भाई रामदास चव्हाणके ने मोर्चा संभाल लिया था. बताया जा रहा है कि चैनल आर्थिक संकट में है. सुरेश चव्हाणके ने केंद्र में खुद को मंत्री बनाए जाने से संबंधित खबर अपने चैनल पर प्रमुखता से दिखाई थी लेकिन यह खबर सफेद झूठ साबित हुई.  जिन वरिष्ठों को चैनल से हटाया गया है उन्हें पहले आधी सेलरी में काम करने के लिए कहा गया. इसके बाद सभी ने इस्तीफा दे दिया. सुदर्शन न्यूज चैनल इस घटनाक्रम के बाद से काम करने के लिहाज से मीडियाकर्मियों के लिए बेहद असुरक्षित जगहों में से एक हो चुका है.  

आपको भी कुछ कहना-बताना है? हां… तो [email protected] पर मेल करें.

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
2 Comments

2 Comments

  1. akash

    July 24, 2014 at 9:35 am

    ye vo channel hai jo kisi ko kuch de nahi sakta ulta leta hai ki bussiness do jab channel chal bhi nahi raha tha tabhi yahi kam tha aur ab channel on air hai tab bhi yahi kam hai inke malik bhi isi kam me lipt hai maine bhi apna 4 sal ka samay inke jsie lollypop walo ko dekar gujar diya bache in jaise channel walo se log

  2. Ranjan singh

    July 26, 2014 at 7:21 am

    तो सुरेश चव्हाणके कौन से दूध के धुले हुए हैं…रियूमर फैलाते हैं…कि वे मंत्री बनने जा रहे हैं….आखिर केंद्र में बनेंगे या राज्य में …या खुद अपने घर के मंत्री बने रहेंगे…क्या उन्हें खुद न्यूज की जानकारी है….चैनल पर बिंदास बोल या संदास बोल कार्यक्रम चलता है…उसमें वे खुद आते हैं…आखिर वे बताएं…कि उन्हें कितनी न्यूज की जानकारी है…..शायद ही लोगों को पता होगा कि गडकरी के चिटफंड कंपनी में चव्हाण भी एक सीओ है…इसी उम्मीद से लगा था…कि उन्हें अब तो भइया मंत्री बना दिया जाएगा…कुल मिला कर नवीन पांडे और उनकी टीम में और सुरेश चव्हाणके की टीम में कोई फर्क नहीं हैं…. ओ. के भाइ चलो किसी भी तरिके से रोजी रोटी का व्यवस्था तो हो रहा है…क्यों कि चव्हाणके अपने पैसा से चैनल थोड़े ही खोले हैं…. 😉 😮 😮 😛 🙄 🙁 🙁

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