
संजय कुमार सिंह
अब यह स्पष्ट हो चला है कि नरेन्द्र मोदी और संघ परिवार के नेतृत्व में सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को दबाव में लेने की कोशिशें शुरू कर दी हैं। इसका मकसद अनुकूल फैसला कराना चाहे न हो, आम लोगों के बीच यह संदेश भेजना ही हो सकता है कि हम तो मुसलमानों को कसने के लिए (उनके खिलाफ) कोई भी (असंवैधानिक भी) कानून बना सकते हैं, बस सुप्रीम कोर्ट आड़े न आये। वक्फ कानून सुप्रीम कोर्ट में अटक जाने के बाद प्रचारकों का इको सिस्टम लोगों के दिमाग में यह बात बैठाने में लग गया है। और मुझे लगता है कि कामयाब भी है। इस तरह भाजपा का मकसद वक्फ कानून बनाना पास कराना रहा हो या नहीं, सुप्रीम कोर्ट को अपना विरोधी दिखाना और साबित करने भी रहा हो सकता है। जो भी हो, अखबार उसे ऐसा करने में मदद कर रहे हैं। बाकी के लिए पार्टी और परिवार के पास ट्रोल सेना से लेकर आईटी सेल है जिसे सांसद, विधायक, मंत्री और पार्टी के अगुआ इशारा करके काम करा सकते हैं।
मामला सुप्रीम कोर्ट का था इसलिए पहले उपराष्ट्रपति आगे आये और उनकी आलोचना जिस कदर हुई उससे निपटने का माद्दा संघ परिवार के इको सिस्टम में कभी नहीं रहा। ऐसे में पार्टी को अपने स्तर पर ही आना था और पार्टी के पढ़े-लिखे बताये गये सांसदों में एक, निशिकांत दुबे मैदान में कूद पड़े। पार्टी की ओर से ऐसा करने के दूरगामी परिणाम हो सकते हैं। इसलिए तुरंत पार्टी के कार्यवाहक अध्यक्ष ने मोर्चा संभाला और निशिकांत दुबे के बयान से किनारा कर लिया। अब कहानी जैसे चाहिये वैसे बनाई जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट और मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ पढ़े-लिखे सांसद का अनपढ़ जैसा बयान भले अखबारों में नहीं छपता करोड़ों कार्यकर्ताओं द्वारा मुश्किल से और समय लगाकर चुने जाने वाले कार्यवाहक अध्यक्ष ने अपने सांसद के बयान से पार्टी को अलग कर लिया। एक सांसद के फूहड़ बयान से पार्टी का पल्ला झाड़ लेना निश्चित रूप से फूहड़ बयान से बड़ी खबर है और इस तरह आज यह खबर फूहड़ बयान के साथ अमर उजाला में चार कॉलम का बॉटम है। इंडियन एक्सप्रेस में दो कॉलम की इस खबर का एक लाइन का फ्लैग शीर्षक, दो लाइन का उपशीर्षक और चार लाइन का मुख्य शीर्षक है। इसमें ऐसी टिप्पणी के खिलाफ (दुबे को) चेतावनी भी है। इस तरह, पार्टी ने (या सरकार ने) जब कार्रवाई कर ही दी तो सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई की कितनी जरूरत है इसे तय करना किसी के लिए मुश्किल होगा।
