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सुख-दुख

सुनील कश्यप को प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया की मैनेजिंग कमेटी का सदस्य चुने जाने पर बधाई!

सुनील कश्यप-

दोस्तों ये जीत कई मायने रखती है। आज प्रेस क्लब ऑफ इंडिया का वो ऎतिहासिक दिन था जिसने 68 साल में अपनी पहली महिला अध्यक्ष चुनी। Sangeeta Barooah Pisharoty आज हमारी अध्यक्ष हुई। आपकी रहनुमाई में काम करके हमको नित रोज नए आयाम सीखने को मिलेंगे।

मैं अपने सभी साथियों का शुक्रिया अदा करता हूँ। आप की बदौलत हमको ये जीत हासिल हुई। वो सारे प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के मेंबर, वो हमारे दोस्त जिन्होंने हमारे लिए सोशल मीडिया पर समर्थन किया। आपके हम आभारी है। इस नई जिम्मेदारी के साथ। आप सभी साथियों का तहे दिल से शुक्रिया!


सुनील कश्यप भाई को प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया की मैनेजिंग कमेटी के सदस्य चुने जाने पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं। गांव की गलियों से निकलकर बीएचयू तक का सफ़र और फिर देश के सबसे प्रतिष्ठित पत्रकार संगठन की मैनेजिंग कमेटी तक पहुँचना, यह कोई संयोग नहीं, बल्कि निरंतर संघर्ष, अनुशासन और आत्मसम्मान के साथ तपे हुए जीवन का परिणाम है। सुनील भाई ने हालात से समझौता नहीं किया, बल्कि हालातों को समझकर खुद को गढ़ा। उनकी यह जीत उन तमाम युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। पत्रकारिता को उन्होंने सिर्फ पेशा नहीं, बल्कि ज़िम्मेदारी माना है और यही बात उन्हें अलग बनाती है।प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया में उनकी यह नई भूमिका निश्चय ही संस्था को मज़बूती देगी और पत्रकारों की आवाज़ को और बुलंद करेगी। संघर्ष को सलाम, सफलता को नमन। एक बार फिर बहुत-बहुत बधाई सुनील भाई!

-डॉ रवींद्र राणा


प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के चुनाव में Sunil Kashyap जैसे बेहद ज़मीनी और तीखे तेवर वाले पत्रकार का जीत जाना इस बात का प्रमाण है कि भारत में पत्रकारिता को थोड़ी देर के लिए सत्ता का गुलाम बनाया जा सकता है। लेकिन लगातार झुकाया नहीं जा सकता।

गोदी मीडिया के दलाल, लिजलिजे, नीच पत्रकारों के हड़बोंग में आज भी जनता को सच्चे पत्रकारों की पहचान है।

यही चाहत है कि दिन – प्रतिदिन आपका कलम सत्ता के लिए सूखा, नुकीला बांस बनता चला जाए।

सुनील भाई ज़िंदाबाद!
आपके पूरे पैनल को बधाई!

-धर्मराज कुमार


भाई सुनील कश्यप जी प्रेस क्लब ऑफ इंडिया का चुनाव जीत गए। “कारवां” पत्रिका के लिए रिपोर्टिंग करने वाले सुनील भाई की कई रिपोर्टों से मैं मुताशिर नहीं होता हूं। लेकिन लोकतंत्र का असहमति और मतभेद तो श्रृंगार होता है। सुनील भाई मार्जिनलाइज्ड सोसायटी से आते हैं। जैसा कि आप सब जानते हैं कि बहुत मुश्किल से देश के मार्जिनलाइज्ड सेक्शन के लोग इन जगहों पर पहुंच रहे हैं। प्रेस क्लब जैसे जगह पर वंचित तबके की उपस्थिति बढ़े इस बात को लेकर मेरे अंदर का “ठाकुर” हमेशा हिमायती रहता है। इसलिए प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के चुनाव में मेरे जानने वाले जो भी वोटर हैं, उनसे मैंने अपील की थी कि सुनील भाई को अपना बहुमूल्य वोट देकर जिताएं… और सुनील भाई जीत भी गए!

-राजीव सिंह जादौन


अंग्रेज़ी की प्रतिष्ठित पत्रिका The Caravan के रिपोर्टर सुनील कश्यप भैया समाज के सबसे वंचित तबकों की अनसुनी आवाज़ों को अंग्रेज़ी पब्लिक स्फेयर में दर्ज कराने वाले उन पत्रकारों में हैं, जो सिर्फ़ रिपोर्ट नहीं लिखते बल्कि गढ़े हुए नैरेटिव को चुनौती भी देते हैं। प्रेस क्लब में होने वाले चुनाव में वे प्रत्याशी रहे। उन्हें वोट देना उन आवाज़ों के साथ खड़े होने का अवसर है जिन्हें अक्सर मुख्यधारा की पत्रकारिता सुनने से कतराती है। सुनील कश्यप और उनका पैनल विजयी रहा।

-पंकज कुमार

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