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मानहानि के मामले में संडे पोस्ट के संपादक अपूर्व जोशी सहित चार को दो-दो साल की सजा

पिथौरागढ़। भारतीय जनता पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के खिलाफ एक समाचार छापकर उनकी कथित तौर पर हुई मानहानि के मामले में अदालत ने अखबार के संपादक सहित चार लोगों को दो-दो साल की सजा सुनाई है। यह सजा सुनाने के लिए न्यायालय को बंबई हाई कोर्ट के एक फैसले को नजीर बनाना पड़ा।

मालूम हो कि नोएडा से प्रकाशित एक साप्ताहिक समाचार पत्र द संडे पोस्ट में तीन वर्ष पूर्व भारतीय जनता पार्टी के नेता बिशन सिंह चुफाल से जुड़ा एक समाचार किया गया था। इस समाचार में की गई रिपोर्टिंग को चुफाल द्वारा अपमानजनक मानते हुए अखबार के संपादक अपूर्व जोशी, आकाश नागर, सुरेंद्र सिंह बिष्ट व नारायण सिंह राणा के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर कराया गया था।

मुकदमा मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कपिल कुमार त्यागी की अदालत में चला जहां न्यायालय ने शुक्रवार को चारों अभियुक्तों को दोषी ठहराते हुए उन्हें दो-दो साल के साधारण कारावास तथा प्रत्येक को एक हजार रुपए से दंडित किए जाने की सजा सुनाई।

अदालत ने इस फैसले में कहा है कि आरोपियों द्वारा अपने अखबार में मिथ्या एवं भ्रामक तथ्य प्रकाशित किये गये हैं। ऐसी स्थिति में यह साबित होता है कि उक्त समाचार पत्र दि संडे पोस्ट में जो तथ्य प्रकाशित किये गये हैं, उनसे परिवादी की मानहानि हुयी है।

अब प्रश्न यह है कि परिवादी की इस मानहानि के लिये कौन दायित्वाधीन है ? इस सम्बन्ध में माननीय उच्च न्यायालय, बम्बई द्वारा निम्नलिखित मामले में दी गयी विधि व्यवस्था महत्वपूर्ण है। अशोक जैन बनाम महाराष्ट्र राज्य 1986 क्रिमिनल लॉ जरनल 1987 (बम्बई) के मामले में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा यह अवधारित किया गया है कि “यदि किसी व्यक्ति के विरूद्ध मानहानिकारक कथन किसी समाचारपत्र में प्रकाशित किये जाते हैं तो उस समाचार पत्र के सम्पादक, मुद्रक, प्रकाशक दायित्वाधीन होंगे।”

माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दी गयी उपरोक्त विधि व्यवस्था के आलोक में परिवादपत्र का अवलोकन करने से स्पष्ट है कि इस मामले में अभियुक्त संख्या- 1 अपूर्व जोशी समाचार पत्र दि संडे पोस्ट का सम्पादक है, अभियुक्त संख्या-2 आकाश नागर व अभियुक्त संख्या-3 सुरेन्द्र सिंह बिष्ट कथित समाचार पत्र के सह सम्पादक हैं एवम् अभियुक्त नारायण सिंह राणा कथित समाचार पत्र का मुद्रक है, जैसा कि उक्त समाचार पत्र में अंकित है।

ऐसी स्थिति में परिवादी की मानहानि के लिये सभी अभियुक्तगण दायित्वाधीन होंगे। अतः पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य से स्पष्ट होता है कि परिवादी यह साबित करने में सफल रहा है कि अभियुक्तगण द्वारा कथित समाचार पत्र दि संडे पोस्ट में ऐसे कथन प्रकाशित किये गये जिससे परिवादी की मानहानि हुयी है।

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