भाजपा के पास ट्रोल सेना और व्हाट्सऐप्प प्रचारकों की ऐसी फौज है कि वह मौके पर जरूरत के अनुसार कहानी गढ़ और फैला लेती है। आज के लिए पहले पन्ने की यह खबर बनाई गई है। आगे की कार्रवाई जरूरत के अनुसार होगी। मेरे लिये खबर यह है कि इतनी अच्छी पार्टी की इतनी अच्छी रणनीति उसे ज्यादा कामयाबी नहीं दिला पाई और आज यह खबर इन दो अखबारों के अलावा दि एशियन एज में भी पहले पन्ने पर नहीं है जहां कोई विज्ञापन नहीं है। हिन्दी के मेरे दूसरे अखबार नवोदय टाइम्स में भी यह खबर पहले पन्ने पर नहीं है। द टेलीग्राफ में वैसे ही संभावना कम थी। हिन्दुस्तान टाइम्स में यह खबर सिंगल कॉलम की है अंदर विवरण होने का संकेत है। पहले पन्ने पर खबर का शीर्षक है, भाजपा सांसद दुबे ने सुप्रीम कोर्ट पर टिप्पणी करके विवाद को हवा दी। टाइम्स ऑफ इंडिया ने इस खबर को तीन कॉलम में छापा है। शीर्षक है, भाजपा ने (अपने) सांसद दुबे की टिप्पणी खारिज की कि, ‘भारत में गृहयुद्ध के लिए मुख्य न्यायाधीश जिम्मेदार हैं’। इस टिप्पणी और इसे भाजपा ने खारिज किया – शीर्षक के कई मायने हैं और पाठक समझ सकते हैं कि यह पहले पन्ने पर क्यों है। आज ही इंडियन एक्सप्रेस में पहले पन्ने पर छपी खबर के अनुसार न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के घर पर 14 मार्च को आग लगने और नकदी मिलने की खबरों की जांच में दिल्ली के पुलिस आयुक्त और डीसीपी की गवाही हो गई है। अधिकारियों ने नकदी मिलने की पु्ष्टि की है और कहा है कि वाजिब प्रक्रिया वरिष्ठों को सतर्क करने की थी। और वीडियो डिलीट करने का कारण यह बताया गया कि यह गलत हाथों में न चला जाये। इस खबर से पता चलता है कि मामले की जांच चल रही है।
मुझे लगता है कि इस खबर से और वैसे भी, सरकार समर्थक मीडिया यह प्रचारित कर रहा है कि सुप्रीम कोर्ट या मुख्य न्यायाधीश इस मामले में जांच के आदेश नहीं दे रहे हैं इसलिए जांच नहीं हो (पा) रही है। दूसरी ओर, अगर जजों को मिली सुरक्षा के कारण यह जांच या इसकी अनुमति मुश्किल हो तो इस बात की जांच तो कराई ही जा सकती है कि वहां नकदी पहुंची कैसे। जब न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने कहा है कि उन्हें पता नहीं है तो उसपर यकीन नहीं करने का कोई कारण नहीं है और उनके हित में जांच तो होनी ही चाहिये कि कौन उन्हें फंसाने या बदनाम करने की कोशिश कर रहा है। जाहिर है यह जांच सरकार के लोग करेंगे और जज साहब को जो कहना है कह चुके हैं तो इस आधार पर जांच क्यों नहीं होनी चाहिये या उन्हें मीडिया ट्रायल का शिकार क्यों होने देना चाहिये। या तो एजेंसियां साबित करें कि पैसे उन्हीं के थे या यह मान लिया जाये कि उन्हें फंसाने-बदनाम करने की कोशिश थी। भले कोशिश करने वाले का नाम न पता चले पर अभी तो कटघरे में जज साब हैं और ऐसा लग रहा है कि उन्हें अनुचित सुरक्षा मिली हुई है। मीडिया द्वारा बदनाम किये जाने के मामले में उनकी स्थिति रिया चक्रवर्ती से अच्छी नहीं है भले यह सब उनके बचाव के नियमों के कारण है।
इससे अलग, आज नवोदय टाइम्स में एक खबर है – “सोनिया, राहुल पर आरोप पत्र एक षडयंत्र :खरगे। कहने की जरूरत नहीं है कि आरोप पत्र दायर होने की खबर सभी अखबारों में प्रमुखता से छपी थी। सबको पता है कि यह मामला राजनीतिक है और राजनीतिक कारणों से बनाया गया है। फिर भी इस पर कांग्रेस का पक्ष नहीं छपता है सामान्य तौर पर कांग्रेस का पक्ष मांगा जाना चाहिये और मूल खबर के साथ पहले ही दिन छपना चाहिये था। अगर किसी कारण से नहीं छपा तो उसके अगले दिन छपना चाहिये था। पर अब स्थिति है कि कांग्रेस इस बारे में बयान जारी कर रही है, प्रेस कांफ्रेंस कर रही है सरकार पर आरोप लगा रही है लेकिन खबर को प्रमुखता नहीं मिल रही है। आज भी यह खबर नवोदय टाइम्स में प्रेस कांफ्रेंस की फोटो के साथ तीन कॉलम में है जबकि हिन्दुस्तान टाइम्स में सिंगल कॉलम में है। शीर्षक है, सोनिया और राहुल के खिलाफ ईडी की कार्रवाई के बाद खरगे ने कहा, पार्टी इससे डरने वाली नहीं है। इसके अलावा यह खबर मेरे किसी और अखबार में पहले पन्ने पर नहीं दिखी।
पहले पन्ने पर एक दिलचस्प खबर दि एशियन एज में है। इसके अनुसार प्रधानमंत्री और अमित शाह ने शनिवार को कहा है कि संयमित खान-पान की आदतें अपनाने और स्वस्थ जीवनशैली को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने एक्स पर एक पोस्ट में लोगों से अपील की थी कि वे खाने वाले तेल का सेवन कम करें तथा स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं। इसका जवाब देते हुए श्री मोदी ने कहा:विश्व यकृत दिवस को संयमित खान-पान और स्वस्थ जीवन जीने के आह्वान के साथ मनाने का सराहनीय प्रयास। तेल का सेवन कम करने जैसे छोटे उपाय बहुत बड़ा बदलाव ला सकते हैं। आइए, हम सब मिलकर मोटापे के बारे में जागरूकता बढ़ाकर एक स्वस्थ और तंदुरुस्त भारत का निर्माण करें। इस मौके पर केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज नई दिल्ली में विश्व यकृत दिवस पर इंस्टीट्यूट ऑफ लीवर बाईलियरी साइंस द्वारा आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस तरह सरकार के प्रचार की यह खबर तो पहले पन्ने पर है लेकिन कांग्रेस के खिलाफ जो खबर पहले छप चुकी है उसपर कांग्रेस का पक्ष आज पहले पन्ने पर नहीं है या कम है।
आज के अखबारों की तीसरी बड़ी खबर असम भाजपा के हाशिये पर पड़े नेताओं से संबंधित है। इसके अनुसार, राज्य विधान सभा चुनाव से पहले भाजपा ने हाशिये पर कर दिये गये दिग्गजों को प्रभावित किया। संगठन के मुद्दे पर राज्य भाजपा प्रमुख ने काडर से नियमित बैठक लेना शुरू किया है। असम में भाजपा की चुनावी तैयारियों की यह खबर भी आज पहले पन्ने पर है। लेकिन दूसरे दलों की तैयारियों से लेकर अन्य खबरें पहले पन्ने पर बमुश्किल दिखती हैं। कल ही मैंने लिखा था, दिल्ली में सांप्रदायिक तनाव की खबर दिल्ली के अखबार में पहले पन्ने पर नहीं थी उसकी जगह पश्चिम बंगाल के राज्यपाल का माल्दा दौरा था। आज उनके मुर्शिदाबाद दौर की खबर पहले इंडियन एक्सप्रेस से लेकर नवोदय टाइम्स तक में पहले पन्ने पर है। इसी तरह आज एक खबर बांग्लादेश में हिन्दू नेता की हत्या के बाद बांग्लादेश को भारत के आदेश, हिन्दुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करे बांग्लादेश अमर उजाला में पहले पन्ने पर प्रमुखता से है।



